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मुंबई का दम घोंट रही है जहरीली नाइट्रोजन डाईऑक्साइड, कौन से इलाके सबसे ज्यादा प्रदूषित : Report

देश के कई प्रमुख शहरों में प्रदूषण को लेकर किये गये एक अध्ययन में पता चला है कि मुंबई का दम जो जहरीली गैस घोंट रही है, वह नाइट्रोजन डाईऑक्साइड (NO₂) है। खासतौर पर मुंबई में NO₂ काफी ज्यादा खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। यह चौंकाने वाला जानकारी का खुलासा ग्रीनपीस रिपोर्ट (Greenpeace Report) में किया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई के 2 इलाके ऐसे भी हैं, जहां NO₂ सामान्य स्तर से कहीं ज्यादा पाया गया है।

कैसे फैलती है यह जहरीली गैस NO₂? क्या इसे फैलने से रोकने का कोई उपाय है? इस जहरीली गैस के संपर्क में आने से कौन सी बीमारियों के चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है? और मुंबई में वो कौन से दो इलाके हैं, जहां की हवा में सबसे ज्यादा NO₂ पाया गया?

mumbai pollution

कैसे फैलता है NO₂?

Greenpeace Report से मिली जानकारी के अनुसार नाइट्रोजन डाईऑक्साइड एक ऐसी जहरीली गैस है, जिसे देख पाना लगभग असंभव सा होता है। इस जहरीली गैस का संबंध शहरी इलाकों में ट्रैफिक और ईंधन के जलने से होता है। इसका मतलब है कि जिन शहरी इलाकों में जीवाश्म ईंधन जितना ज्यादा जलेगा, वहां की हवा में NO₂ की मात्रा उतनी ज्यादा बढ़ेगी। सीधे शब्दों में कहा जाए तो जीवाश्म ईंधन ही NO₂ का प्रमुख स्रोत है।

NO₂ की वजह से कौन सी बीमारियां फैलती हैं?

विशेषज्ञों से मिली जानकारी के मुताबिक NO₂ की चपेट में आने से सांस से संबंधित बीमारियां जैसे दमा, सांस की नली में सूजन, सांस लेने में तकलीफ, सांस की नली में जलन महसूस होने से लेकर श्वसन परिस्थितियों के बिगड़ने का खतरा पैदा हो जाता है। इसकी वजह से फेंफड़ों में समस्याएं, एलर्जी, हृदय रोग, फेंफड़ों के कैंसर और यहां तक कि सांस संबंधित बीमारियों या कैंसर की वजह से मृत्यु तक होने की आशंका पैदा हो जाती है।

बच्चों की कुल आबादी के लगभग 10% हिस्सा लगातार NO₂ के संपर्क में रहने की वजह से कई तरह बीमारियों के चपेट में आते हैं। अचकुलविसुत एट अल. (2019) ने साल 2015 में मुंबई में बच्चों में दमा के 3,970 मामलों के लिए NO₂ को ही जिम्मेदार ठहराया था।

mumbai traffic and air quality

मुंबई के इन दोनों इलाकों में सबसे ज्यादा NO₂

साल 2023 में मुंबई के 24 सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशंस (CAAQMS) में से 22 में वार्षिक औसत NO₂ की सांद्रता WHO के दिशानिर्देशों से ज्यादा हो गयी थी। मुंबई के जिन दो इलाकों में सबसे ज्यादा NO₂ पाया गया था उनमें मलाड वेस्ट पहले नंबर पर है। इसके बाद बस डिपो के पास बांद्रा कुर्ला स्टेशन के पास वाले इलाके में सबसे ज्यादा NO₂ पाया गया। मझगांव और सायन में भी NO₂ का औसत स्तर साल के 70% समय में निर्धारित सीमा से पार चला गया था। मझगांव में NO₂ साल के 267 दिन निर्धारित औसत सीमा से ज्यादा पाया गया।

mumbai air pollution

ग्रीनपीस इंडिया में जलवायु न्याय अभियानकर्ता सेलोमी गर्नायक का कहना है कि यह रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण है। इससे यह साबित होता है कि वायु प्रदूषण सिर्फ दिल्ली या उत्तर भारत की समस्या नहीं है। देश के सभी शहरों में NO₂ के स्तर को बढ़ाने में मुख्य भूमिका ट्रैफिक और निजी वाहनों की होती है।

इस समस्या से निपटने के लिए हमें परिवहन के सार्वजनिक वाहनों की ओर ध्यान देने की जरूरत है। इस समय पर्यावरण को बचाने के लिए परिवहन के साफ और आसानी से उपलब्ध वाहनों की ज्यादा जरूरत है, ताकि आम लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर न पड़े। सरकार को भी इस तरह ध्यान देने की जरूरत है।

बता दें, ग्रीनपीस के मोबिलिटी अभियानकर्ता आकिज़ फारुख का कहना है कि ग्रीनपीस इंडिया का अध्ययन बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, मुंबई, कोलकाता और पुणे जैसे शहरों को केंद्र में रखकर किया गया था। इस रिपोर्ट में लोगों को निजी वाहनों के बजाए सार्वजनिक परिवहन के साधनों का इस्तेमाल करने के प्रति जागरुक करने की बात कही गयी है।

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