राष्ट्रीय पर्वतारोहण दिवस हर साल 1 अगस्त को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य पर्वतारोहण के साहसिक खेल को बढ़ावा देना और उन लोगों को सम्मानित करना है जिन्होंने इस खेल में अद्वितीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। पर्वतारोहण एक ऐसा खेल है जो न केवल शारीरिक क्षमता बल्कि मानसिक धैर्य और साहस की भी परीक्षा लेता है। इस मौके पर हम आपके सामने प्रस्तुत करेंगे भारत के सबसे ऊंचे पर्वतों की सूची और उनकी ऊँचाई।

पर्वतारोहण का इतिहास
राष्ट्रीय पर्वतारोहण दिवस हर साल 1 अगस्त को संयुक्त राज्य अमेरिका के उत्साही नागरिकों द्वारा मनाया जाता है। यह विशेष दिन बॉबी मैथ्यूज और जोश मैडिगन की उल्लेखनीय उपलब्धि की याद दिलाता है, जिन्होंने न्यूयॉर्क के एडिरोंडैक पर्वतों की सभी 46 चोटियों पर चढ़ने का असाधारण कारनामा किया। उनकी यात्रा का समापन 1 अगस्त 2015 को अंतिम चोटी, व्हाइटफेस माउंटेन, पर सफलतापूर्वक चढ़ाई के साथ हुआ।
राष्ट्रीय पर्वतारोहण दिवस बॉबी मैथ्यूज और जोश मैडिगन की अद्भुत पर्वतारोहण उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए स्थापित किया गया था। एडिरोंडैक की कठिन चोटियों पर विजय प्राप्त करने में उनकी समर्पण और दृढ़ संकल्प ने पर्वतारोहण के इतिहास में एक स्थायी छाप छोड़ी।

पर्वतारोहण के लाभ
पर्वतारोहण के अनेक शारीरिक और मानसिक लाभ हैं। यह एक बेहतरीन कार्डियोवस्कुलर एक्सरसाइज है जो हृदय को स्वस्थ रखती है और मांसपेशियों को मजबूत बनाती है। इसके अलावा, यह तनाव को कम करता है और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। प्रकृति के करीब रहकर पर्वतारोही मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त करते हैं।
भारत में पर्वतारोहण
भारत में पर्वतारोहण के लिए अनेक प्रसिद्ध स्थान हैं, जैसे कि हिमालय, पश्चिमी घाट और अरावली पर्वत श्रृंखलाएँ। भारत में पर्वतारोहण की परंपरा बहुत पुरानी है और यहाँ के पर्वतारोहियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। पिछले एक दशक से पर्वतारोहियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। 1960 से 1990 तक जहां कर्नल नरेंद्र कुमार, सोनम ग्यात्सो के बाद गिने चुने लोगों का नाम आता था, वहीं अब यह संख्या तेजी से बढ़ी है। 2001 के बाद से देखें तो 50 से अधिक पर्वतारोहियों की सूची आपको आसानी से मिल जायेगी।

पर्वतारोहण के दौरान सावधानियाँ
पर्वतारोहण एक रोमांचक खेल है, लेकिन इसमें जोखिम भी होते हैं। इसलिए, पर्वतारोहण के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सावधानियाँ बरतनी चाहिए। सबसे पहले, अच्छे उपकरणों का उपयोग करना चाहिए और उनके सही तरीके से उपयोग की जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा, मौसम की जानकारी रखना और किसी अनुभवी गाइड के साथ जाना भी महत्वपूर्ण है।
भारत की सबसे ऊँची चोटियॉं और उनकी उँचाई
| चोटी का नाम | राज्य | ऊँचाई (फीट में) | |
|---|---|---|---|
| 1 | कंचनजंघा | सिक्किम | 28,169 |
| 2 | नंदा देवी | उत्तराखंड | 25,643 |
| 3 | कामेट पर्वत | उत्तराखंड | 25,446 |
| 4 | साल्टोरो कांगड़ी/K10 | लद्दाख | 25,400 |
| 5 | सासेर कांगड़ी I/K22 | लद्दाख | 25,171 |
| 6 | मामोस्तोंग कांगड़ी/K35 | लद्दाख | 24,659 |
| 7 | सासेर कांगड़ी द्वितीय ई | लद्दाख | 24,649 |
| 8 | सासेर कांगड़ी III | लद्दाख | 24,594 |
| 9 | तेरम कांगड़ी प्रथम | लद्दाख | 24,482 |
| 10 | जोंगसोंग पीक | सिक्किम | 24,482 |
| 11 | K12 | लद्दाख | 24,370 |
| 12 | कबरू एन | सिक्किम | 24,318 |
| 13 | घेंट कांगड़ी | लद्दाख | 24,281 |
| 14 | रिमो आई | लद्दाख | 24,229 |
| 15 | तेरम कांगड़ी III | लद्दाख | 24,219 |
| 16 | किरात चूली | सिक्किम | 24,153 |
| 17 | मन शिखर | उत्तराखंड | 23,858 |
| 18 | अप्सरासस कांगड़ी | लद्दाख | 23,770 |
| 19 | मुकुट पर्वत | उत्तराखंड | 23,760 |
| 20 | रिमो III | लद्दाख | 23,730 |
| 21 | सिंघी कांगड़ी | लद्दाख | 23,629 |
| 22 | हरदेओल | उत्तराखंड | 23,494 |
| 23 | चौखम्बा प्रथम | उत्तराखंड | 23,418 |
| 24 | नून-कुन | लद्दाख | 23,408 |
| 25 | पौहुंरी | सिक्किम | 23,385 |
| 26 | पाथीभरा | सिक्किम | 23,369 |
| 27 | त्रिशूल I | उत्तराखंड | 23,359 |
| 28 | सतोपंथ | उत्तराखंड | 23,212 |
| 29 | तिरसुली | उत्तराखंड | 23,209 |
| 30 | चोंग कुमडांग री | लद्दाख | 23,199 |
| 31 | दूनागिरी | उत्तराखंड | 23,182 |
| 32 | कांग्टो | अरुणाचल प्रदेश | 23,163 |
| 33 | न्येग्यी कंसांग | अरुणाचल प्रदेश | 23,120 |
| 34 | पद्मनाभ | लद्दाख | 23,064 |
| 35 | शुदु त्सेन्पा | सिक्किम | 23,045 |
| 36 | चामशेन कांगड़ी/तुघ्मो ज़ारपो | लद्दाख | 23,022 |
| 37 | अक तश | लद्दाख | 23,018 |
| 38 | चोंग कुमडांग री II | लद्दाख | 22,979 |
| 39 | ऋषि पहाड़ | उत्तराखंड | 22,940 |
| 40 | थलय सागर | उत्तराखंड | 22,913 |
| 41 | लक्ष्मी पर्वत | लद्दाख | 22,910 |
| 42 | केदारनाथ मुख्य | उत्तराखंड | 22,769 |
| 43 | लैंगपो | सिक्किम | 22,851 |
| 44 | सरस्वती पर्वत I/सरस्वती शिखर | उत्तराखंड | 22,769 |
| 45 | शाही कांगड़ी | लद्दाख | 22,749 |
| 46 | श्री कैलाश | उत्तराखंड | 22,743 |
| 47 | कालंका | उत्तराखंड | 22,739 |
| 48 | चोर्टेन न्यिमा री | सिक्किम | 22,726 |
| 49 | सफ़ मीनल / पी. 6911 | उत्तराखंड | 22,673 |
| 50 | पंचचूली II | उत्तराखंड | 22,651 |
राष्ट्रीय पर्वतारोहण दिवस पर्वतारोहण के खेल को बढ़ावा देने और पर्वतारोहियों की उपलब्धियों को सम्मानित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह दिन हमें साहस, धैर्य और आत्मविश्वास की महत्ता का भी एहसास कराता है। पर्वतारोहण के माध्यम से हम न केवल अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि प्रकृति की सुंदरता का भी आनंद ले सकते हैं।



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