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रेगिस्तान में आयी बाढ़ और डूब गया राजस्थान का उदयपुर, जानिए यह किस्सा

मेवाड़...जो राजपूती शान और बलिदानों का प्रतिक रहा है। मेवाड़ की पहचान रानी पद्मावती और रावल रतन सिंह के साथ-साथ राणा कुंभा, राणा सांगा और महाराणा प्रताप से भी है। महाराणा प्रताप का जन्म मेवाड़ के राणा उदय सिंह और रानी जयवंता बाई के घर सबसे बड़े बेटे के रूप में हुआ था। महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को मेवाड़ में हुआ। मेवाड़ की कई राजधानियां रही हैं, जिनमें नागदा, आहाड़ और चित्तौड़ शामिल है।

हर बार विभिन्न कारणों से मेवाड़ की राजधानियां बदली गयी। करीब 800 सालों के लंबे समय तक चित्तौड़ मेवाड़ राज्य की राजधानी बना रहा। इस समय चित्तौड़गढ़ के दुर्ग को अभेद्य किला माना जाता था। लेकिन वर्ष 1567 में जब मुगल बादशाह अकबर ने चित्तौड़गढ़ किले पर आक्रमण किया तो यह किला अभेद्य नहीं रह सका।

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उसी समय महाराणा उदय सिंह II (1537-1572) ने उदयपुर को मेवाड़ की राजधानी बनाने का फैसला लिया। जो महाराणा प्रताप (1572-1597) के समय भी बनी हुई थी।

उदयपुर अपने झीलों की वजह से राजस्थान में काफी ज्यादा लोकप्रिय है। उदयपुर में कई मीठे पानी की झीलें हैं, जिनके बारे में कहा जाता है मीठे पानी की सभी झीलें कृत्रिम हैं। उदयपुर का सबसे प्रसिद्ध कृत्रिम और मीठे पानी की झील है 'पिछोला'। पर क्या आप जानते मीठे पानी की इस कृत्रिम झील ने रेगिस्तान में भी बाढ़ ला दिया था जिसमें आधा शहर ही डूब गया था।

इस बात का खुलासा मोहन लाल सुखाडिया विश्‍वविद्यालय के इतिहास विभाग में डॉ. मनीष श्रीमाली द्वारा किए गए शोध में हुआ है। डॉ. मनीष श्रीमाली ने महाराणा प्रताप और उनके व्यक्तित्व पर एक विस्तृत शोध किया है जिसमें मेवाड़ राज्य से जुड़ी कई जानकारियां भी सामने आयी हैं।

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मेवाड़ की 4 प्रमुख झीलें

इस शोध के अनुसार मेवाड़ में कई विश्व-प्रसिद्ध झीलें हैं, जिनका प्रयोग जलापूर्ति एवं सिंचाई हेतु किया जाता रहा है। विस्तार एवं प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से प्रदेश की चार झीलें उल्लेखनीय है -

  • उदयसागर
  • पिछोला
  • राजसमंद
  • जयसमंद

क्यों हुआ था पिछोला झील का निर्माण

शोध के मुताबिक उदयसागर झील का निर्माण महाराणा उदयसिंह के समय हुआ था वहीं पिछोला झील का निर्माण महाराणा लाखा (1382-1421) के समय किसी बंजारे ने किया था। इस झील का नाम पिछोला इसके निकट स्थित पिछोली गांव पर पड़ा है। वहीं विकीपेडिया से मिली जानकारी के अनुसार पिछोला झील का निर्माण उदयपुर के महाराणा (संभवतः महाराणा लाखा) ने झील में सूर्यास्त का आनंद लेने के लिए बनवाया था। यह झील भी मीठे पानी का एक कृत्रिम झील ही है।

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जब झील के पानी में डूबा आधा शहर

डॉ. मनीष श्रीमाली की शोध से पता चलता है कि वर्ष 1795 में किसी कारणवश पिछोला झील का बांध टूट गया था। इस वजह से झील का पानी पूरे उदयपुर शहर में भरने लगा था और इससे आधा शहर ही डूब गया था। कहा जा सकता है कि इस कृत्रिम झील के कमजोर बांध ने रेगिस्तान में बाढ़ ला दी थी। शोध के अनुसार बाद में सुदृढ़ बांध का निर्माण महाराणा भीमसिंह (1778-1828) ने करवाया था।

मेवाड़ राज्य की दूसरी झीलों में जयसमुद्र या जयसमंद को देबर भी कहाते हैं। इसका निर्माण महाराणा जयसिंह ने करवाया था (1687 से 1691 ई.)। कप्तान येट् साहिब इसे तालाब को संसार में मनुष्य का बनाया हुआ सबसे बड़ा जलाशय बताते हैं। राजसमुद्र या राजसमंद तालाब का निर्माण राजसिंह ने करवाया था। यह झील 4 मील लंबी तथा 1.3/4 मील चौड़ी हैं। इसकी पाल पर रणछोड़ भट्ट द्वारा रचित 'राजप्रशस्ति' 25 शिलाओं पर उत्कीर्ण है।

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