जीवन में आसमान की ऊंचाई छुना कौन नहीं चाहेगा। लेकिन आसमान के जितना करीब पहुंचते हैं, उतना ही पता चलता है कि आसमान कितने रहस्यों से भरा हुआ है। अगर आप भी आसमान के रहस्यों के बारे में जानने में दिलचस्पी रखते हैं तो 8 अप्रैल का दिन बड़ा खास होने वाला है।
8 अप्रैल को एक बेहद दुर्लभ सूर्यग्रहण होने वाला है। अगर इस सूर्यग्रहण को देखने से चुक गये तो अगली बार ऐसा मौका 20 सालों के बाद ही मिलेगा। बता दें, हाल ही में होली के दिन यानी 25 मार्च को चंद्रग्रहण हुआ था। लेकिन वह चंद्रग्रहण भी भारत में नजर नहीं आया था।

8 अप्रैल को होने वाला सूर्यग्रहण दुनियाभर की सुर्खियों में छाया हुआ है। जैसा कि हम सभी जानते हैं, जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है और चंद्रमा की परछाई पृथ्वी पर पड़ती है तब सूर्यग्रहण लगता है। 8 मार्च को पूर्ण सूर्यग्रहण होने वाला है।
वलयाकार सूर्यग्रहण की तुलना में पूर्ण सूर्यग्रहण अधिक समय तक और ज्यादा जगहों पर दिखाई देता है। वलयाकार सूर्यग्रहण में चंद्रमा पूरे सूर्य को तो ढंक लेता है लेकिन उसके बाहरी किनारे रह जाते है। इस वजह से वलयाकार सूर्यग्रहण आसमान में आग के छल्ले जैसा दिखाई देता है।
क्यों खास होगा इस बार का सूर्यग्रहण
8 अप्रैल को होने वाला पूर्ण सूर्यग्रहण सबसे अधिक स्पष्ट रूप से अमेरिका में दिखाई देगा। इससे पहले वर्ष 2017 में अमेरिका में पूर्ण सूर्यग्रहण दिखाई दिया था। अगर 8 अप्रैल 2024 को होने वाले पूर्ण सूर्यग्रहण को देखने से अमेरिकावाले चुक गये तो उन्हें 20 सालों का इंतजार करना पड़ेगा। अमेरिका में अगली बार सूर्यग्रहण साल 2044 में होगा। लेकिन उस समय सूर्यग्रहण इस बार के मुकाबले काफी कम जगहों पर ही नजर आएगा।

इसके अगले साल यानी 2045 में भी अमेरिका में सूर्यग्रहण होगा, जिसे अमेरिका में आसानी से देखा जा सकेगा। यह सूर्यग्रहण अमेरिका के डलास, क्लीवलैंड, बफेलो, न्यूयॉर्क जैसे शहरों में दिखाई देगा। बताया जाता है कि इस ग्रहण का साक्षी बनने के लिए लोग बड़ी संख्या में इन शहरों में होटल बुक कर रहे हैं। संभावना जतायी जा रही है कि इन शहरों में ग्रहण के समय सड़कजाम भी लग जाए। अमेरिका के अलावा यह ग्रहण कनाडा में दिखाई देगा।
क्या भारत में नजर आएगा सूर्यग्रहण
साल का पहला सूर्यग्रहण 8 अप्रैल को होगा। इस साल ग्रहण लगभग 4 मिनट 28 सेकेंड का होगा। यह सूर्यग्रहण पूर्णग्रास ग्रहण होने वाला है। लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा। यह सूर्यग्रहण पश्चिम एशिया, दक्षिण-पश्चिम यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, अटलांटिक महासागर, उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव और अफ्रीका में दिखाई देगा।



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