आंध्र प्रदेश के तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के प्रति भक्तों में अपार श्रद्धा है। हर साल लाखों-करोड़ों भक्त भगवान बालाजी के दर्शन करने के लिए आंध्र प्रदेश के तिरुपति जाते हैं। उनके द्वारा चढ़ाये गये चढ़ावों की वजह से ही तिरुपति देवस्थानम की गिनती देश के सबसे अमीर मंदिरों में होती है। भगवान बालाजी को लेकर कुछ जानकारियां हैं जिन्हें भक्त अच्छी तरह से जानते हैं।
जैसे भगवान बालाजी के बाल असली हैं। उन्हें कोई नकली बालों का विग नहीं पहनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं पत्थर से बनी भगवान बालाजी की मूर्ति को हमेशा पसीना क्यों आता है?

आइए आपको तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम मंदिर से जुड़ी ऐसी ही कुछ चौंकाने वाली लेकिन बहुत ही दिलचस्प जानकारियां देते हैं जो इसे श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र बनाती है।
1. अंजाने गांव से आती है पूजन सामग्री
तिरुपति बालाजी मंदिर में भगवान को जो भी सामग्री चढ़ायी जाती है जैसे फूल, माला, मक्खन, दुध, छाछ और यहां तक की उनका अन्न-भोग, वह सब सामान कहीं और नहीं बल्कि एक निर्धारित गांव से आता है। बताया जाता है कि यह गांव तिरुपति मंदिर से लगभग 22 किमी की दूरी पर बसा हुआ है। लेकिन न तो कहीं भी इस गांव के नाम का उल्लेख किया जाता है और न ही इस गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश करने की अनुमति होती है।
2. बालाजी के असली बाल
मंदिर में भगवान बालाजी की मूर्ति के जो बाल हैं, वो बिल्कुल असली हैं। ये बाल कभी भी उलझते नहीं हैं। मान्यतानुसार जब भगवान बालाजी ने धरती पर अवतार लिया था, तब किसी कारणवश उनके सिर के बाल कट गये थे। तब गंधर्वराज की कन्या नीला देवी ने तुरंत अपने सिर के घने बाल काटे और उन्हें भगवान बालाजी से अपने सिर पर धारण करने का अनुरोध किया।
उसकी भक्ति से खुश होकर भगवान बालाजी ने आर्शिवाद दिया और कहा कि कोई भी महिला या पुरुष अगर मंदिर में अपने बाल दान करता है तो उसे भगवान का आर्शिवाद मिलेगा। कहा जाता है कि इसके बाद से ही मंदिर में बाल दान करवाने या मुंडन का प्रचलन चल निकला।

3. गर्भगृह के बीच में नहीं हैं भगवान
तिरुपति बालाजी मंदिर के गर्भगृह में देखने पर लगता है कि भगवान की मूर्ति गर्भगृह के ठीक बीचों-बीच स्थित है। लेकिन वास्तव में यह मूर्ति गर्भगृह के दाएं ओर में स्थापित है। किस तकनीक के कारण आंखों का यह भ्रम होता है, यह आज तक कोई नहीं समझ पाया है।
4. मूर्ति से आती आवाजें
कहा जाता है कि अगर तिरुपति मंदिर में स्थापित भगवान बालाजी की मूर्ति की पीठ पर कान सटा कर सुना जाए तो मूर्ति से समुद्र की लहरों की आवाजें आती है। ऐसा क्यों होता है, किसी को नहीं पता।
5. लगातार जल रहे मिट्टी के दीये
मंदिर के गर्भगृह में भगवान बालाजी की मूर्ति के सामने मिट्टी के दीये जलाये हुए हैं, जो लगातार जलते रहते हैं। रहस्य की बात यह है कि सबसे पहले किसने और कब इन दीयों को जलाया था इस बात की जानकारी किसी के पास नहीं है। सालों-साल ये दीये बस यूं ही लगातार मंदिर के गर्भगृह में जलते आ रहे हैं।
6. भगवान की पीठ हमेशा गीली
भगवान बालाजी की पीठ हमेशा गीली रहती है। भगवान की मूर्ति पर हमेशा पानी की बूंदें मिलती हैं। पत्थर की मूर्ति पर खुद से पानी कैसे आता है, इसकी वजह क्या है किसी को नहीं पता। मंदिर के गर्भगृह में एक पुजारी हमेशा भगवान का पसीना या मूर्ति पर उभरने वाली पानी की बूंदों को पोंछने के लिए नर्म और साफ कपड़े के साथ तैनात रहते हैं।
7. झरने में फेंका जाता है फूल
सुबह के समय जब मंदिर के गर्भगृह की साफ-सफाई होती है तो भगवान बालाजी को चढ़ाये गये फूलों को कभी भी गर्भगृह से बाहर नहीं फेंका जाता है। पुजारी इन फूलों को भगवान बालाजी की मूर्ति के एक तरफ से होकर बहने वाले झरने में डाल देते हैं।
कहा जाता है कि इसके बाद पूरे दिन पुजारी भगवान की पीठ की ओर नहीं देखते हैं। आश्चर्य की बात है कि इस झरने में डाले जाने वाले फूल तिरुपति से लगभग 20 किमी दूर येरपेडु (Yerpedu) नामक एक छोटे से गांव में मिलते हैं।

8. पत्थर से बनी मूर्ति का तापमान
भगवान बालाजी की मूर्ति भले ही पत्थर से तराशी गयी है लेकिन भक्तों का विश्वास है कि यह मूर्ति जीवंत है। कहा जाता है कि मूर्ति का तापमान हर समय 110 डिग्री फारेन्हाइट यानी लगभग 44 डिग्री सेल्सियस बना रहता है। जबकि मंदिर के आसपास का तापमान कई बार उससे काफी कम रहता है और गर्भगृह भी काफी ठंडा रहता है।
हर दिन सुबह में जलाभिषेक के बाद भगवान बालाजी के चेहरे पर पसीने की बूंदे उभरती हैं, जिसे पुजारी रेशम के वस्त्र से पोंछते हैं। कहा जाता है कि गुरुवार की सुबह जब पुजारी पवित्र स्नान के लिए भगवान की मूर्ति से उनके आभूषणों को उतारते हैं, तब वे आभूषण गर्म होते हैं जैसे किसी इंसान ने उन्हें लंबे समय के लिए धारण किया हो।



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