सर्दियां शुरू होते ही दुनिया के अलग-अलग कोने से 100 से भी प्रजाति के पक्षी उड़कर भारत के विभिन्न शहरों और जंगलों में पहुंचते हैं। यहां झीलों व जंगलों में कुछ समय के लिए प्रवासी पक्षी अपना डेरा डालते हैं और सर्दियां खत्म होते ही वापस अपने घर की ओर लौटने लगते हैं। इनमें से कुछ पक्षी सुदूर अमेरिका, साइबेरिया, हिमालयी क्षेत्रों और यूरोप के कई हिस्सों से पहाड़ और समुद्र पार कर भारत आते हैं।
अपने घर से भारत तक पहुंचने के लिए इन पक्षियों को हजारों किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। निर्धारित समय तक भारत में प्रवास करने के बाद गर्मी की शुरुआत के साथ ही ये प्रवासी पक्षी फिर उसी रास्ते से अपने घर लौट जाते हैं, जिनसे ये भारत आते हैं। इन पक्षियों का अपने घर का हजारों किमी लंबा रास्ता याद रखना कभी भी लोगों को आश्चर्य में नहीं डालता है।

बल्कि लोग तो तब आश्चर्यचकित हो जाते हैं जब ये पक्षी अपना रास्ता भटक कर घर वापस नहीं लौट पाते या निर्धारित समय तक अपने घर से भारत का सफर तय नहीं कर पाते हैं। आखिर ये प्रवासी पक्षी हजारों किमी लंबा यह रास्ता याद कैसे रखते हैं? क्योंकि इनके पास न तो कोई गूगल मैप होता है और न ही इन्हें रास्तों या शहरों का नाम पता होता है।
हर साल 11 मई को इन्हीं प्रवासी पक्षियों को समर्पित विश्व प्रवासी पक्षी दिवस (World Migratory Bird Day) मनाया जाता है। इस साल विश्व प्रवासी पक्षी दिवस से पहले चलिए जान लेते हैं कि आखिर प्रवासी पक्षी हजारों किमी लंबा रास्ता बिना भूले या भटके कैसे अपने घर वापस लौटते हैं!

पक्षी क्यों नहीं भटकते कभी अपना रास्ता -
- वैज्ञानिक शोध में पता चला है कि धरती का अपना चुम्बकीय क्षेत्र होता है। पक्षियों के पास इन चुम्बकीय क्षेत्रों को पहचानने की गजब की क्षमता होती है।
- यह चुम्बकीय क्षेत्र पक्षियों को ठीक वैसे ही रास्ता दिखाते हैं जैसे हम इंसान गूगल मैप या कम्पास का इस्तेमाल करते हैं।
- शोध में पता चला है कि पक्षियों की आंखों के रेटीना में ऐसा प्रोटीन (क्रिप्टोकोम्स) पाया जाता है, जो धरती के चुम्बकीय क्षेत्रों के प्रति काफी संवेदनशील होता है। इस प्रोटीन की मदद से पक्षी लंबी दूरी का सफर भी बिना रास्ता भटके तय कर लेते हैं।
- पक्षियों के आंखों में मौजूद यह प्रोटीन उन्हें मौसम के बदलावों के बारे में भी महसूस करवाते हैं। इससे उन्हें पता लगता है कि कब उन्हें अपने घर से प्रवास पर निकलना है, कौन से देश जाना है और वापस घर लौटने का समय कब हो गया है।
- यह प्रोटीन पक्षियों को हर दिशा के बारे में बिल्कुल सटिक जानकारी प्रदान करती है।
- इस प्रोटीन की वजह से ही पक्षी जब आकाश में उड़ते हैं तो संख्या में ज्यादा होने के बावजूद वे एक-दूसरे से टकराते नहीं हैं।

जब सुर्खियों में छाया पक्षियों का रास्ता भटक जाना
पर्यावरणविदों का मानना है कि अपने भोजन, आश्रय और प्रजनन की प्रक्रिया को बनाए रखने के लिए हर साल पक्षी प्रवास पर निकलते हैं। अनेक प्रजाति के पक्षियों का निश्चित समय और मौसम में भारत के निश्चित स्थान पर आगमन निर्धारित रहता है। माना जाता है कि प्रवासी पक्षी की उड़ान औसतन 80 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से होती है। लेकिन कई बार भारतीय शहरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाना इन प्रवासी पक्षियों के रास्ते की बाधा बन जाता है।
ऐसा ही साल 2019 में हुआ था, जब सर्दियों के शुरुआत में दिल्ली में प्रदूषण का स्तर खतरनाक ढंग से बढ़ गया था। उस समय दिल्ली एनसीआर में आने वाले विदेशी पक्षियों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गयी थी। उस साल नवंबर के पहले सप्ताह में दिल्ली का एक्यूआई यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 से अधिक दर्ज किया गया था। 3 नवंबर को एक्यूआई 1200 के पार चला गया था।

इस वजह से दिल्ली की हवा इन विदेशी मेहमानों को रास नहीं आ रही थी। साल 2016 में दिल्ली और एनसीआर की नमभूमि में 27 से अधिक प्रजातियों के विदेशी मेहमान देखे गये थे, जिनकी संख्या 2019 में घट गयी थी।



Click it and Unblock the Notifications














