अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के तुरंत बाद अबू धाबी के पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में हुआ था। फरवरी 2024 में इस मंदिर का उद्घाटन समारोह बड़े ही धूमधाम से आयोजित किया गया था।
उद्घाटन के बाद कुछ दिनों तक मंदिर में सिर्फ उन्हीं श्रद्धालुओं को प्रवेश करने की अनुमति दी जा रही थी, जिन्होंने अपना नाम पहले से ही रजिस्टर्ड करवा रखा था। 1 मार्च से इसे आम लोगों के लिए भी खोल दिया गया। आम लोगों के लिए इसके खुलते ही बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे श्रद्धालुओं ने रिकॉर्ड ही बना डाला।

मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार पिछले 1 महीने के दौरान अबू धाबी में बने पहले हिंदू मंदिर में दर्शन करने के लिए 350000 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। मंदिर के एक प्रवक्ता के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार सर्वाधिक संख्या में श्रद्धालु हर सप्ताहांत (शनिवार और रविवार) को मंदिर में भगवान के दर्शन करने पहुंच रहे हैं।
सप्ताहांत में आने वाले भक्तों की संख्या लगभग 50,000 होती है। गौरतलब है कि एक महीने यानी 1 से 31 मार्च तक मंदिर को सिर्फ 27 दिन ही खोला गया था, क्योंकि हर सोमवार को मंदिर में निजी प्रार्थनाएं आयोजित होती हैं, जिस कारण उसे श्रद्धालुओं के लिए बंद रखा जाता है।

इस मंदिर का निर्माण BAPS स्वामीनारायण संस्था के द्वारा करवाया गया है। हर मंगलवार से रविवार तक मंदिर के स्वामीनारायण घाट पर शाम को 7.30 बजे गंगा आरती आयोजित की जाती है, जिसे भारत से ही गंगा और यमुना का जल ले जाकर बनाया गया है। इस मंदिर को बनाने की लागत लगभग 700 करोड़ रुपए आयी थी।
वहीं 27 एकड़ के क्षेत्र में फैले मंदिर के लिए जमीन अबू धाबी के क्राउन प्रिंस ने दान में दिया था। नागर शैली में बने इस मंदिर के लिए राजस्थान से 18 लाख ईंटें और 1.8 लाख घन मीटर की बलुआ पत्थरों से किया गया है।

प्रवक्ता ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि मंदिर शहरी इलाके से अलग, थोड़ा बाहरी इलाके में और रेगिस्तान के बीच में है। इसलिए श्रद्धालुओं को मंदिर तक लाने- ले जाने के लिए सप्ताहांत में शहर से सार्वजनिक बस सेवा शुरू की गयी है।



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