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जन्मोत्सव पर रामलला को मिला सोने से लिखा गया रामचरित मानस का शानदार उपहार

करीब 500 सालों बाद श्रीराम जन्मभूमि पर रामलला का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। राम मंदिर प्रबंधन की तरफ से इससे जुड़ी सारी तैयारियों को अंजाम दिया जा रहा है। राम नवमी (17 अप्रैल) के दिन रामलला का तिलक सूर्य की किरणों से करने की तैयारियां भी पूरी कर ली गयी हैं।

भक्त भी अपने प्रिय रामलला के दर्शन करने और जन्मोत्सव पर उनके लिए एक से बढ़कर एक उपहार लाने के बारे में सोच रहे हैं। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के पूर्व IAS अधिकारी ने रामलला को जन्मोत्सव पर ताम्र पर सोने से लिखी श्रीरामचरित मानस का नायाब उपहार दिया है। राम मंदिर के गर्भगृह में नवरात्रि के दौरान सोने की परत चढ़ी रामचरित मानस को स्थापित किया गया है।

ram mandir ram lalla

मिली जानकारी के अनुसार इसे मध्य प्रदेश के पूर्व IAS अधिकारी व उनकी पत्नी ने अपने जीवन भर की कमाई को लगाकर तैयार करवाया है।

डेढ़ क्विंटल है वजन

राम मंदिर के गर्भगृह में सोने की परत चढ़ी और स्वर्णाक्षरों से तांबे (ताम्र) पर लिखी रामचरित मानस को स्थापित किया गया है, उसका वजह लगभग डेढ़ क्विंटल (151 किलो) बताया जाता है। इस रामचरित मानस को मध्य प्रदेश के पूर्व IAS अधिकारी लक्ष्मी नायारण और उनकी पत्नी ने राम मंदिर को समर्पित किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार दोनों पति-पत्नी की भगवान श्रीराम में गहरी आस्था है। इसलिए जब अयोध्या में रामजन्मभूमि पर रामलला स्थापित हुए तो उन्होंने उसी समय अपने जीवन भर की कमाई भगवान को समर्पित करने का फैसला लिया है।

4 किलो सोने से लिखा गया रामचरित मानस

राम मंदिर के गर्भगृह में जिस रामचरित मानस को स्थापित किया गया है उसके 500 पन्नों पर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई गयी है। इसे तैयार करने में करीब 4 किलो सोना और 140 किलो तांबा का इस्तेमाल किया गया है। IAS अधिकारी ने इस रामचरित मानस का निर्माण चेन्नई के वुममिडी बंगारू ज्वेलर्स से करवाया है।

इस अद्भूत रामचरित मानस को तैयार करवाने के बाद IAS अधिकारी लक्ष्मीनारायण ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट से संपर्क किया और रामचरित मानस को मंदिर को भेंट करने की इच्छा जाहिर की। ट्रस्ट से स्वीकृति मिलने के बाद चैत्र नवरात्रि के शुरुआत में ही मंदिर के गर्भगृह में इसे स्थापित किया गया।

golden ramcharit manas

क्या है श्रीरामचरित मानस की खासियतें

  • 151 किलो वजन के श्रीरामचरित मानस को लगभग 5 करोड़ रूपए की लागत से तैयार किया गया है।
  • 500 पेजों वाले श्रीरामचरित मानस को तैयार करने में 4 किलो सोना और 140 किलो तांबे का इस्तेमाल किया गया है।
  • पूरी श्रीरामचरित मानस में 10902 छंदों में रामायण लिखी गयी है।
  • नवरात्रि के पहले दिन 25-25 पन्नों के अलग-अलग पैकेट में इस भारी-भरकम रामचरित मानस को राम मंदिर पहुंचाया गया। राम मंदिर में ही इसकी बाइंडिंग की गयी।
  • श्रीरामचरित मानस के हर एक पेज पर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई गयी है।
  • तांबे पर स्वर्णाक्षरों से लिखी गयी श्रीरामचरित मानस को राम मंदिर के भूतल के गर्भगृह में रामलला से महज 15 फीट की दूरी पर पत्थर के एक आसन पर स्थापित किया गया है। राम मंदिर आने वाला हर भक्त इस रामचरित मानस के दर्शन कर सकेगा।

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