देशभर के विभिन्न जगहों समेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में भी रोपवे तैयार करने का काम चल रहा है। यह देश का पहला अर्बन रोपवे होगा, जो शहर के अंदर परिवहन के एक साधन के तौर पर उभरेगा। मिली जानकारी के अनुसार रोपवे बनाने का काम काफी ज्यादा आगे बढ़ चुका है और साल 2024 में ही इसे शुरू कर दिया जाएगा।

काशी रोपवे के शुरू हो जाने से वाराणसी जंक्शन से काशी विश्वनाथ मंदिर तक की दूरी को तय करना और भी आसान हो जाएगा। इससे श्रद्धालुओं को बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने जाने में जहां आसानी होगी वहीं उनका काफी समय भी बचेगा।
मार्च 2023 को प्रधानमंत्री ने इसका शिलान्यास किया था। मिली जानकारी के अनुसार इस रोपवे में कुल 30 खंभे होंगे जिसमें से 10 खंभे सरकारी जमीन पर तैयार किये जा रहे हैं और बाकी के 20 खंभों को निजी जमीनों पर तैयार किया जाएगा। महादेव की नगरी काशी हो और यहां कोई चीज उनसे प्रेरित न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। बताया जाता है कि काशी रोपवे का थीम भगवान शिव के आधार पर ही है।
काशी रोपवे वाराणसी जंक्शन स्टेशन को काशी विश्वनाथ मंदिर गोदौलिया से जोड़ेगी। चुंकि आगे मंदिर होने के कारण गोदौलिया से आगे गाड़ियों को नहीं जाने दिया जाता है, इसलिए मंदिर में दर्शन करने आने वाले भक्तों को यहीं उतर जाना होगा। जंक्शन से लेकर गोदौलिया के बीच में कुल 5 रोपवे स्टेशन बनाए जाएंगे जिसमें से 4 स्टेशनों पर यात्री चढ़ व उतर सकेंगे। पांचवां स्टेशन केवल तकनीकी कारणों से ही बनाया जा रहा है। रोपवे की कुल लंबाई 3.75 किमी होगी।

काशी रोपवे के स्टेशन :
- कैंट रेलवे स्टेशन
- विद्यापीठ
- रथयात्रा
- गोदौलिया
काशी रोपवे की खासियतें :
- इस प्रोजेक्ट में कुल 153 केबल कार होंगी जिसमें से प्रत्येक केबल कार में 10 यात्री सवार हो सकेंगे।
- प्रति घंटा इस रोपवे से कुल 3000 यात्री यात्रा कर सकेंगे लेकिन शुरुआती दिनों में यात्रियों की संख्या को 300 तक ही सीमित रखा जाएगा।
- जंक्शन स्टेशन से गोदौलिया तक रोपवे से पहुंचने में महज 16 मिनट का समय लगेगा।
- रोपवे के बन जाने से इस रास्ते में जाम की समस्या तो घटेगी ही, साथ में यात्रियों का काफी ज्यादा समय भी बचेगा।
- जंक्शन से गोदौलिया के बीच की दूरी को तय करने में अभी करीब 45 मिनट का समय लग जाता है।



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