पिछले कुछ समय से ही बैंगलोर के दूसरे एयरपोर्ट के लिए किसी ऐसे लोकेशन की तलाश की जा रही है, जो न सिर्फ शहर से पास हो बल्कि जहां तक आने-जाने के लिए यात्रा संपर्क भी बेहतर हो। लेकिन ऐसे समय में ही एक बड़ी खबर सामने आयी है। हाल ही में मीडिया रिपोर्ट में राज्य सरकार के अधिकारियों के हवाले से किये गये दावे में कहा गया है कि बैंगलोर में दूसरे एयरपोर्ट के लिए अभी तक जगह तय नहीं हो पायी है।
इसे लेकर अभी तक बहस का सिलसिला जारी है। इसके साथ ही जगह को तय करने की दिशा में आ रही मुख्य परेशानी के बारे में भी बताया गया है।

The New Indian Express की एक रिपोर्ट में कर्नाटक के बुनियादी ढांचा विकास विभाग की सचिव एन मंजुला के हवाले से दावा किया गया है कि बैंगलोर में दूसरे एयरपोर्ट के लिए लोकेशन का निर्धारण में आने वाली सबसे बड़ी समस्या विमानों के संचालन के लिए हवाई स्थान की कमी है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस बारे में आवश्यक कदम उठा रही है ताकी किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकें। पर दूसरे एयरपोर्ट के लिए लोकेशन निर्धारण के रास्ते में ऐसी कौन सी समस्या है, जो सबसे ज्यादा अडंगा डाल रही है?
क्यों विमानों के संचालन के लिए कम पड़ रही है हवाई स्थान?
बकौल एन मंजुला, कर्नाटक सरकार ने पिछले सप्ताह ही बैंगलोर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (BIAL) यानी केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालक, हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड (HAL) और येलाहांका में मौजूद एयर फोर्स स्टेशन से बातचीत की है। पर वास्तविक समस्या कहां आ रही है? इस बारे में पूछने पर मीडिया से बात करते हुए एन मंजुला ने कहा कि बैंगलोर के पूरे आकाश को ये तीनों एयरपोर्ट ही 360 डिग्री घेरे रहती है।
सिर्फ बैंगलोर ही नहीं बल्कि आसपास के इलाकों के आकाश पर भी इन एयरपोर्ट का ही कब्जा है। उन्होंने बताया कि नये एयरपोर्ट के लिए स्थान का निर्धारण सिर्फ तभी हो सकेगा जब मुक्त हवाई स्थान उपलब्ध करवाया जाएगा।
कौन-कितना हवाई स्थान करता है इस्तेमाल?
बताया जाता है कि HAL ने बताया कि वे कोयंबटूर तक अपने शोधकार्यों के लिए हवाई स्थान का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा और भी कई जगहों का इस्तेमाल टेस्टिंग के लिए किया जाता है। वहीं BIAL देवनहल्ली से 30 किमी आगे तक के हवाई स्थान का इस्तेमाल करते हैं। भारतीय वायु सेवा भी हसन तक के एयर स्पेस का इस्तेमाल करती है।
मंजुला ने बताया कि हमने उन सभी से कहा है कि वे हमारे लिए कितना हवाई स्थान उपलब्ध करवा सकते हैं, इस बारे में हमें लिखकर देने का अनुरोध किया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ये लोग हर दिन और 24 घंटे तो विमानों का संचालन नहीं करेंगे। इसलिए ये कौन सा समय प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए उपलब्ध करवा सकेंगे, इस बारे में भी बताने का अनुरोध किया गया है।
मंजुला का कहना है कि यह मामला केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA की मध्यस्थता में ही सुलझ सकता है, जिसके लिए हमें उनके समर्थन की बहुत जरूरत है। हवाई स्थान की उपलब्धता के बारे में जानकारी मिलने के बाद ही दूसरे एयरपोर्ट के लिए जगह का हम निर्धारण कर सकेंगे।
बता दें, हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार बैंगलोर का दूसरा एयरपोर्ट बनाने के लिए नेलमंगला (Nelamangala) से कुनीगल (Kunigal) के बीच की जगह का चुनाव किया गया है। नेशनल हाईवे 75 के ठीक बगल में इस जगह को बैंगलोर का दूसरा एयरपोर्ट बनाने के लिए सबसे अच्छी जगह मानी जा रही है। हारोहल्ली, कनकपुरा रोड और बिदादी आदि जगहें AAI द्वारा दिये गये मानदंडों पर फिट नहीं बैठ रहा था लेकिन नेलमंगला उन मानदंडों पर अच्छी तरह से फिट बैठ रहा है। बताया जाता है कि एक बार लोकेशन फाइनल हो जाने के बाद उसे अंतिम अनुमोदन के लिए AAI को भेजा जाएगा।



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