सड़क मार्ग से कहीं भी आवाजाही करना या किसी भी काम से राजधानी पटना पहुंचने को आसान बनाने के लिए बिहार सरकार ने राज्य भर में एक्सप्रेसवे का नेटवर्क फैलाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में अपने आवास पर एक बैठक की जिसमें उन्होंने राज्य में चल रहे सभी निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे के साथ-साथ प्रस्तावित एक्सप्रेसवे और हाईवे की भी समीक्षा की।
बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि बिहार के किसी भी शहर से राजधानी पटना तक मात्र 4 घंटों में पहुंचा जा सके। इसके लिए बिहार में सड़कों का एक विस्तृत जाल तैयार किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार इस बैठक में मुख्यमंत्री को बिहार में चल रही 4 प्रमुख सड़क परियोजनाओं के बारे में भी बताया गया।

हजारों किमी लंबा बनेगा एक्सप्रेसवे
मिली जानकारी के अनुसार बिहार को आसपास के राज्यों से जोड़ने के लिए 4 प्रमुख एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है, जो बिहार के विभिन्न शहरों से होकर गुजरेंगी। इसका फायदा यह होगा कि बिहार में इन सड़कों के निर्माण से राजधानी पटना तक आवाजाही करना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान बन जाएगा। बताया जाता है कि इन परियोजनाओं के तहत 1,575 किमी लंबे एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जाएगा, जिसकी आनुमानिक लागत लगभग ₹84,734 करोड़ होगी। इन परियोजनाओं के तहत बिहार से होकर 1,063 किमी लंबी सड़क गुजरेगी जिसे बनाने में लगभग ₹59,173 करोड़ की लागत आएगी।
कौन-कौन से होंगे 4 एक्सप्रेसवे?
- गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे।
- रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे।
- पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे।
- आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे।
क्या होंगी इनकी विशेषताएं -
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 600 किमी होगी, जिसमें से बिहार से होकर 415 किमी लंबी सड़क गुजरेगी। यह एक्सप्रेसवे बिहार के 8 जिलों - पश्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से होकर गुजरेगा।

रक्सौल हल्दिया एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 702 किमी होगी जिसमें से 367 किमी लंबा हिस्सा बिहार के पूर्वी चम्पारण, शिवहर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, जमुई और बांका जिले से होकर गुजरेगी। यह एक्सप्रेसवे नेपाल जाने वाले पर्यटकों के साथ-साथ व्यापारिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। हल्दिया बंदरगाह को भारत-नेपाल की अंतर्राष्ट्रीय सीमा रक्सौल (वीरगंज) से यह एक्सप्रेसवे जोड़ेगा।
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे को एक महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे माना जा रहा है। यह सड़क पटना रिंग रोड के दिघवारा ब्रिज से शुरू होकर पूर्णिया तक जाएगी। बताया जाता है कि 250 किमी लंबा यह एक्सप्रेसवे सारण, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा जिला से होकर पूर्णिया तक जाएगा।
आमस को दरभंगा से जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे बोधगया और राजगीर से होकर गुजरेगा। यह एक्सप्रेसवे पर्यटकों के लिए भी काफी सुविधाजनक होगा जो गया, बोधगया और राजगीर में घूमने आना चाहते हैं। यह एक्सप्रेसवे पटना, जहानाबाद, दरभंगा, वैशाली, गया, समस्तीपुर और नालंदा से होकर गुजरेगी।
बताया जाता है कि इन सभी एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण का होना अभी बाकी है। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सख्त हिदायत दी है कि भूमि अधिग्रहण की वजह से किसी भी आम नागरिक को कोई समस्या नहीं हो, इसका खास ख्याल रखा जाए। उम्मीद की जा रही है कि इन सभी एक्सप्रेसवे के बन जाने से न सिर्फ बिहार में एक शहरों से दूसरे शहरों में आना-जाना बल्कि काम के सिलसिले में राजधानी पटना तक का सफर भी काफी आसान बन जाएगा।
केंद्रीय बजट में बिहार को मिला था 3 एक्सप्रेसवे
वहीं दूसरी ओर, इनमें से इस साल के केंद्रीय बजट 2024-25 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे की घोषणा की थी। इसके अलावा 2 और एक्सप्रेसवे की घोषणा केंद्रीय वित्त मंत्री ने की थी - बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे और बोधगया-राजगीर-वैशाली-दरभंगा एक्सप्रेसवे की भी घोषणा की थी। भागलपुर-बक्सर एक्सप्रेसवे बन जाने से भागलपुर से पटना पहुंचने में महज 3 घंटे और बक्सर पहुंचने में मात्र 4 घंटे का समय लगेगा।
यह एक्सप्रेसवे बक्सर, भोजपुर, रोहतास, अरवल, औरंगाबाद और गया समेत 12 जिलों से जुड़ेगा। वहीं बोधगया से वैशाली होते हुए दरभंगा के बेला छपरा तक जाने वाली दूसरी एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मिली जानकारी के अनुसार इस एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए राशि आवंटन के बाद लगभग 2 सालों का समय रखा गया है। संभावना जतायी जा रही है कि अगले 5 सालों में बिहार में सड़क मार्ग से आने-जाने का अनुभव पूरी तरह से बदल जाने वाला है।



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