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चंडीगढ़ में मेट्रो हुई बीते जमाने की बात अब POD टैक्सी चलाने की है योजना, क्या मेट्रो से है बेहतर विकल्प?

मेट्रो नहीं चंडीगढ़ में चलेगी POD टैक्सी। कुछ ऐसा ही संकेत दिया है केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने। चंडीगढ़ के दो दिवसीय दौरे पर गये केंद्रीय मंत्री खट्टर ने केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारियों से बातचीत की। इस दौरान मेट्रो के विस्तार को लेकर जब बात की गयी तो उन्होंने चंडीगढ़ जैसे एक हेरिटेज शहर में मेट्रो चलाने के बारे में विचार-विमर्श भी किया।

मीडिया से बात करते हुए खट्टर ने कहा कि चंडीगढ़ के लोग पिछले लंबे समय से मेट्रो की मांग कर रहे हैं। यहां का एक बड़ा विषय यह भी है कि मेट्रो को अंडरग्राउंड या एलिवेटेड कैसे बनाया जाएगा। इसी समय उन्होंने चंडीगढ़ में भी दूसरे शहरों की तरह POD टैक्सी चलाने के संकेत दिये।

chandigarh pod taxi

मीडिया से बात करते हुए मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि आने वाले 5-10 सालों में चंडीगढ़ को बिजली की जितनी जरूरत है, वो पूरी की जाएगी। बिजली को लेकर चंडीगढ़ में कोई समस्या नहीं है। चंडीगढ़ में मेट्रो एक बड़ा विषय है। यह एक हेरिटेज शहर है। यहां मेट्रो कैसे चलायी जा सकती है? उन्होंने कहा कि इस बारे में गंभीरता से बात की गयी है। मेट्रो के अलावा किसी और तकनीक का इस्तेमाल करने के बारे में भी बात की गयी है, जिससे शहर के फुटपाथ और ग्रीन बेल्ट का उपयोग किया जा सकें।

खट्टर ने आगे कहा कि यहां मेट्रो का किराया इतना ज्यादा नहीं रखा जा सकता है कि लोग मेट्रो का इस्तेमाल ही न कर सकें। चंडीगढ़ के साथ मोहाली, जीरकपुर और पंचकूला जैसे शहर भी क्लस्टर के तौर पर काम करते हैं। ऐसे में सभी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही काम करना होगा। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में POD टैक्सी चलाने का भी सुझाव आया है। यह चंडीगढ़ में एक विकल्प बन सकता है, क्योंकि इससे हेरिटेज स्टेटस को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। इस तकनीक पर आगे काम करन के बारे में विचार किया जा रहा है।

चंडीगढ़ में क्यों POD टैक्सी मेट्रो से बेहतर विकल्प?

देश के कई शहरों में जहां मेट्रो के कई लाइन बनाकर एलीवेटेड या अंडरग्राउंड मेट्रो का संचालन किया जा रहा है, वहीं चंडीगढ़ में मेट्रो से बेहतर विकल्प POD टैक्सी को क्यों माना जा रहा है? इस बारे में स्पष्ट करते हुए केंद्रीय मंत्री खट्टर ने कहा कि POD टैक्सी सड़कों के बीच में नहीं बल्कि खंभों के ऊपर चलती है।

एक बार में 6 से 8 यात्री इसकी सवारी कर सकते हैं। यह डिवाइडर के ऊपर भी चल सकती है या किसी भी ग्रीन बेल्ट के ऊपर से गुजर सकती है। इससे चंडीगढ़ के हेरिटेज स्टेटस को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। इसलिए चंडीगढ़ में मेट्रो से बेहतर विकल्प POD टैक्सी को माना जा रहा है।

अनुमान लगाया जा रहा है कि चंडीगढ़ में मेट्रो की जगह POD टैक्सी एक विकल्प के तौर पर उभर सकता है। इससे प्रदूषण तो कम होगा ही, साथ में आम लोगों के लिए यह एक पॉकेट फ्रेंडली विकल्प बन सकता है।

बता दें, हाल ही में चंडीगढ़ में 2 कोच वाली मेट्रो को ट्राइसिटी (चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला) में चलाने का प्रस्ताव दिया गया था। पहले चरण में ट्राइसिटी के 85.65 किमी का मार्ग प्रस्तावित किया गया था जिसमें चंडीगढ़ के हेरिटेज सेक्टरों में 16.5 किमी का भूमिगत मार्ग भी शामिल है। फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में गुड़गांव में POD टैक्सी लाने की योजना है। इसके अलावा मुंबई में भी POD टैक्सी चलाने पर सोच-विचार किया जा रहा है।

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