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चंडीगढ़ होगा पहला शहर जहां बनेगा 'पेड़ों का नक्शा', क्या होता है Tree Map?

जल्द ही चंडीगढ़ देश का पहला ऐसा शहर बन जाएगा जहां होगा 'पेड़ों का नक्शा' यानी Tree Map। मीडिया रिपोर्ट्स में किये गये दावों को मानें तो आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि भी की जा चुकी है। बताया जाता है कि चंडीगढ़ में Tree Map बनाने के साथ-साथ केंद्रशासित प्रदेश में स्थित सभी पेड़ों की GIS पर आधारित तकनीक का इस्तेमाल कर जियोटैगिंग (Geotagging) भी की जाएगी।

बताया जाता है कि इस बात का निर्णय हाल ही में चंडीगढ़ प्रशासन और वाइल्डलाइफ व वन विभाग की एक बैठक के दौरान लिया गया है।

chandigarh tree map

Indian Express की एक रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया कि Tree Map को बनाने से जुड़ी सभी तैयारियां चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ के इंजीनियरिंग विभाग की तरफ से साथ मिलकर की जाएंगी। दोनों अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में एवीन्यू के आधार पर सभी सेक्टरों में इसका निर्माण करेंगी।

क्या होता है Tree Map?

Tree Map को कुछ खास बिन्दुओं के साथ बनाया जाएगा। यह एक ऐसा नक्शा होगा, जिसमें हर एवीन्यू में मोटे-मोटे तौर पर मुख्य पेड़ों की प्रजातियों को दर्शाया जाएगा। इसके साथ ही उन पेड़ों की आनुमानिक संख्या और दूसरे पेड़ जिन्हें रोपा गया है, उनकी प्रजातियों व उनकी संख्या का भी उल्लेख रहेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ नगर निगम और इंजीनियरिंग विभाग अगली बैठक से पहले Tree Map का ड्राफ्ट जमा करेगी जिसमें उपरोक्त सभी जानकारियां शामिल होंगी ताकि इसे बनाने की अगली प्रक्रिया से पहले उसे विशेषज्ञ कमेटी के सामने प्रस्तुत किया जा सकें। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि यह भी आदेश दिया गया है कि वृक्षों की गणना के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य स्थिति सहित विभिन्न मापदंडों का भी मूल्यांकन नगर निगम द्वारा वन अनुसंधान संस्थान (FRI) के माध्यम से किया जाएगा और इस काम को जल्द से जल्द पूरा किया जाना होगा।

tree map chandigarh

अधिकारियों का कहना है कि इससे केंद्रशासित प्रदेश में पेड़ों की स्थिति का पता लगाने के साथ-साथ उन पेड़ों की प्रजातियों और उनके स्वास्थ्य के बारे में भी जानकारी मिलेगी जो खतरनाक हैं या जिनको प्रतिस्थापन करने की जरूरत है।

बता दें, पिछले कुछ समय केंद्रशासित प्रदेश के कई इलाकों में स्वस्थ पेड़ों के भी गिर जाने का मामला सामने आया है। खासतौर पर जब आँधी या तेज हवाएं चलती हैं, तब। ऐसे एक पेड़ के नीचे दब जाने से निजी स्कूल के एक छात्र की मौत हो गयी और कई घायल हो गये। बताया जाता है कि इन पेड़ों को कोई बीमारी थी और सबसे ज्यादा चिंता का यहीं विषय था कि इसे लेकर कुछ भी नहीं किया जा रहा था।

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चंडीगढ़ में पेड़ों का घनत्व

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चंडीगढ़ का कुल भौगोलिक क्षेत्र 114 वर्ग किमी और 25.98 वर्ग किमी का क्षेत्र पहाड़ी है। इसे पहले ही मृदा संरक्षण कार्य के लिए 'सुखना वाइल्डलाइन सैंचुअरी' घोषित किया जा चुका है। वहीं केंद्रशासित प्रदेश के 47.56 किमी का क्षेत्र जंगल से घिरा हुआ है और बाकी का 10 वर्ग किमी क्षेत्र पेड़ों से ढंका हुआ है। समय-समय पर चंडीगढ़ में हरियाली को बढ़ाने और पेड़ों से इस शहर को सजाने के लिए कई कार्य भी किये जाते रहे हैं।

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