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हिमाचल-उत्तराखंड में बरसी आसमानी आफत : कई की हुई मौत-कई लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बादल फटने से हुई भारी बारिश ने काफी तबाही मचायी है। दोनों राज्यों में हो रही भारी से अतिभारी बारिश और इस वजह अचानक नदियों में आयी बाढ़ व साथ में भू-स्खलन के कारण जान-माल को काफी नुकसान पहुंचा है। राज्य प्रशासन के साथ-साथ NDRF की टीम दोनों राज्यों में ही रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है लेकिन बादल फटने की इस घटना में कई लोगों की जान जाने की खबरें भी सामने आ रही हैं।

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हिमाचल प्रदेश में गयी 5 लोगों की जान

मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार बादल फटने की घटना में हिमाचल प्रदेश में लगभग 5 लोगों की जान चली गयी और करीब 45 लोग लापता हैं। अतिवृष्टि की वजह से कई मकान, पुल और सड़कें पूरी तरह से बह गयी हैं। राज्य के आपात अभियान केंद्र ने बताया कि कुल्लू के निरमंड, सैंज और मलाणा, मंडी पधर और शिमला के रामपुर जिले में बादल फटा था। बताया जाता है कि हिमाचल में 7 घंटे में 305 मिमी से भी ज्यादा बारिश दर्ज की गयी थी। राज्य के कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जिलों के विभिन्न इलाकों में आज (शुक्रवार) भी भारी बारिश होने की संभावना जतायी गयी है।

NDRF, सेना कर रही है बचाव कार्य

मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश में लापता लोगों की तलाश के लिए ड्रोन की मदद ली जा रही है। NDRF और SDRF की टीम ने बचाव कार्यों का मोर्चा संभाला हुआ है। इसके साथ ही सेना भी राहत और बचाव कार्यों में जुट गयी है। मिली जानकारी के अनुसार NDRF की 14 टीमें और सेना के 125 जवान राहत व बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।

इसके साथ ही इंजीनियर टास्क फोर्स के साथ ही 20 सदस्यीय मेडिकल टीम को भी लगाया गया है। बताया जाता है कि बादल फटने की घटना में दो एनएच समेत 445 सड़कें बंद हैं और 7 पुल बह गये हैं। शिमला जिले का रामपुर समेज क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित बताया जाता है।

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अगले 4-5 दिन भारी बारिश का अंदेशा

मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में बुधवार की शाम से ही तेज बारिश हो रही है। अगले 4-5 दिनों तक हिमाचल प्रदेश में बारिश होने का अनुमान लगाया गया है। मिली जानकारी के अनुसार 27 जून को जब हिमाचल प्रदेश में मानसून ने दस्तक दी, उसके बाद से अब तक 65 से ज्यादा लोगों की मौत भारी बारिश व इससे संबंधित अन्य घटनाओं में हो चुकी है। राज्य को करीब 433 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंच चुका है।

उत्तराखंड में हर जगह तबाही के निशान

उत्तराखंड में भी बादल फटने की घटना के बाद केदारनाथ धाम का पैदल पथ पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। राज्य में पिछले 2 दिनों से हो रही बारिश की घटनाओं में लगभग 14 लोगों की मौत और 10 से ज्यादा घायल बताए जाते हैं। बादल फटने के बाद हुई भारी बारिश से मंदाकिनी नदी में आयी अचानक बाढ़ की वजह से केदारनाथ पैदल पथ पर लगभग 30 मीटर सड़क नदी में समा गयी।

पहाड़ों से पानी के तेज बहाव के साथ बड़े-बड़े पत्थर लुढकर नीचे सड़कों पर आ गये, जिससे रास्तों को बहुत नुकसान पहुंचा है। भारी बारिश शुरू होने के बाद केदारनाथ यात्रा को रोक दिया गया है और रुद्रप्रयाग पुलिस की तरफ से सभी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ही बने रहने और अपनी केदारनाथ यात्रा को अभी स्थगित कर देने की सलाह दी गयी है।

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हजारों श्रद्धालुओं को किया गया रेस्क्यू

अचानक शुरू हुई भारी बारिश की वजह से केदारनाथ धाम की यात्रा पर गये बड़ी संख्या में श्रद्धालु रास्ते में जहां-तहां फंस गये हैं। NDRF और SDRF की टीम बचाव अभियान चला रही है। यह बचाव अभियान रात के समय भी जारी रहा था। अभी तक पैदल और हेलीकॉप्टर से 4000 से ज्यादा श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। बचाव अभियान में वायु सेना के हेलिकॉप्टर की मदद भी ली जा रही है।

किसे कहते हैं बादल का फटना?

बहुत कम समय में जब सीमित दायरे में अचानक भारी बारिश होने लगे तो उसे बादल का फटना कहा जाता है। अगर किसी इलाके में 20-30 वर्ग किमी के दायरे में 1 घंटे में 100 मिली या उससे ज्यादा बारिश होती है, तो उसे बादल का फटना कहा जाता है। जब तापमान बढ़ने से ज्यादा मात्रा में नमी वाले बादल इकट्ठा होते हैं और पानी की बूंदें आपस में मिल जाती हैं, तब इन बूंदों का भार इतना ज्यादा हो जाता है कि बादलों का घनत्व भी बढ़ जाता है और सीमित दायरे में अचानक तेज बारिश होने लगती है।

देश भर में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड ऐसे दो राज्य हैं, जिन्हें बादल फटने की घटनाओं में सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है। यूं तो पहाड़ों राज्यों में बादल फटने की घटनाएं आम हैं लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो जलवायु परिवर्तन के कारण पिछले कुछ सालों में बादल फटने की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है।

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