जिस गधे को हम महज़ माल ढोने के लिए इस्तेमाल करते हैं और किसी काम कर नहीं होने पर इंसान को गधा बोलने में कतई देर नहीं करते, वही गधा आने वाले समय में पूरे भारत में एक महत्वपूर्ण जानवर बनने जा रहा है। जी हां यूरोप, अमेरिका के बाद अब भारत में भी गधी का दूध बिकेगा। ध्यान रहे, यह मज़ाक नहीं, इस संबंध में भारत सरकार ने अपनी तैयारियां तेज़ कर दी हैं। और होभी क्यों न, वैज्ञानिकों के अनुसार गधी का दूध किसी औरत के दूध जितना पौष्टिक जो होता है।

बात अगर पश्चिमी देशों की करें तो विभिन्न यूरोपीय देशों में गधी का दूध काफी लोकप्रिय है, क्योंकि माना जाता है कि इसमें मां के दूध जितना ही पौष्टिक तत्व पाया जाता है। इसी वजह से पश्चिमी देशों में Donkey Dairy तेजी से फलफुल रहा है। गधी का दूध न सिर्फ पौष्टिक होता है बल्कि लोगों के लिए इसे पचाना भी काफी आसान होता है। विभिन्न पश्चिमी देशों में बच्चों को मां के दूध के साथ-साथ और कई बार मां के दूध के बदले में गधी का दूध भी दिया जा रहा है।
गधी के दूध का इतिहास
पिछले कई हजारों सालों से गधी, जिन्हें जेनी (jenny) भी कहा जाता है, का दूध काफी पौष्टिक माना जाता रहा है। गधी के दूध में औषधीय गुण मौजूद होते हैं, इस बात को सबसे पहले हिप्पोक्रेट्स (460-370 BC) ने लिखा था। 19वीं सदी में फ्रेंच डॉक्टर पैरोट ने अनाथ बच्चों को सीधे गधी का दूध पिलाया था, क्योंकि इसे मां के दूध के बराबर ही पौष्टिक माना जाता है। 20वीं सदी के अंत से फ्रांस के बाजारों में गधी का दूध अनाथ और कमजोर बच्चों को पिलाने के साथ-साथ वयस्कों के लिए भी बेचा जाने लगा। गधे या गधी घरेलु जानवर घोड़ों के परिवार से ही होते हैं।

कौन-कौन से पौष्टिक तत्व होते हैं गधी के दूध में?
गधी के दूध में कई तरह के पौष्टिक तत्व होने की पुष्टि की गयी है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन, खनीज तत्व जैसे कैल्शियम, फॉस्फोरस और विटामिन D पाया जाता है। गाय के दूध की तुलना में गधी के दूध में वसा की मात्रा भी कम होती है। इसे गाय के दूध के मुकाबले पचाना ज्यादा आसान है। जो लोग lactose intolerant होते हैं, उनके लिए गधी का दूध एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
कितनी देर तक खराब नहीं होता है गधी का दूध?
हिसार में मौजूद द नेशनल रिसर्च सेंटर में गधी के दूध पर शोध किया जा रहा है। अभी तक इसे भारत में खाद्य पदार्थों की सूची में नहीं डाला गया है। लेकिन गधी का दूध कई देशों में मां के दूध के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। बताया जाता है कि गधी का दूध जल्दी खराब भी नहीं होता है। अगर 4 डिग्री सेल्सियस पर गधी के कच्चे दूध को रखा जाए तो यह 4 दिनों तक और 37 डिग्री सेल्सियस पर रखने पर 10 घंटे तक बिना खराब हुए रह सकता है।

कौन-कौन से देशों में पिया जाता है गधी का दूध?
- उत्तर अमेरिका में अमेरिका और कनाडा
- यूरोप में फ्रांस, जर्मनी, इंग्लैंड, इटली, नीदरलैंड, स्पेन और रुस
- एशिया में जापान, चीन, भारत, मलेशिया, इंडोनेशिया और दक्षिण कोरिया
- लैटिन अमेरिका में ब्राजिल, मैक्सिको और अर्जेटिना
- Middle East और अफ्रिका में सउदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल और दक्षिण अफ्रिका
भारत में बढ़ रही है मांग और जल्द बिकेगा बाजारों में
भारत सरकार की फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (FSSAI) की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में भी विभिन्न राज्यों में गधी के दूध की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है। गधी का दूध पीने के लिए सुरक्षित और इसमें कोई भी नुकसानदायक तत्व मौजूद नहीं होता है। एफएसएसएआई के अनुसार लोगों में गधे का नाम सुनते ही नाक-भौं सिकोड़ने की आदत है, जिसके कारण इसके दूध उत्पादन की दिशा में लोग आने में झिझकते हैं। और यही कारण है कि इसका व्यावसायीकरण नहीं हो पा रहा है।

गधी का दूध बिक सके बाजारों में इसके लिए केंद्र सरकार ने उठाया कदम
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मंत्री परषोत्तम भाई रूपाला ने शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में दिये अपने एक बयान के दौरान कहा कि जल्द ही भारत के बाजारों में भी गधी का दूध बिकना शुरू होगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्रालय नेशनल लाइवस्टॉक मिशन (NLM) योजना को लागू करने वाली है, जिसमें प्रति जानवर उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की ओर ध्यान दिया जाएगा। जिन जानवरों द्वारा उत्पादन बढ़ाने पर NLM योजना में ध्यान दिया जाएगा उनमें भेड़, बकरी के दूध के साथ-साथ गधी का दूध भी शामिल है।
हिसार में गधा पालन की ट्रेनिंग
केंद्रीय मंत्री के अनुसार पशुपालन को बढ़ावा देने में तमाम सारे जानवरों की सूची बनी हुई है। गधे व गधी को इस सूच में शामिल करने के लिए 21 फरवरी 2024 को नियमावली में संशोधन किया गया था। नई नियमावली के अंतर्गत गधी की नस्लों को अपग्रेड करने का काम भी किया जा रहा है। उन्होंने आगे बताया कि हिसार में गधा पालन की विशेष ट्रेनिंग का काम हरियाणा के हिसार में शुरू किया गया है। कृषि-अनुसंधान- राष्ट्रीय शोध केंद्र द्वारा यह ट्रेनिंग उन उद्यमियों को दी जा रही है जो गधा पालन के व्यवसाय में आगे आना चाहते हैं।



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