फरवरी 2019 में दिल्ली और वाराणसी के बीच सबसे पहले शुरू हुई थी देश की पहली सेमी हाई स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस। विमान जैसी सुविधाओं, तेज रफ्तार और अपनी शानदार डिजाइन की वजह से वंदे भारत एक्सप्रेस ने जल्द ही देशभर में अपनी लोकप्रियता को कई गुना बढ़ा दिया। लेकिन इस ट्रेन का किराया हमेशा से ही चर्चा का विषय रहा है। कहा जाता है कि वंदे भारत एक्सप्रेस अपने किराए की वजह से ही आज भी समाज के निम्न-मध्यम वर्ग के लोगों की पहुंच से बाहर बना हुआ है।
लेकिन पिछले कुछ समय से कई मीडिया रिपोर्ट्स में वंदे भारत एक्सप्रेस का किराया घटाने से जुड़ी कई खबरें सुर्खियां बनी हुई है। पिछले दिनों कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन ने लोकसभा सत्र के दौरान रेल मंत्री से भी वंदे भारत एक्सप्रेस के किराए को घटाने की योजनाओं के संबंध में सवाल पूछा था, जिसके बाद एक बार फिर से वंदे भारत एक्सप्रेस का किराया चर्चा का विषय बन गया है।

क्या सच में भारतीय रेल वंदे भारत एक्सप्रेस का किराया घटाने के बारे में विचार कर रही है? क्या ऐसा करना वित्तीय रूप से संभव है?
100 प्रतिशत से ज्यादा है Occupancy
वंदे भारत एक्सप्रेस मूल रूप से लंबी दूरियों को कम समय में तय करने के लिए अधिक लोकप्रिय है। वर्तमान में देश भर के अलग-अलग शहरों को जोड़ने वाले कुल 136 वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन किया जा रहा है। किसी भी सामान्य एक्सप्रेस या मेल ट्रेनों के माध्यम से जिन दूरियों को तय करने में 12 या 15 घंटे का समय लगता है, वंदे भारत एक्सप्रेस के जरिए उसी दूरी को तय करने में 8 से 10 घंटे का ही समय लगता है।
कई बार मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि वंदे भारत एक्सप्रेस की सीटें खाली रहती हैं। लेकिन लोकसभा में दिये अपने एक बयान में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह स्पष्ट किया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 31 मार्च 2025 तक 136 वंदे भारत एक्सप्रेस, जिसमें चेयरकार कोच होते हैं, उनकी सीटें कभी खाली नहीं रही है। उन्होंने कहा कि सभी वंदे भारत एक्सप्रेस की Occupancy शत-प्रतिशत से भी ज्यादा रहा है।
तत्काल में टिकट के बजाए वंदे भारत
कई बार लोगों ने दावा किया है कि किसी रूट की वंदे भारत एक्सप्रेस के खुलने से 1 या 2 दिन पहले जांच करने पर उसमें उन्हें काफी सीटें खाली दिखती है। इस वजह से कई बार लोगों ने वंदे भारत की लोकप्रियता पर भी सवाल उठाया है। लेकिन लोकसभा में दिये गये रेल मंत्री के बयान से यह स्पष्ट हो चुका है कि वंदे भारत एक्सप्रेस के खुलने से 1 दिन पहले तक अगर आपको वंदे भारत एक्सप्रेस की सीटें खाली दिखती भी हैं, लेकिन जब यह ट्रेन खुलती है तो इसकी सभी सीटें भर चुकी होती है।

दरअसल, जिन रूट्स पर वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन होता है, उन रूट्स पर तत्काल टिकट लेने के बजाए कई बार यात्री वंदे भारत एक्सप्रेस का टिकट खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं। इसकी एक बड़ी वजह वंदे भारत एक्सप्रेस का कम समय में लंबी दूरी को तय करना तो है ही, साथ ही तत्काल टिकट के किराए में लग्जरी ट्रेन की सवारी भी है।
क्या वित्तीय रूप से वंदे भारत एक्सप्रेस का किराया घटाना संभव है?
वंदे भारत एक्सप्रेस में चेयर कार का किराया प्रति व्यक्ति करीब ₹1200-₹1600 के बीच और एग्जिक्यूटिव कार का किराया लगभग ₹2400-₹2800 के बीच होता है। किसी एक रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस को एक राउंड ट्रिप में लगभग 1000-1500 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है जिसकी लागत प्रतिदिन ₹5-₹8 लाख होता है। ऐसी स्थिति में क्या वंदे भारत एक्सप्रेस का किराया घटा पाना संभव होगा?
वंदे भारत एक्सप्रेस के एक राउंड ट्रिप का एक दिन का खर्च -
- ऊर्जा : ₹2-₹3 लाख
- रख-रखाव : ₹1-₹1.5 लाख
- क्रु और कर्मी : ₹0.5-₹1 लाख
- केटरिंग व सेवाएं : ₹0.5-₹1 लाख
- साफ-सफाई : ₹0.01-₹0.02 लाख
- अन्य (इंश्योरेंस, एक्सेस आदि) : ₹0.5-₹1 लाख
कुल खर्च (प्रति दिन) : ₹5-₹8 लाख

शेयर मार्केट में लगा रुपया डूबने की आशंका
जानकारी के मुताबिक वंदे भारत एक्सप्रेस परियोजना में भारतीय रेल ने इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्प लिमिटेड (IRFC) और रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के जरिए मार्केट से काफी रुपया लेकर लगाया है। मार्केट से लिये गये इस रुपए को चुकाने का एक बड़ा जरिया ट्रेन से मिलने वाला यात्री किराया भी होता है। अगर वंदे भारत का किराया घटाया जाता है तो ऐसे में मार्केट से लिया गया यह रुपया चुकाना भारतीय रेलवे के लिए टेढ़ी खीर बन जाएगी।
साल 2019 के शुरुआत में जब वंदे भारत एक्सप्रेस को शुरू किया गया था, उस समय भारतीय रेल की विभिन्न शाखाओं के शेयर में काफी उछाल आया था। इस वजह से बड़ी संख्या में लोगों ने वंदे भारत एक्सप्रेस पर भरोसा जताते हुए शेयर मार्केट में अपना रुपया लगाया था। लेकिन इस वक्त शेयर मार्केट में मंदी छाई हुई है। अगर किराए में कमी की जाती है और यह फैसला सही साबित नहीं होता है तो इससे होने वाले नुकसान से आम आदमी का उभर पाना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा।
पिछले नौ महीनों में IRFC का शेयर मूल्य ₹217 से गिरकर ₹133 पर आ गया है। निवेशक IRFC में पैसा लगाने से कतराने लगे हैं। इसलिए, अगर किराया कम किया जाता है, तो इससे भारतीय रेलवे की वित्तीय बैलेंस शीट और भी अस्थिर हो सकती है।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि भारतीय रेल अगर यात्रियों की सुविधा, मध्यम-निम्न वर्ग तक वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी सेमी हाई स्पीड और लग्जरी ट्रेनों की पहुंच को बढ़ाने के उद्देश्य से किराया को घटाने के बारे में सोच भी रही हो। तब भी, आसपास की परिस्थिति ऐसी बनी हुई है कि भारतीय रेलवे चाह कर भी वंदे भारत एक्सप्रेस का किराया नहीं घटा सकती है। हालांकि किराया के घटाने या नहीं घटाने के संबंध में अभी तक रेल मंत्री या भारतीय रेल की ओर से कोई भी जानकारी नहीं दी गयी है।



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