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गुजरात के इस गांव में मनी होली और दीवाली जब अंतरिक्ष से सुरक्षित लौटी सुनीता विलियम्स, जानिए क्या है रिश्ता!

लगभग 9 महीने का समय अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station) में फंसी रहने के बाद नासा (NASA) की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अपने साथी बुच विल्मोर, निक हेग और रूसी कॉस्मोनॉट अलेक्जेंडर गोर्बुनोव के साथ सकुशल धरती पर वापस लौट आयी हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, सुनिता विलियम्स के सकुशल वापसी को लेकर गुजरात के मेहसाणा का एक गांव न सिर्फ सारी रात जागकर प्रार्थना करता रहा बल्कि...

जैसे ही सुनीता का यान फ्लोरिडा के समुद्र में उतरा, गुजरात के इस गांव में बच्चे से लेकर बुढ़ा तक हर कोई खुशी से झूम उठा। गांव भर में होली के साथ दीवाली भी मनायी गयी। गुजरात के एक छोटे से गांव से सुनीता विलियम्स का भला क्या रिश्ता है?

Sunita williams returned to earth

मात्र 8 दिनों के सफर पर अंतरिक्ष स्टेशन में गयी सुनिता विलियम्स और बुच विल्मोर को उनके यान में तकनीकी गड़बड़ी आने की वजह से वहां लंबा समय गुजारना पड़ गया। सुनीता विलियम्स ने 5 जून 2024 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए उड़ान भरी थी। 18 मार्च (भारतीय समयानुसार) की देर रात को लगभग 17 घंटों का सफर सफलतापूर्वक पूरा करके सुनीता विलियम्स कुशलतापूर्वक धरती पर वापस लौट आयी हैं।

फ्लोरिडा के समुद्र में जैसे ही सुनीता विलियम्स का ड्रैगन यान उतरा, यान के चारों तरफ डॉल्फिन चक्कर लगाने लगी। ऐसा लग रहा था, मानो 9 महीने बाद धरती पर वापस लौटी सुनीता का स्वागत कर रही हो।

nasa sunita williams

सुनीता विलियम्स का गुजरात से रिश्ता

हम सभी को पता है कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनिता विलियम्स भारतीय मूल की हैं। सुनीता विलियम्स का पैतृक गांव गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव है, जो कडी तहसील में आता है। यहां सुनीता विलियम्स का तो नहीं लेकिन उनके पिता दीपक पंड्या का बचपन झूलासन में ही बीता था।

वह इस गांव की गलियों में खेलते-कूदते और यहां के स्कूल में पढ़कर ही बड़े हुए थे। बाद में जब वह न्यूरोलॉजिस्ट बनने के लिए वह अमेरिका चले गये। आज भी दीपक पांड्या और सुनीता विलियम्स का घर इस गांव में मौजूद है, जहां ताला लगा रहता है। सुनीता विलियम्स के परिवार और संबंध में लगने वाले भाई इस गांव में अभी भी रहते हैं।

जलायी गयी थी अखंड ज्योति

सुनीता विलियम्स ने जिस दिन अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के लिए उड़ान भरी थी, उस दिन गांव में अखंड ज्योति जलायी गयी थी। गांव के हाई स्कूल से इस अखंड ज्योति को 9 महीने पहले मंदिर ले जाया गया था, जिसे विलियम्स की सुरक्षित वापसी के बाद अब फिर से स्कूल में लाया जाएगा। जैसे ही फ्लोरिडा के समुद्र में सुनीता विलियम्स की अपने अंतरिक्ष साथियों के साथ लैंडिंग की खबर फैली पूरे गांव में जश्न का माहौल बन गया।

गांव के बच्चे से लेकर बुढ़े तक हर कोई नाचने-गाने और झूमने लगा। सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में बताया जाता है गांव के प्राथमिक स्कूल से सुनीता विलियम्स की फोटो के साथ बड़ा जुलूस निकाला जाएगा। मंगलवार की देर रात एक ओर जहां पटाखों की आवाजों से झूलासन गांव गुंज उठा वहीं दूसरी ओर होली के बाद गांव के बच्चों, महिलाओं और बुजूर्गों के साथ नवजवानों ने फिर से गुलाल उड़ाए और होली मना ली।

gujarat sunita williams village

बताया जाता है कि सुनीता विलियम्स 3 बार गुजरात के मेहसाणा जिले में मौजूद अपने पैतृक गांव का दौरा कर चुकी हैं। सबसे पहले वह 1972 में झूलासन आयी थी। इसके बाद 2007 और 2013 में भी वह झूलासन आ चुकी हैं। हर बार अपने अंतरिक्ष मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद वह झूलासन आती रही हैं। इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भारत आने का न्यौता दिया है। इससे झूलासन वासियों में एक बार फिर उनके अपने पैतृक गांव में आने की उम्मीद जागी है।

बता दें, पीएम मोदी का पैतृक गांव व उनका जन्म स्थान वडनगर भी मेहसाणा जिले में ही आता है।

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