बाबा बर्फानी की कठिन तीर्थयात्रा अमरनाथ यात्रा 29 जून से शुरू होने वाली है और 19 अगस्त तक चलेगी। यात्रा के लिए ऑफ़लाइन पंजीकरण भी शुरू हो गया है। केदारनाथ यात्रा की तरह ही अमरनाथ यात्रा को भी एक चुनौतीपूर्ण यात्रा माना जाता है। अमरनाथ गुफा जम्मू और कश्मीर के गंदेरबल जिले में 3880 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जो श्रीनगर से लगभग 140 किमी, पहलगाम से 45-48 किमी और बालटाल से 16 किमी दूर है।
पहलगाम मार्ग को पूरा करने में 3 दिन लगते हैं। इस दौरान तीर्थ यात्रियों को लगभग 45 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इस मार्ग पर कोई खड़ी चढ़ाई नहीं है और इसमें कम कठिनाई वाली चढ़नी करनी पड़ती है। तीर्थयात्री चंदनवाड़ी (16 किमी), शेषनाग (12 किमी) पर रुकते हैं और अंत में गुफा (20 किमी) तक पहुंचते हैं।

वहीं अमरनाथ यात्रा का दूसरा बालटाल मार्ग तुलनात्मक रूप से छोटा है, लेकिन इसमें 14 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई शामिल है और यह अधिक चुनौतीपूर्ण है। यह मार्ग बुजुर्ग तीर्थयात्रियों के लिए आदर्श नहीं माना जाता है। खासकर बरसात के मौसम के दौरान जब परिस्थितियां और भी कठिन हो जाती हैं।
कई बार बर्फबारी भी यात्रियों के लिए चुनौती बन जाती है। अमरनाथ यात्रापथ के कुछ इलाकों में तो इस साल 10 फीट तक बर्फबारी हुई। दोनों मार्गों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं उपलब्ध हैं लेकिन वे केवल पंजतरणी तक ही यात्रियों को ले जाते हैं। वहां से, तीर्थयात्रियों को गुफा तक पहुंचने के लिए लगभग 6 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है। यात्रा में सहायता के लिए कुली/पालकी भी रखे जा सकते हैं।

वहीं बात अगर केदारनाथ की हो तो केदारनाथ धाम समुद्र तल से 3,584 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। केदारनाथ धाम की चढ़ाई अमरनाथ के मुकाबले काफी आसान है लेकिन बारिश और बर्फबारी जैसी परेशानियां यहां भी हैं। अमरनाथ यात्रा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर उसी दिन फिर नीचे उतरना शुरू करना पड़ता है क्योंकि गुफा के पास रुकने की कोई जगह नहीं है। लेकिन केदारनाथ धाम में मंदिर के पास कई होटल हैं, जहां लोग रात को रुकते हैं।
केदारनाथ के मुकाबले अमरनाथ के आसपास के पहाड़ों पर बर्फ अधिक होती है, जिससे यात्रा अधिक ठंडी और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। केदारनाथ ट्रैक 16 किलोमीटर लंबा है और अमरनाथ की तुलना में इसमें कम खड़ी चढ़ाई है। इसके अलावा, इसका पूरा ट्रैक अच्छी तरह से बनाया गया है, जबकि अमरनाथ का बालटाल मार्ग काफी खतरनाक है। केदारनाथ धाम में भी हेलीकॉप्टर की सुविधा उपलब्ध है जो मंदिर के बिल्कुल सामने तक पहुंचाती है।



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