हावड़ा स्टेशन को देश का सबसे बड़ा स्टेशन कहा जाता है। इस स्टेशन को 'गेटवे ऑफ ईस्ट' भी कहा जाता है। 23 प्लेटफार्म, मेल-एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनों के मिलाकर हर दिन 600 से ज्यादा ट्रेनें और उन ट्रेनों से होकर अपने-अपने गंतव्यों के लिए यात्रा करते लाखों यात्री। हावड़ा स्टेशन की हर दिन की यहीं तस्वीर सामने आती है। इस स्टेशन की इमारत ही सैंकड़ों साल पुरानी बतायी जाती है।
लेकिन अब स्टेशन पर यात्री सुविधाओं की ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस वजह से लगभग 100 साल पुराने दो ब्रिज को तोड़ने का फैसला लिया गया है। हावड़ा स्टेशन के ओल्ड व न्यू कॉम्प्लेक्स में प्लेटफार्म की संख्या तो ज्यादा है लेकिन रेलवे ट्रैक कम होने की वजह से स्टेशन तक ट्रेन के आने या जाने में समस्या होती है। इस वजह से कहा जाता है कि टाइम टेबल के आधार पर ट्रेनों का संचालन करना मुश्किल हो जाता है। पूर्व रेलवे इस समस्या का स्थायी रूप से समाधान करना चाहती है।

कौन से 2 ब्रिज तोड़े जाने का लिया गया फैसला?
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार हावड़ा के जिन दो ब्रिज को तोड़ने का फैसला लिया गया है, उनमें शामिल है -
1. हावड़ा सालकिया में मौजूद बनारस ब्रिज
2. हावड़ा मैदान के पास मौजूद चांदमारी ब्रिज
इनमें से बनारस ब्रिज करीब 120 साल पुराना और चांदमारी ब्रिज 91 साल पुरानी बतायी जाती है। दावा किया जा रहा है कि इन दोनों ब्रिज को तोड़कर नए निर्माण कार्य की वजह से ट्रेनों की गति थोड़ी बढ़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही हावड़ा में ट्रेनों का संचालन भी टाईम टेबल के आधार पर किया जा सकेगा।
कैसे मिलेगा फायदा?
आप जरूर सोच रहे होंगे कि अगर सालकिया के 120 साल पुराने बनारस ब्रिज और हावड़ा मैदान 90-91 साल पुराना चांदमारी ब्रिज को तोड़ दिया जाए, तो उससे ट्रेन की गति कैसे बढ़ेगी? दरअसल, बनारस ब्रिज के नीचे 36 मीटर और चांदमारी ब्रिज के नीचे 60 मीटर की जगह है। पहले जब मेल-एक्सप्रेस या लोकल ट्रेन की संख्या कम हुआ करती थी, तब यह जगह और यहां बिछाए गये रेलवे ट्रैक की संख्या पर्याप्त थी लेकिन समय के साथ-साथ जनसंख्या में वृद्धि हुई और हावड़ा स्टेशन से खुलने वाली मेल-एक्सप्रेस व लोकल ट्रेनों की संख्या में वृद्धि हुई।

अब नए ट्रैक बिछाने की जरूरत तो है, लेकिन जगह नहीं है। इसके साथ ही सिग्नल की समस्या भी होती है, जिस कारण ट्रेनों की गति को धीमी कर देनी पड़ती है। अब दोनों ब्रिज को तोड़कर बनारस ब्रिज के नीचे की जगह को 66 मीटर और चांदमारी ब्रिज के नीचे की जगह को बढ़ाकर 134 मीटर किया जाएगा। इसके साथ ही हावड़ा रेल यार्ड में एक 4 मंजिली इमारत का निर्माण किया जाएगा, जहां से इंटरलॉकिंग सिग्नल सिस्टम नियंत्रित किया जाएगा।
क्या कहना है रेलवे का?
इस बारे में पूर्व रेलवे के जीएम मिलिंद के देवस्कर का कहना है कि चांदमारी और बनारस ब्रिज के ठीक बगल में चौड़ा केबल ब्रिज बनाने का काम चल रहा है और इन दोनों ब्रिज को तोड़ दिया जाएगा। इन्हें तोड़ने से काफी जगह मिल जाएगी। इससे हावड़ा में कम से कम 7 प्लेटफार्म को भी चौड़ा किया जा सकेगा। नतीजन ट्रेनों का संचालन पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसानी से हो सकेगा।
बताया जाता है कि हावड़ा स्टेशन के पास मौजूद डीआरएम बिल्डिंग को रेल म्यूजियम के पास स्थानांतरित किया जा रहा है। लेकिन हावड़ा स्टेशन की इमारत एक ऐतिहासिक इमारत होने की वजह से इसके बाहरी हिस्से में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। यात्रियों की सुविधा के लिए सिर्फ स्टेशन परिसर के अंदर ही परिवर्तन लाया जाएगा।



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