पिछले एक साल से तेलंगाना के कोकापेट में लगभग 57 मंजिला इमारत के निर्माण का काम चल रहा था, जिसके बारे में दावा किया जा रहा था कि यह दक्षिण भारत की सबसे ऊंची इमारत है। उसके बाद पुप्पलगुडा में 59 मंजिला इमारत का निर्माण शुरू हुआ जो उससे भी अधिक ऊंची है। लेकिन अब उससे भी अधिक ऊंची इमारत बनाने की अनुमति हैदराबाद में दे दी गयी है।
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार हैदराबाद के कुछ इलाके ऐसे हैं, जहां ऊंची-ऊंची इमारतें मौजूद हैं और यहां नई इमारतें बनाने की अनुमति दी जाती है। बताया जाता है कि प्रबंधन ने शहर के इन ऊंची इमारतों के निर्माण से पहले ट्रैफिक को लेकर विस्तृत अध्ययन करती है, जिसके बाद ही इमारतों के निर्माण की अनुमति दी जाती है।

अब तक हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HMDA) ने 10 ऐसी इमारतें, जिनकी ऊंचाई 50 से 59 मंजिला है, के निर्माण की अनुमति हैदराबाद के आईटी कॉरिडोर, गोल्डेन मील और कोकापेट के नियोपॉलिस लेआउट पर दी थी। हाल ही में हैदराबाद में जिस 70 मंजिला इमारत के निर्माण की अनुमति दी गयी है, वह उस्मान नगर इलाके में बनायी जाएगी।
इस इमारत के पास कथित तौर पर अब दक्षिण भारत की सबसे ऊंची इमारत होने का खिताब होगा। इससे पहले 63 मंजिला ऊंची इमारत का निर्माण कोकापेट और 61 मंजिला इमारत का निर्माण नानाक्रमगुडा में किया जा रहा है।
हैदराबाद के जिन इलाकों में ऊंची-ऊंची ऐसी गगनचुंबी इमारतें बनाने की अनुमति दी जाती हैं उनमें शामिल है -
- गचीबोली
- हाईटेक सिटी
- रायदुर्ग
- कोंदपुर
- मणिकोंदा
- कुकटपल्ली
- नियोपॉलिस
- कोकापेट
- गंडीपेट

Hyderabad Mail की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार हैदराबाद में अगले 3-4 सालों के अंदर इस गगनचुंबी इमारत का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इस इमारत को अनुमति मिलने के साथ ही कहा जा रहा है कि हैदराबाद में आसमान की ऊंचाई दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। कोकापेट में 61 और 62 मंजिला दो इमारतें अभी निर्माणाधीन हैं। साथ ही नानाक्रमगुडा में भी 61 मंजिला इमारत का निर्माण कार्य अभी भी जारी है।
हैदराबाद की 5 सबसे ऊंची इमारतें -
- कैनड्योर स्काईलाइन - पुप्पलगुडा (59 मंजिला)
- एसएएस क्राऊन - कोकापेट (57 मंजिला)
- द ट्राईलाइट (टावर 1) - कोकापेट (57 मंजिला)
- श्रीयस डायमंड टावर्स - पुप्पलगुडा (55 मंजिला)
- पौलमी पलाज्जो - गोल्डेन माइल - (54 मंजिला)
मीडिया रिपोर्ट में बताया जाता है कि इस तरह की गगनचुंबी इमारतों के निर्माण की अनुमति देने से पहले ट्रैफिक को लेकर अध्ययन किया जाता है, जिसके बाद ही अनुमति को लेकर फैसला लिया जाता है।
मीडिया रिपोर्ट की मानें भविष्य में ऐसी और भी ऊंची इमारतों का निर्माण हैदराबाद में किया जाएगा, जिससे इस शहर की रूप-रेखा बहुत जल्द पूरी तरह से बदल जाएगी। Deccan Chronicle की मीडिया रिपोर्ट की मानें तो साल 2026-29 के बीच इन इमारतों का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।



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