हैदराबाद का मुंशी नान बेकरी, जिसकी स्थापना आजादी से भी कई दशकों पहले की गयी थी। मुंशी नान बेकरी का गर्मागर्म चार कोना नान, जिसके साथ निहारी या सूप...यह स्वाद ऐसा है जिसे आसानी से भूल पाना संभव नहीं होता है। पिछले लगभग 174 सालों से मुंशी नान बेकरी हैदराबाद के ओल्ड सिटी इलाके में लोगों को कुछ इस अंदाज में ही खाने के शौकिनों के दिलों में अपनी जगह बनाता आया है।
अगर आपने अभी तक इस बेकरी के चार कोना नान का स्वाद नहीं चखा तो जल्दी कीजिए। क्योंकि जल्द ही इस दुकान को बंद कर इस जगह को तोड़ने का फैसला लिया गया है। लेकिन क्यों? आखिर क्यों हैदराबाद के डेढ़ शताब्दी से ज्यादा पुरानी इस बेकरी को तोड़ने का फैसला लिया गया है?

क्यों तोड़ा जाएगा मुंशी नान बेकरी?
The Hindu की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार हैदराबाद के पुरानी हवेली इलाके में स्थित मुंशी नान बेकरी समेत, इस इलाके में और भी कई दुकानों व बेकरियों को तोड़ने के लिए चिह्नित किया गया है। इस इलाके से होकर हैदराबाद मेट्रो रेल के दूसरे चरण के हैदराबाद शहर को एयरपोर्ट और ओल्ड सिटी क्षेत्र के चंद्रयानगट्टा को MGBS लाइन से जोड़ने वाले कॉरिडोर का निर्माण किया गया है। इस वजह से मुंशी नान बेकरी को तोड़ने का फैसला लिया गया है।

हैदराबाद की सबसे पुरानी बेकरी में से है एक
बताया जाता है कि मुंशी नान बेकरी हैदराबाद के सबसे पुराने बेकरी में से एक है, जिसकी स्थापना वर्ष 1851 में यानी लगभग 174 सालों पहले किया गया था। इस दुकान में नान बनाने का काम सुबह 5.30 बजे से ही शुरू हो जाता है। गर्मी के मौसम में भले ही बिक्री कम होती हो, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे ग्राहक भी हैं जो इस गर्मागर्म नान के पकने का इंतजार यहां सुबह से करते हैं। कोई इसे यहीं पर खरीदकर खाना पसंद करता है तो कोई पैक करवाकर घर ले जाता है।
बेकरी में ₹20 में एक चार कोना नान मिलती है। मीडिया से बात करते हुए हमीद का कहना है कि इस इलाके की कई दुकानों को हैदराबाद मेट्रो रेल लिमिटेड (HMRL) से मुआवजा का चेक मिल चुका है और उन्होंने जगह को खाली भी कर दिया है। इस बेकरी की स्थापना हमीद के दादा जी ने वर्ष 1851 में किया था। कहा जाता है कि मुंशी नान को यह नाम इसके संस्थापक मो. हुसैन के नाम से मिला है। बताया जाता है कि हैदराबाद के चौथे निजाम, नसीर-उस-दौला के पास बतौर मुंशी काम किया करते थे।

क्या हमेशा के लिए बंद हो जाएगा मुंशी नान बेकरी?
बकौल हमीद मुंशी नान बेकरी को अभी तक मुआवजे का चेक नहीं मिला है। उसके मिलने का इंतजार किया जा रहा है। लेकिन क्या मुंशी नान बेकरी को हमेशा के लिए बंद कर दिया जा रहा है? जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं होने वाला है। मुंशी नान बेकरी को मुआवजे के चेक का इंतजार होने के साथ-साथ किराए पर लेने के लिए किसी दूसरी जगह की भी तलाश है।
हमीद ने बताया कि हैदराबाद मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण की वजह से इमारतों को तोड़ने की खबर फैलने के साथ ही मकान के किराए भी आसमान छूने लगे हैं। अब कहीं भी प्रति महीना किराया ₹50,000 से कम ही नहीं मांगा जा रहा है। इसके साथ ही जमा करने की रकम भी काफी ज्यादा मांगी जा रही है। हमीद का कहना है कि इस दुकान को खोने के बाद नई जगह खरीदने जैसी स्थिति नहीं रह जाएगी। इसलिए नई जगह को किराए पर लेने का ही फैसला लिया गया है।



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