हैदराबाद के ओल्ड सिटी (Old City) में मेट्रो के विस्तार की पिछले लंबे समय से मांग की जा रही थी, जिस दिशा में अब धीरे-धीरे लेकिन योजनाबद्ध तरीके से काम शुरू हो चुका है। बताया जाता है कि हैदराबाद ओल्ड सिटी क्षेत्र में सड़कों को चौड़ा बनाने का काम शुरू किया गया है। इसके लिए उन इमारतों व संरचनाओं को चिह्नित करने का काम चल रहा है, जिन्हें मेट्रो के निर्माण के लिए तोड़ा जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है और साथ ही इसके लिए मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। बता दें, हैदराबाद के ओल्ड सिटी में मेट्रो रेल का विस्तार करीब 7.5 किमी लंबा होगा। साथ ही कुछ इलाकों में इमारतों को तोड़ने का काम भी शुरू हो चुका है।

Siasat की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इस साल जनवरी में ही अलीजाह कोटला, मोघलपुरा, दियारा मीर मोमिन आदि में इमारतों को तोड़ने के साथ ही इस परियोजना की शुरुआत हो चुकी थी। इसके बाद दारुलशिफा, मीर आलम मंडी, बीबी बाजार और मुगलपुरा इलाकों में मेट्रो के विस्तार के लिए इमारतों को ढहाया गया और इसके बदले में मालिकों को मुआवजा भी दे दिया गया।
मेट्रो प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अभी हैदराबाद ओल्ड सिटी के कई इलाकों में इमारतों को तोड़ने के लिए चिह्नित किया जा चुका है। बताया जाता है कि रमजान माह खत्म होने के बाद ही इन्हें अधिग्रहीत करने की प्रक्रिया शुरू होगी जिसके बाद मेट्रो रेल के विस्तार के लिए सड़कों को चौड़ा बनाने के काम में तेजी आएगी।
जिन इलाकों को नए तौर पर चिह्नित किया गया है, इमारतों को तोड़ने व अधिग्रहीत करने के लिए, उनमें शामिल है-
- हरी बावली
- शाह अली बंदा
- अलियाबाद
- इंजिन बावली
मीडिया रिपोर्ट में हैदराबाद मेट्रो रेल लिमिटेड (HMRL) के हवाले से दावा किया गया है कि हैदराबाद के ओल्ड सिटी में MGBS से चंद्रयानगट्टा मेट्रो कॉरिडोर का 7.5 किमी लंबी मेट्रो रेल का जो रूट तैयार किया जाएगा, उसके लिए लगभग ₹1,000 करोड़ का मुआवजा लगभग 1100 इमारतों के लिए दिया जाएगा। बताया जाता है कि 900 इमारतों और संरचनाओं के संबंध में उनके मालिकों की मांगों का निपटारा किया जा चुका है।
मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि हैदराबाद के ओल्ड सिटी इलाके में बड़ी संख्या में धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं, जिसमें 21 मस्जिद, 12 मंदिर, 12 अशूरखाना, 33 दरगाह, 7 कब्रिस्तान, 6 चिल्ला और ऐसे ही कई संवेदनशील संरचनाएं यहां मौजूद हैं।
मेट्रो रेल प्रबंधन की तरफ आश्वस्त किया गया है कि सभी प्रकार के धार्मिक स्थलों को आधुनिक इंजीनियरिंग उपायों व स्टेशन व स्तंभों के थोड़े से एडजस्टमेंट के साथ बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है। किसी भी ऐतिहासिक या संवेदनशील संरचना को न तो तोड़ा जाएगा और न ही उन्हें किसी भी तरह से परिवर्तित या क्षति पहुंचायी जाएगी। इन इमारतों व संरचनाओं के पास की सड़क को चौड़ा करने का काम नहीं किया जाएगा।



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