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IMD ने मानसून में ही दे दिया सर्दी का अपडेट, ला नीना के असर से इस साल ठिठुराएगी ठंड!

मानसून अभी तक पूरी तरह से विदा भी नहीं हुआ है। देश के कुछ राज्यों में भले ही यह कमजोर पड़ गया है लेकिन अभी भी कई राज्यों में मानसून पूरी तरह से सक्रिय है। इसी बीच मौसम विभाग की ओर से सर्दी के मौसम को लेकर बड़ा अपडेट आ गया है। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि इस ला नीना के असर से देश में कड़ाके की ठंड पड़ सकती है।

मौसम विभाग की मानें तो इस साल दिसंबर के मध्य से लेकर जनवरी तक ठंड बड़ी ही ठिठुराने वाली पड़ सकती है।

la nina effect in india severe cold

सबसे पहले आपको बता दें,

ला नीना किसे कहते हैं?

ला नीना जलवायु की एक परिस्थिति को कहना जाता है। 'ला नीना' शब्द का स्पेनिश में अनुवाद 'एक लड़की' होता है। यह अल-नीनो से पूरी तरह से विपरित जलवायु व्यवहार है। जब समुद्र में ला नीना एक्टिव होता है, उस दौरान पूर्वी धाराएं पानी को पश्चिम की ओर धकेलना शुरू कर देती है। इस वजह से समुद्र की सतह ठंडी हो जाती है। जिससे ठंड भी अधिक पड़ती है और ठंड में बारिश होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं।

वहीं 'अल नीनो' इससे बिल्कुल विपरित समुद्री परिस्थितियां हैं। अल-नीनो का स्पेनिश में अनुवाद 'एक छोटा लड़का' होता है। यह गर्म समुद्री परिस्थितियां पैदा करता है, जिससे समुद्र का गर्म पानी तटों की तरफ आता है और इससे गर्मी भी ज्यादा पड़ती है। दोनों ही समुद्री परिस्थितियों की शुरुआत अप्रैल से जून के बीच शुरू होती है और अक्तूबर से फरवरी के बीच यह पूरी गति पकड़ लेती है। बताया जाता है कि आमतौर पर ये जलवायु घटनाएं 9-12 महीने तक चलती हैं लेकिन कई बार इनका असर 2 सालों तक भी बना रह सकता है।

क्या कहा मौसम वैज्ञानिकों ने?

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल मानसून देश में देर से आया। सितंबर के महीने में बंगाल की खाड़ी में बन रहा निम्न दबाव का क्षेत्र भी मौसम को और भी ठंडा कर देगा। इसके बाद ला नीना के एक्टिव होने से इस साल की ठंड ठिठुराने वाली होने की संभावना है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने मीडिया से बात करने हुए कहा कि मानसून पर ला नीना का कोई खास असर नहीं पड़ा है। लेकिन ला नीना अगर सर्दियों के आने से पहले एक्टिव हो जाता है तो दिसंबर से जनवरी के मध्य तक हाड़ कंपाने वाली सर्दी पड़ सकती है। उन्होंने बताया ला नीना की स्थिति मानसून के अंतिम सप्ताह या उसके बाद ही विकसित होगी।

severe cold in india due to la nina effect

कब से एक्टिव हो सकता है ला नीना?

IMD का अनुमान है कि ला नीना सितंबर से नवंबर के बीच विकसित हो सकता है जिसकी संभावनाएं 66 प्रतिशत है। इसके सर्दियों तक बने रहने की संभावनाएं 75 प्रतिशत है। आमतौर पर भारत में मानसून का मौसम 15 अक्तूबर को खत्म हो जाता है। ला नीना के देर से विकसित होने की वजह से इसका मानसून पर असर नहीं पड़ेगा लेकिन अक्तूबर के अंत में दक्षिण भारत में आने वाले उत्तर-पूर्वी मानसून को प्रभावित कर सकता है।

इस बार ला नीना के एक्टिव होने में देर हो रही है, जिस कारण मानसून पर उसका प्रभाव नहीं पड़ा। ला नीना के एक्टिव होने पर समुद्र की सतह और उसके ऊपर वायुमंडल दोनों ही ठंडी हो जाती है। इस कारण ठंड भी पड़ती है और ठंड में बारिश होने की संभावनाएं भी रहती है। अगर सितंबर के बीच से ला नीना एक्टिव हो जाता है तो इसके असर से पूरे भारत में ठिठुराने वाली ठंड पड़ने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

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