दुनिया में सबसे ऊंचाई पर बना रेल ब्रिज, जो जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी के ऊपर बनाया गया है 'चिनाब ब्रिज' का निर्माण पूरा हो चुका है। जल्द ही इस ब्रिज पर सिंगल रूट में ट्रेन सेवाओं को भी शुरू कर दिया जाएगा। उससे पहले रविवार (16 जून) को इस रेल ब्रिज का निरीक्षण किया गया और ट्रायल ट्रेन भी चलायी गयी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसका वीडियो अपने आधिकारिक X हैंडल पर पोस्ट किया है।
रेल मंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा कि पहली ट्रायल ट्रेन संगलदान से रियासी के बीच चलायी गयी जिसमें चिनाब ब्रिज को पार करना भी शामिल था। USBRL के लिए सभी निर्माण कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं सिर्फ सुरंग नंबर 1 का काम आंशिक रूप से अधूरा है।

बता दें, भारतीय रेल नेटवर्क विश्व के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क में से एक है। वर्तमान समय में हमारे देश में ट्रेनों का संचालन कन्याकुमारी से लेकर कटरा तक किया जाता है। वहीं कश्मीर घाटी में रेलवे सेवाएं बारामूला से संगलदान के बीच चलती है। चिनाब रेल ब्रिज पर ट्रेन सेवाओं के शुरू होने के बाद जम्मू-कश्मीर का रामबन जिला का संगलदान और रियासी जिले का कटरा देश के बाकी रेलवे नेटवर्क से जुड़ जाएगा।
कब से शुरू होगी ट्रेन सेवा?
रियासी जिले के डिप्टी कमिश्नर विशेष महाजन ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि यह ब्रिज लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का अनूठा उदाहरण है। जिस दिन ट्रेन रियासी पहुंचेगी, वह दिन एक गेम-चेंजिंग होगा। उन्होंने इस ब्रिज को दुनिया का 8वां अजूबा करार दिया है। ट्रेन सेवाओं को कब से शुरू किया जाएगा इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि इसकी सटीक तारीख तो अभी नहीं बतायी जा सकती है लेकिन मुझे उम्मीद है कि जल्द ही वह दिन भी आएगा।
एफिल टावर से भी ऊंचा है चिनाब रेल ब्रिज
जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी के ऊपर 359 मीटर (लगभग 109 फीट) की ऊंचाई पर चिनाब रेल ब्रिज को बनाया गया है। यह रेल ब्रिज पेरिस के एफिल टावर से भी लगभग 35 मीटर अधिक ऊंचा है। इस ब्रिज की ऊंचाई कुतुब मीनार से भी 5 गुना अधिक ऊंचा है। इस ब्रिज का निर्माण साल 2004 में शुरू हुआ था। यानी ब्रिज को बनने में पूरे 2 दशक का समय लग गया। ब्रिज का निर्माण रेल मंत्रालय के एक संगठन कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन ने किया है। बताया जाता है कि इस ब्रिज के निर्माण में कुल करीब ₹1400 करोड़ की लागत आयी है।
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30,000 मीट्रिक टन स्टील से बना ब्रिज
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो चिनाब ब्रिज को बनाने में लगभग 30,000 मीट्रिक टन स्टील का इस्तेमाल किया गया है। इस ब्रिज को धनुषाकार में बनाया गया है। ब्रिज का डिजाइन और इसे इतनी मजबूती से बनाया गया है कि अगले कम से कम 120 सालों तक यह ब्रिज पूरी तरह से सही-सलामत रहने वाली है। ब्रिज को जोड़ने के लिए विश्व स्तरीय वेल्डिंग का इस्तेमाल किया गया है। पूरी ब्रिज लगभग 18 कंक्रीट से बने खंभों पर टिकी है।

यह ब्रिज जम्मू में जिस स्थान पर बनी है वह भूकंप जोन IV में आता है, लेकिन इसे भूकंप जोन V के लिए डिजाइन किया गया है। इसका मतलब है कि रिक्टर स्केल पर 8 की तीव्रता वाला भूकंप भी यह ब्रिज झेल सकता है। 260 किमी की रफ्तार से आने वाले तूफान में भी यह ब्रिज डटकर खड़ा रहेगा। कश्मीर के मौसम को ध्यान में रखते हुए ही इस ब्रिज को इतना मजबूत बनाया गया है कि यह -10 डिग्री सेल्सियस से 40 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान आसानी से झेल सकें।



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