इंतजार खत्म। अब खुलने वाले हैं बाबा केदार के कपाट। बाबा केदार के शीतकालीन गद्दीस्थल ऊखीमठ से उनकी पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली केदारनाथ धाम के लिए रवाना हो चुकी है। कई पड़ावों से गुजरते हुए यह चल विग्रह डोली 1 मई को केदारनाथ धाम मंदिर में पहुंचेगी। 2 मई की सुबह चल विग्रह को मंदिर में स्थापित करने के साथ ही धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।

सदियों से चली आ रही इसी परंपरा के तहत केदारनाथ धाम मंदिर के कपाट खोलने की प्रक्रिया 28 अप्रैल से शुरू हो चुकी है। डोली के साथ बड़ी संख्या में भक्त भी पैदल चल रहे हैं। बाबा केदार की डोली अपने पहले पड़ाव के तहत गुप्त काशी के विश्वनाथ मंदिर में विश्राम करेगी।

उससे पहले यानी 30 अप्रैल को अक्षय तृतिया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खोल दिये जाएंगे, जिसके साथ ही उत्तराखंड में चार धाम यात्रा की शुरुआत हो जाएगी। चार धाम यात्रा को लेकर पिछले कुछ सालों की तरह इस साल भी श्रद्धालुओं में काफी उत्साह नजर आ रहा है।
लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने चार धाम यात्रा के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है। वहीं दूसरी ओर पिछले दिनों कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से सबक लेते हुए उत्तराखंड की सरकार ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये हैं।
फूलों से हो रही केदारनाथ मंदिर की सजावट
केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई को खोले जाएंगे। इसके लिए सारी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गयी है। कपाट खुलने के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इसलिए उत्तराखंड की सरकार तैयारियों को कोई चुक नहीं करना चाहती है। वहीं दूसरी ओर केदारनाथ धाम मंदिर को फूलों से बड़े ही सुन्दर तरीके से सजाने का काम भी किया जा रहा है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सारी तैयारियों का वीडियो शेयर किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सीएम धामी ने रविवार को कैंप कार्यालय से चार धाम मुख्य सेवक भंडारा के लिए सेवादारों की टीम को रवाना कर दिया है ताकि श्रद्धालुओं के लिए धाम में विभिन्न जगहों पर भोजन की व्यवस्था की जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था में कोई चुक नहीं
प्राकृतिक आपदा या किसी तरह के हमले की आशंका के मद्देनजर प्रशासन ने चार धाम यात्रा के पैदल यात्रा पथ पर जगह-जगह एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, डीडीआरएप के अलावा, पुलिस, होमगार्ड आदि के जवानों को तैनात किया जाएगा। बताया जाता है कि चार धाम यात्रा पथ पर सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ ही यात्रा को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए पुलिस के लगभग 200, एसडीआरएफ के 150 और अन्य जवानों की टुकड़ियों को तैनात किया जाएगा।

रुद्रप्रयाग देश का पहला ऐसा जिला बन चुका है, जहां अपना इंट्रानेट स्थापित किया गया है। इसे डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर रिलीफ इंट्रानेट का नाम दिया गया है। इससे किसी भी परिस्थिति में धाम सहित यात्रा मार्ग पर इंटरनेट सेवा लगातार बहाल रहेगी। इसमें वॉयस कॉलिंग की सुविधा को भी जोड़ा गया है। आपातकालिन परिस्थिति में कंट्रोल रूम से संपर्क करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही प्रशासन ने विभिन्न जगहों पर यंत्र स्थापित किया है, जिसका बटन दबाकर भी आपदा कंट्रोल रूम को किसी आपातकाल के बारे में सूचित किया जा सकेगा।



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