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» »लद्दाख में पैंगोंग झील के किनारे भारतीय सेना ने स्थापित की शिवाजी महाराज की प्रतिमा, Details

लद्दाख में पैंगोंग झील के किनारे भारतीय सेना ने स्थापित की शिवाजी महाराज की प्रतिमा, Details

अगली बार जब आप लद्दाख के पैंगोग त्सो झील पर घूमने जाएंगे, तो वहां आपको एक जानी-पहचानी सी प्रतिमा दिखाई देगी। यह प्रतिमा होगी छत्रपति शिवाजी महाराज की, जिसे भारतीय सेना की ओर से पैंगोंग झील के किनारे स्थापित किया गया है। जैसा कि हम सभी को पता है कि लद्दाख का पैंगोंग झील सिर्फ अपनी शानदार सुन्दरता की वजह पर्यटकों को ही आकर्षित नहीं करता है बल्कि...

यह झील व इसके आसपास का इलाका पड़ोसी देश चीन की वजह से भी हमेशा सुर्खियों में बना रहता है। अक्सर भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच लद्दाख के इन पर्वतीय इलाकों में हिंसक झड़प, चीन की भारत में घुसपैठ की कोशिशें आदि खबरें आती रहती हैं। ऐसे में पैंगोंग झील के किनारे स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा साहस और वीरता के प्रतीक के तौर पर देखी जा रही है।

pangong shivaji statue

लद्दाख के पैंगोंग त्सो झील के किनारे इस प्रतिमा को स्थापित करने की जानकारी अपने आधिकारिक X हैंडल पर भारतीय सेना के Fire Fury Corps की तरफ से दी गयी। बताया गया 14,300 फीट की ऊंचाई पर शिवाजी महाराज की इस भव्य प्रतिमा का अनावरण लद्दाख के पैंगोंग त्सो झील के किनारे किया गया है। Money Control की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इस प्रतिमा के अनावरण समारोह के दौरान लद्दाख से सांसद जयमांग सेरिंग नमग्याल और भारतीय सेना के लेफ्ट. जनरल हितेश भल्ला समेत सेना के कई उच्चाधिकारी भी मौजूद रहे।

मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज की 30 फीट ऊंची इस प्रतिमा में वे अपने घोड़े पर सवार और हाथों में तलवार उठाए हुए मुद्रा में नजर आ रहे हैं। पैंगोंग झील के शानदार नजारे शिवाजी महाराज की इस प्रतिमा की भव्यता में चार चांद लगा रहे हैं। इतनी ऊंचाई पर स्थापित यह प्रतिमा भारत की संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक मानी जा रही है। इस प्रतिमा का अनावरण 26 दिसंबर 2024 को किया गया।

बताया जाता है कि इस प्रतिमा के अनावरण समारोह में सेना के अन्य अधिकारियों के साथ जीओसी फायर एंड फ्यूर कॉर्प्स और मराठा लाइट इन्फैंट्री के जवान भी शामिल हुए। भारत का यह कदम पड़ोसी देश चीन की सीमा से सटे क्षेत्र में अपनी संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के संकल्प का प्रतीक समझा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इस प्रतिमा को पैंगोंग त्सो झील के किनारे स्थापित करने के साथ ही भारत ने यह स्पष्ट संदेश भी दे दिया है कि वह अपने कदम किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं खींचने वाला है।

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