लद्दाख का पैंगोंग झील पर्यटकों के लिए बहुत बड़ा आकर्षण होता है। सीधे शब्दों में अगर कहा जाए, तो लद्दाख की ट्रिप बिना पैंगोंग झील (Pangong Lake) घूमें पूरी नहीं होती है। लेकिन सर्दियों के मौसम में होने वाली भारी बर्फबारी की वजह से पैंगोंग झील तक का रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाता है। गर्मियों में पैंगोंग झील का नीला स्वच्छ पानी अपने अंदर एक अलग तरह की सुन्दरता ही समेटे रहता है लेकिन सर्दियों के मौसम में जब झील का पानी पूरी तरह से जम जाता है, तब वह कैसा दिखता है?
क्या आप बता सकते हैं कि गर्मियों का नीला स्वच्छ पैंगोंग झील सर्दियों के मौसम में जब जम जाता है, तब वह किस रंग का दिखता है - नीला या फिर दूध जैसा सफेद? खुद पता लगाना चाहते हैं? जल्द ही आप सर्दियों के मौसम में भी पैंगोंग झील तक जा सकेंगे।
कैसे सर्दियों के बर्फीले मौसम में भी पैंगोंग झील तक जा सकेंगे?
आपके मन में जरूर यह सवाल उठ रहा होगा कि सर्दियों के मौसम में जब लद्दाख भारी बर्फबारी की चपेट में होता है, पैंगोंग झील तक पूरी तरह से जमकर बर्फ की बन जाती है, तब वहां तक कैसे पहुंचेंगे भला! Times of India की एक रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार भारत सरकार केला पास (Kela Pass) से होते हुए लेह से पैंगोंग झील तक ट्वीन-ट्यूब टनल बनाने के बारे में सोच-विचार कर रही है। बताया जाता है कि सुरंग बनाने का यह प्रस्ताव लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश की प्रशासन के पास भी भेजा जा चुका है। अगर यह टनल बनता है तो पर्यटकों को साल के 12 महीने ही पैंगोंग झील तक पहुंचने में बड़ी ही आसानी होने वाली है।
टनल से मिलेगा दोहरा फायदा
लेह से पैंगोंग झील तक अगर टनल बनाया जाता है तो इसका दोहरा फायदा मिलेगा। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि लद्दाख के पास ही पड़ोसी देशों के साथ हमारी सीमाएं मिलती हैं, इस वजह से सेना के जवानों और सीमा सुरक्षा बल का इस क्षेत्र में आना-जाना हमेशा लगा रहता है। सर्दियों के मौसम में न सिर्फ सेना के जवानों बल्कि उनके लिए राशन आदि को सीमावर्ती क्षेत्रों में पहुंचाना टेढ़ी खीर साबित होती है। अगर यह सुरंग बन जाती है तो साल के सभी मौसमों में ही यहां तक पर्यटकों के साथ-साथ सेना के लिए भी आवाजाही करना बड़ा ही आसान बन जाएगा।
हर मौसम में पहुंच को बनाएगा आसान
बता दें, केला पास देश का सबसे ऊंचा मोटरेबल पास कहलाता है जो समुद्रतल से करीब 18,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह लेह को पैंगोंग झील से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र में जिस सुरंग को बनान का प्रस्ताव दिया गया है वह एक ट्वीन-ट्यूब सुरंग होने वाला है जिसकी लंबाई करीब 7-8 किमी होगी। इस टनल के बन जाने से पैंगोंग झील का यह इलाका जो सर्दियों में भारी बर्फबारी के बाद देश के दूसरे हिस्सों से पूरी तरह से कट जाता है, तक हर मौसम में पहुंच को आसान बना देगा।
सिर्फ इतना ही नहीं, बताया जाता है कि यह टनल लेह से पैंगोंग झील तक पहुंचने में लगने वाले समय को भी काफी हद तक घटा देगा। बताया जाता है कि इस टनल को लगभग ₹6000 करोड़ की लागत से तैयार किया जाएगा। हालांकि यह प्रस्ताव अभी प्राथमिक चरण में ही है, लेकिन अगर यह सुरंग बनती है तो इसका निर्माण बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) या फिर नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NHIDCL) द्वारा करवाने की योजनाओं पर ही विचार-विमर्श किया जा रहा है।

गौरतलब है कि साल 2022 में ही लद्दाख प्रशासन ने 4 दर्रों (Pass) में सुरंग का निर्माण करने की जरूरतों पर काफी जोर दिया था। जिन 4 दर्रों का उल्लेख किया गया था, वो हैं -
- खारदुंग ला पास
- फोटू ला पास
- नमिका ला पास
- केला पास
सर्दियों के मौसम में जब बर्फबारी होने की वजह से सड़कें पूरी तरह से बंद हो जाती हैं तब इन पास में सुरंग बनाने से आवाजाही करना आसान हो जाएगा। अगर केला पास में सुरंग बनाने का प्रस्ताव पारित हो जाता है तो यह सर्दियों के मौसम में एडवेंचर ढूंढने वाले पर्यटकों के लिए सोने पर सुहागा जैसा तो होगा ही साथ में देश की सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी एक बेहद महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।



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