लद्दाख की जीवनरेखा (Lifeline) कहलाने वाले ज़ोजिला पास को रिकॉर्ड समय में खोल दिया गया है, जो सर्दियों के समय में बर्फ की इतनी मोटी दिवारों से घिर जाता है, जिसे तोड़ पाना बेहद मुश्किल भरा काम होता है। नामुमकिन का दिखने वाले इस काम को अंजाम दिया है बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने, जिसने ज़ोजिला पास को मात्र 32 दिनों के अंदर फिर से खोल दिया है।
आमतौर पर 100 से ज्यादा दिनों में खुलने वाले दर्रे को मात्र 32 दिनों बाद ही खोलकर BRO ने नया रिकॉर्ड बनाया है। भारी बर्फबारी की वजह से हर साल सर्दियों के मौसम में ज़ोजिला पास बंद हो जाता है।

लगभग 100 या कई बार उससे भी ज्यादा दिनों तक बंद रहने के बाद धीरे-धीरे बर्फ को साफ कर दर्रा को खोलने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। साल 2021 में ज़ोजिला पास 110 दिनों बाद खुल पाया था लेकिन इस साल BRO ने इसे मात्र 32 में ही इसे खोल दिया गया है। पर आखिर ज़ोजिला पास इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? क्यों इसे लद्दाख की जीवनरेखा कहा जाता है?
ज़ोजिला पास लद्दाख के कारगिल जिले में मौजूद है। कश्मीर घाटी और लद्दाख को यही पास जोड़ता है जिस वजह से देश के बाकी हिस्से के साथ लद्दाख जुड़ पाता है। हर साल यहां भारी बर्फबारी होती है, जिसकी वजह से कुछ दिनों के लिए अस्थायी रूप से ज़ोजिला पास बंद पड़ जाता है।
इसके बंद होने से सीमा सुरक्षा बल के जवानों को आने-जाने में जहां मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, वहीं व्यापार और हर तरह की आर्थिक गतिविधि भी ठप्प पड़ जाती है। आमतौर पर नवंबर के अंत से लेकर अप्रैल के मध्य तक यह पास बंद ही रहता है।
लेकिन इस साल BRO ने कमाल कर दिखाया है। इस साल 27 फरवरी से 16 मार्च के बीच पश्चिमी झंझावात की वजह से ज़ोजिला पास में तापमान शून्य से नीचे चला गया और अत्यधिक बर्फबारी हुई। नतीजा यह हुआ कि दर्रे में बर्फ की मोटी परत जमा हो गयी और यह पूरी तरह से बंद हो गया।
लेकिन BRO ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी और जैसे ही मौसम थोड़ा साफ होना शुरू हुआ, इसने बर्फ को साफ करना भी शुरू कर दिया। इस वजह से ही मात्र 32 दिनों के अंदर ही 1 अप्रैल से BRO ने ज़ोजिला पास में ट्रैफिक को फिर से बहाल कर दिया।

ज़ोजिला पास लगभग 11,643 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है जो लद्दाख और देश के दूसरे हिस्सों के साथ एकमात्र सड़क संपर्क है। इस वजह से इस हिस्से में रहने वाले लोगों के लिए भी यह दर्रा बेहद महत्वपूर्ण है। श्रीनगर-सोनमर्ग-गुलमर्ग रूट पर मौजूद यह दर्रा कारगिल, सियाचिन आदि क्षेत्रों के साथ देश को जोड़ता है।
बता दें, इस क्षेत्र में भारी बर्फबारी के समय भी आवाजाही को बरकरार रखने के लिए ही प्रशासन की ओर से ज़ोजिला टनल बनाया जा रहा है, जिसकी वजह से दर्रे के बंद होने का यातायात पर कोई असर नहीं पड़ेगा।



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