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मध्य प्रदेश की 6 ऐतिहासिक जगहें यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल

मध्य प्रदेश की 6 ऐतिहासिक जगहों को यूनेस्को ने अपनी अस्थायी सूची में शामिल कर लिया है। इसे मध्य प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस बात के लिए राज्य भर के लोगों को बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस बात की घोषणा की है। इस बारे में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव पर्यटन और संस्कृति व प्रबंध संचालक शिव शेखर शुक्ला का कहना है कि राज्य भर के लिए यह गौरव का विषय है।

मुख्यमंत्री ने इस बारे में कहा कि राज्य के ऐतिहासिक धरोहरों व संस्कृति को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है। अस्थायी सूची में नाम आने से इन जगहों के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ेगी और इसे वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी। इसका नतीजा होगा कि इस ऐतिहासिक जगहों पर आने वाले पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा।

gwalior fort

बताया जाता है कि पिछले लंबे समय से ही इन 6 ऐतिहासिक जगहों को यूनेस्को की विश्व धरोहर अस्थायी लिस्ट में शामिल करवाने का प्रयास किया जा रहा था। अब इन्हें यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल की स्थायी सूची में शामिल करवाने की कोशिश की जा रही है।

कौन सी 6 जगहों को यूनेस्को की अस्थायी सूची में किया गया शामिल!

1. ग्वालियर किला

अपनी अभेद्य सुरक्षा के लिए लोकप्रिय ग्वालियर का किला एक पहाड़ी किला है। इतिहासकारों के अनुसार ग्वालियर किले की सबसे पहली नींव 6ठवीं शताब्दी में राजपूत योद्धा सूरज सेन ने रखी थी। 1398 में तोमरों ने इस किले पर अधिकार कर लिया था, जिनमें प्रमुख नाम मान सिंह तोमर का था।

2. धमनार ऐतिहासिक समूह

मंदसौर जिले में धमनार गांव में स्थित है ये गुफाएं। चट्टानों को काटकर 51 गुफाएं, स्तूप, चैत्य, मार्ग आदि का निर्माण किया गया था। यहां गौतम बुद्ध की बैठी और निर्वाण मुद्रा में एक विशाल प्रतिमा स्थित है।

bhojeshwar mahadev

3. भोजेश्वर महादेव मंदिर

राजधानी भोपाल से महज 28 किमी की दूरी पर स्थित है भोजेश्वर महादेव मंदिर। यह एक ही पत्थर पर बनाया गया मंदिर है, जिसकी गर्भगृह में विशाल शिवलिंग स्थापित है। इस शिवलिंग की परिधि लगभग 6 मीटर और लंबाई 2.35 मीटर है। इस मंदिर को पूर्व का सोमनाथ की उपाधि दी गयी है। राजा भोज ने 1010 से 1053 में इस मंदिर को बनाने का आदेश दिया था।

4. चंबल घाटी

पुरापाषाण काल से लेकर ऐतिहासिक काल तक फैली, रॉक कला दैनिक जीवन, धार्मिक अनुष्ठानों और शिकार प्रथाओं के दृश्यों को दर्शाती है। चंबल घाटी में पत्थरों को काटकर कलात्मक शैलियों और सांस्कृतिक प्रभावों का मिश्रण प्रदर्शित करते हैं, जो क्षेत्र के गतिशील इतिहास को दर्शाते हैं।

chambal river

5. खूनी भंडारा

407 साल पहले खूनी भंडारा का निर्माण किया गया था। यह अपनी तरह का अनोखा जलापूर्ति प्रणाली है, जो बुरहानपुर में स्थित है। इसका निर्माण 1615 में बुरहानपुर के तत्कालिन शासक अब्दुर्रहीम खानखाना ने करवाया था।

6. गोंड स्मारक, मंडला

मंडला जिले के रामनगर गोंड राजाओं का गढ़ हुआ करता था। वर्ष 1667 में गोंड राजा हृदय शाह ने नर्मदा नदी के किनारे मोती महल का निर्माण करवाया था। सीमित संसाधनों और तकनीक के बावजूद 5 मंजीला बना यह महल राजा की इच्छाशक्ति की गवाही देता है। कालांतर में इस महल की 2 मंजीले जमीन के नीचे दब गयी हैं, लेकिन 3 मंजीलें अभी भी जमीन के ऊपर दिखाई देती हैं।

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