पुणे में इन दिनों आतंक मचा रहा है गुईलेन बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barré Syndrome), जिसे GB सिंड्रोम भी कहा जाता है। यह एक दुर्लभ स्नायु रोग (Neurological disorder) है, जिससे संक्रमित मरीजों की संख्या 101 पर पहुंच चुकी है। सिर्फ इतना ही नहीं रविवार (26 जनवरी) को इस संक्रमण के एक संदिग्ध मरीज की मौत भी हो गयी जो महाराष्ट्र में इस बीमारी से हुई मौत का पहला मामला है।
पर है क्या गुईलेन बैरे सिंड्रोम जो पुणे के बाद अब धीरे-धीरे महाराष्ट्र के दूसरे हिस्सों में भी फैलता जा रहा है? क्या है इसके लक्षण और इस बीमारी से बचने के उपाय क्या है? क्या है इसका इलाज?

Times of India की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार पुणे में 28 नए मामलों की पुष्टि के साथ ही गुईलेन-बैरे सिंड्रोम से संक्रमित कुल मरीजों की संख्या 101 पर पहुंच गयी है। बताया जाता है कि GB सिंड्रोम के एक संदिग्ध मरीज की मौत सोलापुर में हो गयी है। जिन मरीजों में GB सिंड्रोम की पुष्टि हुई है, उनमें से 16 मरीज इस समय वेंटिलेटर पर हैं। जिन लोगों में GB सिंड्रोम के लक्षण पाए गये हैं, उनमें से 9 मरीजों की आयु 19 साल से कम और 23 मरीजों की आयु 50 से 80 साल के बीच बतायी जाती है।
बताया जाता है कि सबसे पहले 9 जनवरी को GB सिंड्रोम के लक्षणों के साथ पुणे में पहला मरीज अस्पताल में भर्ती हुआ था। यह संक्रमण कैसे फैल रहा है, इस बात का पता लगाने के लिए अधिकारी पुणे के पेयजल का जांच कर रहे हैं। खासतौर पर उन इलाकों में जहां से सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं।
क्या है GB सिंड्रोम और इसके लक्षण?
GB सिंड्रोम एक दुर्लभ प्रकार का स्नायु रोग है। इस बीमारी में शरीर का रोग-प्रतिरोधक क्षमता ही गलती से शरीर के परिधीय नाड़ी पर हमला कर देते हैं। इस वजह से मांसपेशियों की कमजोरी, उनका सुन्न पड़ जाना और कुछ मामलों में लकवा मार जाने जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
आमतौर पर इस परिस्थिति में 2 से 3 हफ्तों में सुधार आने लगता है लेकिन यह पूरी तरह से मरीज पर निर्भर करता है। कभी-कभी इस बीमारी का हमला, मरीज को बेहद कमजोर बना देता है और कभी-कभी मरीज सामान्य रूप से थोड़ा कमजोर पड़ता है, जिससे वह जल्द ही उभर भी जाता है।

क्या है इलाज?
विशेषज्ञों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि यह बीमारी तब होती है जब शरीर का रोग-प्रतिरोधक क्षमता गलती से किसी बैक्टेरिया या वायरल संक्रमण से लड़ते समय शरीर की उन नसों पर ही हमला कर देता है जो दिमाग तक संकेत ले जाने काम करती है। जिस वजह से शरीर में अचानक कमजोरी का आना या लकवा मार जाना अथवा दूसरी कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि 80% मामलों में प्रभावित मरीज अस्पताल से छूटने के लगभग 6 महीने के अंदर ही फिर से चल पाते हैं। लेकिन कुछ मरीजों को फिर से चल पाने में 1 साल या उससे अधिक का समय लग जाता है। बताया जाता है कि GB सिंड्रोम का इलाज काफी महंगा होता है, जिसके एक इंजेक्शन की कीमत लगभग ₹20,000 बतायी जाती है।
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इस समय महाराष्ट्र में GB सिंड्रोम के मरीज सोलापुर (जहां एक मरीज की मौत हुई है) के अलावा, पुणे, पिंप्री चिंचवाड़, पुणे ग्रामीण और आसपास के अन्य जिलों में भी मिले हैं। इस समय विभिन्न अस्पताल में जिन 101 मरीजों का इलाज चल रहा है उनमें से 16 को वेंटिलेटर पर रखा गया है। कुल मरीजों में से 68 पुरुष और 33 महिलाएं हैं। इस तरह से कहा जा सकता है कि महिलाओं की तुलना में GB सिंड्रोम पुरुषों को अपनी चपेट में अधिक ले रहा है।
विश्लेषण से पता चलता है कि इस सिंड्रोम से संक्रमित 101 मरीजों में 19 की आयु 9 साल से कम, 10-19 साल के आयुवर्ग वाले 15 मरीज, 20 से 29 साल के आयुवर्ग वाले 20 मरीज, 30-39 वर्ष की आयुवर्ग वाले 13 मरीज, 40 से 49 वर्ष की आयुवर्ग वाले 12 मरीज, 50 से 59 वर्ष की आयुवर्ग वाले 13 मरीज, 60 से 69 की आयुवर्ग वाले 8 और 70 से 80 साल के आयुवर्ग वाले मरीजों की संख्या 1 है।
मिलेगा मुफ्त इलाज
मीडिया से बात करते हुए महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार ने घोषणा की है कि GB सिंड्रोम का इलाज महंगा है। इसलिए विभिन्न जिला प्रशासन और वहां के अधिकारियों, म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन से बात करने के बाद हमने यह फैसला किया है कि मरीजों को GB सिंड्रोम का इलाज मुफ्त में दिया जाएगा।
कहां मिलेगा मुफ्त इलाज?
- पिंप्री-चिंचवाड़ के मरीजों को YCM अस्पताल में मुफ्त इलाज मिलेगा।
- पुणे म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन क्षेत्र के मरीजों को कमला नेहरु अस्पताल में मुफ्त इलाज मिलेगा।
- पुणे के ग्रामीण इलाकों में GB सिंड्रोम से संक्रमित मरीजों का पुणे के सास्सून अस्पताल में मुफ्त में इलाज होगा।



Click it and Unblock the Notifications













