अगले 1-2 महीने के अंदर ही मुंबई के बांद्रा-वर्ली सी-लिंक के टोल प्लाजा पर परंपरागत पद्धति के बजाए एक नयी और एडवांस पद्धति से टोल शुल्क वसूला जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार जल्द ही बांद्रा-वर्ली सी-लिंक के टोल प्लाजा पर RFID पद्धति को लागू किया जाएगा।
वाहन चालकों से टोल प्लाजा पर खासतौर पर पिक आवर के दौरान जाम की लगातार मिलने वाली शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए ही महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) ने यह फैसला लिया है।

इस बाबत Times of India की एक रिपोर्ट के अनुसार अगले 1 या 2 महीने के अंदर मुंबई में बांद्रा और वर्ली को जोड़ने वाली सी-लिंक के टोल प्लाजा पर शुल्क वसूलने के लिए रेडियो फ्रिक्वेंसी आईडेंटीफिकेशन (RFID) पद्धति को शुरू किया जाएगा। बताया जाता है कि टोल प्लाजा पर इस पद्धति के लागू होने के बाद किसी भी गाड़ी को सिर्फ तभी रोका जाता है जब वह गाड़ी FASTag में ब्लैकलिस्टेड हो या आवश्यक बैलेंस मौजूद न हो। पिछले काफी दिनों से पिक आवर के दौरान इस टोल प्लाजा पर लगातार वाहन चालक जाम की शिकायतें कर रहे थे। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ही MSRDC ने टोल प्लाजा को अपग्रेड करने का फैसला लिया है।
बताया जाता है कि जाम की मुख्य वजह टोल प्लाजा के कुछ गेटों का खराब होना है। मुंबई के संयुक्त पुलिस कमिश्नर, ट्रैफिक अनिल कुम्भरे ने MSRDC को पिछले महीने ही पत्र लिखकर कहा भी था कि खराब गेटों की वजह से ही टोल प्लाजा पर जाम लग रही है। ट्रैफिक पुलिस की जांच में पता चला था कि टोल प्लाजा के कम से कम 2 गेट लगातार खराब हो रहे थे। ट्रैफिक पुलिस की सबसे बड़ी चिंता थी कि एक बार अगर कोस्टल रोड, जो बांद्रा-वर्ली सी-लिंक को जोड़ता है, पूरी तरह से शुरू हो जाती है और उस समय भी अगर टोल प्लाजा के गेट खराब रहे तब कैसी विकट परिस्थिति उत्पन्न हो जाएगी।

मीडिया से बात करते हुए ट्रैफिक पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि कोस्टल रोड का इस्तेमाल करते हुए लोगों को मरीन ड्राईव से वर्ली पहुंचने में महज 10 मिनट समय लगेगा। अगर टोल प्लाजा के सभी गेट को जल्दी ठीक नहीं किया गया तो सी-लिंक पर जाम की समस्या शुरू हो जाएगी। उक्त अधिकारी का कहना है कि सी-लिंक के टोल गेट में समस्या होने की वजह से पिक आवर के समय ट्रैफिक जाम की परेशानी भारी से अतिभारी स्तर पर पहुंच जाएगी।
इस बारे में बांद्रा-वर्ली सी-लिंक से होकर आवाजाही करने वाले वाहन चालकों ने भी सवाल उठाया है कि FASTag और सेंसर होने के बावजूद क्यों हमें सीं-लिंक पर रुकना पड़ेगा? यात्रियों का कहना है कि हाल ही में खुले अटल सेतु (MTHL) पर वाहनों को रुकने या टोल टैक्स अलग से जमा करने के लिए ठहरने की जरूरत ही नहीं होती है।
मीडिया से बात करते हुए MSRDC के संयुक्त एमडी मनुज जिंदल ने बताया कि सी-लिंक के टोल प्लाजा को अपग्रेड करने के लिए टेंडर निकालने का काम चल रहा था। इसी बीच टोल गेट नंबर 7 और 14 जल्दी-जल्दी बिगड़ने लगे। हालांकि इनकी मरम्मत भी की जा रही थी लेकिन ये जल्दी-जल्दी खराब भी होने लगे हैं। उन्होंने बताया कि जो वाहन चालक मासिक पास या नगद पेमेंट करते हुए MSRDC उन सभी वाहन चालकों के टोल टैक्स को जल्दी काटने के उपाय ढूंढ रही है। इस वजह से नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से हमारी बातचीत भी चल रही है।



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