22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसरन घाटी में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के मद्देनजर क्षेत्र में सभी प्रकार की ट्रेकिंग गतिविधियों (Trekking Activities) को बंद करने का फैसला लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार यह फैसला सिर्फ पर्यटकों ही नहीं बल्कि स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी लिया गया है। बता दें, पहलगाम का बैसरन घाटी दुनिया भर में 'मिनी स्वीट्जरलैंड' के नाम से जाना जाता है।
घाटी में अचानक हुए आतंकी हमले में एक स्थानीय निवासी समेत कुल 26 लोगों ने अपनी जान गंवा दी, जिसमें बताया जाता है कि 1 नेपाली पर्यटक भी शामिल है। 22 अप्रैल को जब पर्यटक बैसरन घाटी में घूम रहे थे, तब गोलियों की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा था।

Times of India की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इस घटना के बाद ही जम्मू और कश्मीर के वन विभाग ने केंद्र शासित प्रदेश में सभी तरह के ट्रेकिंग गतिविधियों को बंद करने का फैसला लिया है। इस फैसले का असर छोटे और बड़े, हर तरह के ट्रेकिंग गतिविधियों पर पड़ेगा।
खासतौर पर उन ट्रेकिंग गतिविधियों पर जो घने जंगलों के अंदर तक जाती हैं। बताया जाता है कि प्रशासन ने सभी जिला प्रशासन को उन सभी रूट्स की सूची तैयार करने और वहां सुरक्षा व्यवस्था को कड़ी करने का निर्देश दिया है जहां ट्रेकिंग गतिविधियां संचालित होती हैं।
गौरतलब है कि कश्मीर में ट्रेकिंग का समय आमतौर पर मई से सितंबर के बीच माना जाता है। इस दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में एडवेंचर लवर पर्यटक कश्मीर घाटी का रुख करते हैं। बताया जाता है कि प्रदेश की सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि ट्रेकिंग गतिविधियों को तब तक बंद रखा जाएगा, जब तक वर्तमान परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए पूरे प्रदेश के सभी ट्रेकिंग रूट्स की सुरक्षा की जांच और उन्हें पुख्ता न बनाया जाए।

हालांकि प्रदेश की सरकार द्वारा लिये गये इस फैसले का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी बुरी तरह से पड़ेगा क्योंकि कश्मीर की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा पर्यटन पर ही निर्भर करता है। पहलगाम की घटना के बाद से पिछले कुछ दिनों में कश्मीर की ट्रिप और विमान की बुकिंग रद्द होने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। इस वजह से स्थानीय कंपनियां, होटल, लॉज, परिवहन, पर्यटन स्थलों पर गाईड से लेकर ट्रेकिंग गाईड तक प्रभावित हो रहे हैं।
इस वजह से पर्यटन का सीजन शुरू होने के बाद प्रदेश की सरकार अपने इस फैसले पर कितना कायम रह पाती है, इसे लेकर जानकारों ने संदेह व्यक्त किया है। हालांकि पर्यटकों व स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि सरकार अपने फैसले पर अडिग रहेगी।



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