महज 5 दिनों बाद ही केदारनाथ के कपाट खुलने वाले हैं। उससे पहले हुई बर्फबारी ने यात्रियों के साथ-साथ प्रशासन की मुश्किलें भी बढ़ा दी है। कुछ ऐसी ही स्थिति बद्रीनाथ धाम की भी है जिसके कपाट एक सप्ताह में खुलने वाले हैं। यहां हुई ताजा बर्फबारी के कारण बर्फ की मोटी परत जम चुकी है।

केदारनाथ में बर्फबारी ने बढ़ाई मुश्किलें
केदारनाथ धाम के कपाट 25 अप्रैल से खुलने वाले हैं। इसलिए समय कम होने की वजह से खराब मौसम में भी यात्रा से संबंधित सारी तैयारियां की जा रही हैं। इस साल केदारनाथ धाम में मौसम लगातार खराब बना हुआ है। लेकिन गुरुवार को केदारनाथ के साथ ही लिंचौली तक बर्फबारी हुई जिस वजह से यात्रा की तैयारियों में जुटे मजदूर, तीर्थपुरोहित, होटल व्यवसायियों को काफी परेशानियां हो रही हैं। बताया जा रहा है कि अचानक हुई इस बर्फबारी का असर चारधाम की यात्रा की तैयारियों पर भी पड़ेगा।

बद्रीनाथ में भी मौसम का बदला मिजाज
बद्रीनाथ धाम, जिसके कपाट 27 अप्रैल से खुलने वाले हैं, में अचानक कड़ाके की ठंड ने दस्तक दी है और वहां भी बर्फबारी शुरू हो गयी है। बताया जाता है कि वहां बर्फ की मोटी परत जम चुकी है जिस वजह से इलाके में ठंड भी काफी बढ़ गयी है। बद्रीनाथ धाम को लेकर प्रशासन ने अपनी तैयारियां कुछ समय पहले ही तेज कर दी थी लेकिन अचानक शुरू हुई बर्फबारी ने उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है।

मौसम विभाग ने 24 और 25 अप्रैल तक मौसम में विशेष किसी बदलाव की संभावना से इंकार किया है। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ जिलों में हल्की बारिश के साथ-साथ गरज के साथ बारिश होने की संभावना व्यक्त की है।
यात्रा के दौरान बुजुर्ग और नवजात शिशुओं का रखें खास ख्याल
- सांस की दिक्कत समेत दिल की बीमारी और उल्टी की समस्याओं के लिए आवश्यक दवाईयां लेना बिल्कुल ना भूलें।
- पैदल जाने के बजाए खच्चर या पालकी का उपयोग करें।
- यात्रा के बीच में कुछ-कुछ देर के लिए आराम जरूर करें।
- पर्याप्त मात्रा में गर्म कपड़े अपने पास रखें। गर्म कपड़ों में बॉडी वॉर्मर, गर्म ऊनी मोजे, ऊनी दस्ताने और टोपी साथ ले जाना ना भूलें।
- हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह या सांस के रोगी डॉक्टर की सलाह लिये बिना यात्रा ना करें।
- नवजात शिशुओं और बच्चों के लिए अतिरिक्त मात्रा में गर्म कपड़े रखें, क्योंकि बर्फबारी में उनके कपड़े गीले हो जाने की संभावना ज्यादा होती है।
- ऐसे जैकेट साथ ले जाएं, जिनपर पानी नहीं रुकता है। बर्फबारी में इनके गीले होने का डर नहीं रहता है।



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