मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में जाने का प्लान बना रहे हैं? बांके बिहारी का दर्शन कर अपना जीवन धन्य बनाना चाहते हैं? लेकिन संभव है कि मंदिर में पहुंचने पर आपको कपाट बंद मिले। क्योंकि बांके बिहारी मंदिर में शीतकालीन सेवा शुरू हो चुकी है और मंदिर के दर्शन का समय भी बदल चुका है। वृजधाम में नवंबर से ही सर्दियां पड़ने लगती हैं, इसलिए बांकेबिहारी मंदिर में शीतकालीन सेवा शुरू कर दिया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार मंदिर में पिछले 13 नवंबर से ही शीतकालीन सेवा लागू हो चुकी है।
जानिए बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन का नया समय :-
ठंड में बदल गया है मंदिर में दर्शन का समय
मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार बांकेबिहारी मंदिर में ठाकुर जी की शीतकालीन सेवा शुरू हो चुकी है। इस वजह से मंदिर खुलने और बंद होने का समय, शयन आरती, दैनिक पूजा सेवा आदि का समय बदल गया है। बताया जाता है कि सर्दियों के दौरान मंदिर सुबह 8.45 बजे खुलेगा और प्रातः काल होने वाली श्रृंगार आरती सुबह 9 बजे से शुरू होगी। 9.05 बजे राजभोग सेवा शुरू होगी। दोपहर में 12 बजे पर्दा लगाकर ठाकुर जी को राजभोज लगाया जाएगा, जिस समय भक्तों को बांकेबिहारी के दर्शन नहीं मिल पाएंगे।

इसके बाद दोपहर 12.30 बजे मंदिर को फिर से आम भक्तों के लिए खोल दिया जाएगा। इसके बाद मंदिर में बांकेबिहारी की आरती होगी और आरती के बाद कपाट को बंद कर दिया जाएगा। शाम को 4.30 बजे फिर मंदिर खुलेगा और रात को 8 बजे तक भक्त बांकेबिहारी के दर्शन कर सकेंगे। रात को 8.30 बजे पर्दा लगाकर भगवान को शयन भोग दिया जाएगा और उनकी शयन आरती शुरू होगी।
भोग में बढ़ेगी केसर की मात्रा

सर्दियों में बांकेबिहारी का पोशाक भी अब बदल जाएगा और उन्हें अब हल्के गर्म कपड़ों की पोशान पहनायी जाएगी। सर्दियों में ठाकुरजी को ठंड से बचाने के लिए शयनशैया पर पश्मीने की चादर, शेमल की रुई वाली रजाई से ढंका जाएगा। चांदी की सिगड़ी में आग सुलगाकर गर्भगृह को गर्म रखा जाएगा। ठाकुर जी को भोग में सूखे मेवे दिए जाएंगे। वहीं बांकेबिहारी के प्रिय दही और दही से बनी वस्तुओं की मात्रा सर्दियों में कम कर दी जाएगी। ठंड के मौसम में ठाकुरजी को सर्दी ना लगे, इसलिए दूध और खीर में केसर की मात्रा बढ़ा दी जाएगी।

ठाकुरजी के लिए खासतौर पर कश्मीर से केसर मंगाया जाता है। शीतकालीन सेवा में बांकेबिहारी को दोपहर के राजभोग में तप्त कढ़ी, रसीली और सूखी दाल, गीली व सूखी सब्जी, मीठा रायता, सादा चावल, पंचमेवायुक्त केसरिया दूधभात, मिस्सी, अचार, पापड़, चटनी और मुरब्बा अर्पित किया जाता है। सर्दियों के दिनों में बांकेबिहारी मंदिर में ठाकुरजी को दिन भर में 4 बार इत्र से मालिश की जाती है।
कैसे पहुंचे बांकेबिहारी मंदिर
दिल्ली-NCR से आगरा एक्सप्रेसवे के जरिए आप जल्दी ही पहुंच सकते हैं। मथुरा-वृंदावन से दिल्ली-NCR सड़क मार्ग से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। अगर आप रेल मार्ग से मथुरा-वृंदावन जाना चाहते हैं, तो नजदीकी रेलवे स्टेशन मथुरा है। मथुरा से वृंदावन 14 किमी दूर है। मथुरा रेलवे स्टेशन से आपको किराए पर टैक्सी मिल जाएगी जो आपको सीधा वृंदावन बांकेबिहारी मंदिर पहुंचा दे।
आप चाहे तो मथुरा से बस द्वारा भी वृंदावन जा सकते हैं। वृंदावन बस स्टैंड से बांकेबिहारी मंदिर तक के लिए आप ई-रिक्शा किराए पर ले सकते हैं। बांकेबिहारी मंदिर का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट आगरा है, जो यहां से करीब 67 किमी दूर है।



Click it and Unblock the Notifications














