उत्तराखंड के दो प्रमुख पर्यटन स्थल - नैनीताल और कैंची धाम। ये दोनों शहर इन दिनों पार्किंग की समस्या से जुझ रहा है। खासतौर पर नैनीताल, जो एक प्रमुख पर्वतीय स्थल है, जहां सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में पर्यटक घूमने के लिए जाते हैं। खासतौर पर नवंबर और दिसंबर के महीने में, जब क्रिसमस और नववर्ष की छुट्टियां रहती हैं, नैनीताल और कैंची धाम में काफी पर्यटक बर्फिली पहाड़ियों और इसके खूबसूरत नजारों का लुत्फ उठाने के लिए जाते ही रहते हैं।
इतनी ज्यादा संख्या में पर्यटकों के आने की वजह से अब इन दोनों शहरों के लिए नयी चुनौतियां खड़ी हो गयी हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार इन जगहों पर स्थानीय और पर्यटकों की गाड़ियों को पार्क करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। बताया जाता है कि अधिकांश होटल और सार्वजनिक पार्किंग लॉट में अधिकतम 4000 गाड़ियों को ही खड़ी की जा सकती है। लेकिन पीक सीजन में पर्यटकों की अधिक संख्या की वजह से गाड़ियों की संख्या काफी पहले ही इससे ज्यादा हो चुकी है।
छुट्टियों और सप्ताहांत के दिनों में पर्यटकों की संख्या में कई गुना वृद्धि हो रही है। नतीजन नैनीताल की सड़कों पर जहां-तहां गाड़ियों को खड़ी कर दी जा रही है, जिससे ट्रैफिक जाम की बड़ी समस्या उत्पन्न हो रही है। यह समस्या तब और भी विकट हो जाती है, तब किसी पतली सड़क के किनारे कोई गाड़ी खड़ी कर दी जाती है।
पूरे क्षेत्र को पार्किंग की इस विकट समस्या से निजात दिलाने के लिए जिला प्रशासन वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रही है।
क्या हो सकते हैं पार्किंग के वैकल्पिक रास्ते?
Times of India की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार आसपास के इलाकों जैसे रानीबाग और काठगोदाम में अतिरिक्त पार्किंग की सुविधा के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। संभावना जतायी जा रही है कि पार्किंग की नयी सुविधा के शुरू होने के बाद करीब 2500 वाहनों को पार्क करने की सुविधा होगी। जिला प्रशासन को उम्मीद है कि पार्किंग की नयी जगहों के तैयार हो जाने से शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या से थोड़ी राहत जरूर मिलेगी।

इससे छुट्टियों में नैनीताल और कैंची धाम आने वाले पर्यटकों को भी पार्किंग की जगह ढूंढने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी। नैनीताल में पार्किंग के दबाव को कम करने के लिए पर्यटकों के वाहनों को पास के एक पर्वतीय शहर हल्द्वानी की ओर मोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है। अगर यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो पर्यटकों को हल्द्वानी में निर्धारित जगह पर अपनी गाड़ियों को पार्क करना पड़ेगा। इसके बाद हल्द्वानी से टैक्सी या बस लेकर नैनीताल तक का रास्ता उन्हें तय करना होगा।
क्या होगा इसका फायदा?
संभावना जतायी जा रही है कि इस पहल से नैनीताल में प्रवेश करने वाली गाड़ियों की संख्या में कमी आएगी। इससे ट्रैफिक का दबाव कम हो जाएगा। विशेष रूप से वैसे पर्यटन स्थलों पर जहां तक जाने का रास्ता पतली सड़कों से होकर गुजरता है। अगर इन सभी परियोजना को सटिकता के साथ लागू किया जा सका तो नैनीताल और कैंची धाम में पार्किंग की समस्या का काफी हद तक निवारण किया जा सकता है।



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