उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित दो प्रमुख इको-टूरिज्म (Eco-Tourism) स्पॉट पर एंट्री शुल्क लागू की गयी है। इन दोनों टूरिस्ट स्पॉट की देखरेख की जिम्मेदारी उत्तराखंड के वन विभाग की तरफ से की जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार अब 'टिफिन टॉप' और 'चाइना पीक' को देखने जाने वाले पर्यटकों को यहां फ्री में एंट्री नहीं मिलेगी बल्कि...
उन्हें एंट्री शुल्क चुकाने के बाद ही एंट्री करने दी जाएगी। बताया जाता है कि इस पहल की शुरुआत वन विभाग द्वारा इन संवेदनशील स्थलों पर साफ-सफाई और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को बनाए रखने के लिए, की गयी है।

इस बारे में मीडिया से बात करते हुए नैनीताल के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO), चंद्रशेखर जोशी ने कहा कि इन दोनों स्थानों पर एंट्री शुल्क लागू करने की सबसे ज्यादा जरूरत यहां बेहतर वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, खासतौर पर प्लास्टिक कचड़े के निपटारे के लिए, महसूस की गयी है।
पर्यटकों द्वारा इन संवेदनशील स्थलों पर प्लास्टिक कचड़ा फैलाना इन दिनों चिंता का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। एंट्री टिकट खरीदकर इन पर्यटन स्थलों पर प्रवेश करने का नियम लागू कर वन विभाग पर्यटकों में जिम्मेदारी वाला एहसास जगाना चाहता है ताकि वे प्राकृतिक परिवेश को साफ-सुथरा बनाए रखने में मदद करें।
मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार पर्यटकों को अब दोनों इको-टूरिज्म स्पॉट 'टिफिन टॉप' और 'चाइना पीक' को देखने के लिए ₹50 का शुल्क चुकाना पड़ेगा। हालांकि कुछ लोग वन विभाग के इस फैसले से नाखुश भी नजर आ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर किये गये विभिन्न पोस्ट में कहा जा रहा है कि 'चाइना पीक' की प्राकृतिक सुन्दरता अविश्वसनीय जरूर होती है लेकिन इसकी ट्रेकिंग बहुत कठिन होती है। बहुत कम संख्या में ही पर्यटक और ट्रेकर्स इस ट्रेक को पूरा करते हैं। ऐसे में यहां एंट्री शुल्क लगाना क्या सही फैसला है? क्या इस कठिन ट्रेक को करने वाले पर्यटक एंट्री शुल्क देने के लिए राजी होंगे?
उत्तराखंड में नैनीताल के अलावा और भी कई पर्वतीय शहर हैं, जो पर्यटकों की पसंदीदा पहाड़ी शहरों की लिस्ट में सबसे ऊपर रहते हैं। इनमें मसूरी, रानीखेत, ऋषिकेश और हरिद्वार आदि प्रमुख जगहें हैं, जहां न सिर्फ शांति और सुकून के पल बल्कि एडवेंचर गतिविधियां पसंद करने वाले पर्यटक भी बड़ी तादाद में आते रहते हैं।



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