किसी के लिए काशी भगवान को पाने का एक जरिया है तो किसी के लिए यह मोक्ष की नगरी है। कहा जाता है कि काशी में जीवन और मृत्यु दोनों ही शुभ है। भगवान शिव के त्रिशुल पर बसे इस नगर के कण-कण में शंकर का वास माना जाता है। लेकिन अब कुछ लोगों को काशी विश्वनाथ के दर्शन से वंचित रह जाना पड़ सकता है। हो सकता है कि...

लंबा सफर तय कर बड़ी आस से आप भगवान शिव के दर्शन करने के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर के तरफ बढ़े लेकिन मंदिर प्रबंधन के कर्मचारियों द्वारा आपको बीच रास्ते में ही रोक दिया जाए और काशी में विश्वनाथ मंदिर के दरवाजे से ही आपको बैरंग वापस लौटना पड़ जाए।
क्यों नहीं मिलेंगे महादेव के दर्शन
देसी हो या विदेशी वाराणसी आने वाले किसी भी पर्यटक से यह कभी पूछने की जरूरत नहीं पड़ती है कि क्या आप विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए जाएंगे? बल्कि उनसे यह पूछा जाता है कि अपने काशी प्रवास के दौरान आपने कितनी बार बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगायी है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है, कि सुबह-सुबह तैयार होकर, हाथों में बेलपत्र, फूल और भांग-धतुरे से भरी पूजा की थाली लेकर भोलेनाथ के दरबार से बिना उनका दर्शन किये वापस लौटना कैसा लगेगा? दरअसल, यह संभवना तभी उत्पन्न हो सकती है जब आप काशी विश्वनाथ मंदिर प्रबंधन द्वारा जारी ड्रेस कोड के आधार पर परिधान धारण किये बिना ही मंदिर में प्रवेश करने का प्रयास करते हैं।
किन्हें नहीं मिलेगी एंट्री
काशी विश्वनाथ मंदिर में उन लोगों (महिलाओं व पुरुषों दोनों) को ही एंट्री मिलेगी जिन्होंने शालीन और मर्यादित परिधान पहने होंगे। कुछ ऐसा ही संकेत हाल ही में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रोफेसर नागेंद्र पांडेय ने दिया है। अपने एक बयान में उन्होंने कहा कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक परिधान निर्धारित करने का फैसला लेने का प्रस्ताव न्यास की आगामी बैठक में रखा जाएगा।

हालांकि उन्होंने बैठक की तारीख नहीं बतायी लेकिन इतना बताया कि यह बैठक नवंबर में होगी। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने आने वाले भक्तों से अपील की है कि विश्वनाथ धाम में आने वाले श्रद्धालु शालीन और मर्यादित परिधान ही धारण करें। ऐसे परिधान जो देखने में अच्छे लगते हो।
किन्हें मिलेगी एंट्री
न्यास के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने कहा कि बाबा विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में पूजा करने आने वाले भक्तों के लिए ड्रेस कोड लागू करने पर विचार किया जा रहा है। गर्भगृह में दर्शन-पूजा के लिए पुरुषों के लिए धोती-कुर्ता और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि न्यास की अगली बैठक के बाद ही इस बारे में कोई फैसला लिया जाएगा।

पांडेय का कहना है कि पिछले काफी समय से स्थानीय निवासियों और भक्तों की तरफ से काशी विश्वनाथ मंदिर में भी ड्रेस कोड लागू करने की मांग उठायी जा रही है। दक्षिण भारत के तिरुमला तिरुपति मंदिर और मीनाक्षी अम्मन मंदिर के तर्ज पर अब काशी विश्वनाथ मंदिर में भी ड्रेस कोड लागू करने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।



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