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इस चैत्र नवरात्र कीजिये दुर्गा जी के म‍ंदिरों के दर्शन

आगामी 28 मार्च से चैत्र के नवरात्र शुरू होने जा रहे हैं..ऐसे में हम अपने लेख के जरिये बताने जा रहें देवी दुर्गा के खास मन्दिरों के बारे में

By Goldi

चैत्र के नवरात्र 28 मार्च से शुरू होने वाले हैं..इन दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों देवी दुर्गा के प्रसिद्ध मंदिरों में भारी संख्‍या में भक्‍तों का जमावाड़ा लगता है। जिनकी अपनी विशेषतायें हैं। बेहद अद्भुत लगता है दृश्य जब भक्त भगवान व देवी के चरणों में शरण मांगते हैं। वाकई यह आस्था का अनूठा संगम है जहाँ भगवान व् देवी के दर्शन के लिए दूर दूर से लोग, हर परेशानी को हरा के यहाँ पहुँचते हैं। साथ ही भगवान के दरबार में हाज़िरी भी लगाते हैं।

आमतौर में भारत में मां दुर्गा के लाखों मंदिर स्थित हा, लेकिन कुछ ऐसे मंदिर है जो अपने चमत्कारों के कारण प्रसिद्ध है। हमको आपको अपने आर्टिकल से बताने जा रहें हैं देवी दुर्गा के दस मन्दिरों के बारे में जहाँ का वातावरण बेहद अद्भुत है और जो पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान रखते हैं।

मां वैष्णोदेवी

मां वैष्णोदेवी

जम्मू के पास कटरा से माता वैष्णोदेवी के दर्शन के लिए यात्रा शुरू होती है। कटरा जम्मू से 50 किलोमीटर दूर है। कटरा की पहाड़ी से लगभग 14 किलोमीटर की पर्वतीय श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी पर विराजमान है मां वैष्णोदेवी का भवन। यहां देशभर से लाखों भक्त हर साल दर्शन के लिए आते हैं। खासकर नवरात्र के समय तो यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।PC: wikimedia.org

ज्वाला देवी मंदिर

ज्वाला देवी मंदिर

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कालीधार पहाड़ी के बीच बसा है ज्वाला देवी का मंदिर। मां ज्वाला देवी तीर्थ स्थल को देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ माना जाता है। शक्तिपीठ वह स्थान कहलाते हैं जहां-जहां भगवान विष्णु के चक्र से कटकर माता सती के अंग गिरे थे। शास्त्रों के अनुसार ज्वाला देवी में सती की जिह्वा गिरी थी।
PC: wikimedia.org

कामाख्या देवी मंदिर, गुवाहाटी

कामाख्या देवी मंदिर, गुवाहाटी

कामाख्या देवी मंदिर गुवाहाटी से तक़रीबन 8 किलोमीटर दूर कामाख्या में यह मंदिर स्तोत है जो असम की राजधानी दिसपुर के पास है। यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है, जिससे विशाल तांत्रिक महत्त्व जुड़ा हुआ है। यह मंदिर नीलाचल पर्वत पर बना हुआ है। यह हिन्दू धर्म के अनुसार 51 शक्तिपीठ में से एक है और सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में गिना जाता है।PC: wikimedia.org

नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश

नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश

नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में है। यह मंदिर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर मां के 51 शक्तिपीठ में से एक है। माना जाता है कि यहां पर मां सती की आंखे गिरी थी।
PC: wikimedia.org

करणी माता मंदिरः बीकानेर

करणी माता मंदिरः बीकानेर

करणी माता मंदिर को मूषक मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह राजस्थान के देशनोक में स्थित है। यहां अनगिनत चूहे रहते हैं। यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए हर वर्ष आते हैं।
PC: wikimedia.org

पूर्णागिरि,टनकपुर

पूर्णागिरि,टनकपुर

पुण्यागिरि या पूर्णागिरि स्थान अल्मोड़ा जिले के पीलीभीत मार्ग पर टनकपुर से आठ सौ मील पर नेपाल की सरहद पर शारदानदी के किनारे है। आसपास जंगल और बीच में पर्वत पर विराजमान हैं भगवती दुर्गा। इसे शक्तिपीठों में गिना जाता है।

मुम्बादेवी

मुम्बादेवी

महाराष्ट्र के प्रमुख महानगर मुंबई की मुम्बादेवी, कालबादेवी और महालक्ष्मी का मंदिर प्रसिद्ध है। महालक्ष्मी का मंदिर समुद्र तट पर, मुम्बादेवी के समीप तालाब है और कालादेवी का मंदिर अति प्राचीन माना जाता है।
PC: wikimedia.org

विन्ध्याचल,मीरजापुर

विन्ध्याचल,मीरजापुर

कंस के हाथ से छूटकर जिन्होंने भविष्यवाणी की थी वही श्रीविन्ध्यवासिनी हैं। यहीं पर भगवती ने शुंभ और निशुंभ को मारा था। इस क्षेत्र में शक्ति त्रिकोण है। क्रमश: विन्ध्यवासिनी (महालक्ष्मी), कालीखोह की काली (महाकाली) तथा पर्वत पर की अष्टभुजा (महासरस्वती) विराजमान हैं।
PC: wikimedia.org

अधर देवी मंदिर, माउंट आबू

अधर देवी मंदिर, माउंट आबू

राजस्थान का एक मात्र खूबसूरत हिल स्टेशन माउंट आबू जितना की अपनी खूबसूरती और ठंडी जलवायु के लिए जाना जाता है उतना ही यह अधर देवी मंदिर के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है। अधर देवी दुर्गा के नौ रूपों में से एक कात्यायनी का रूप हैं। जो देश की 52 शक्तिपीठों में छठा शक्तिपीठ में गिना जाता है। जहाँ भगवान शिव के तांडव के समय माता पार्वती का अधर यहीं गिरा था।

दुर्गा मंदिर, वाराणसी

दुर्गा मंदिर, वाराणसी

दुर्गा मंदिर वाराणसी का यह भव्य मंदिर माता दुर्गा को समर्पित है। माना जाता है की यह मंदिर 18 वीं शताब्दी में निर्माण गया था जिसे बंगाल की एक रानी ने बनवाया था। इस मंदिर में एक दुर्गा कुण्ड है जो इस मंदिर का अहम हिस्सा है। नवरात्र में यह मंदिर देखने योग्य होता है। इस मंदिर की साज-सज्जा ऐसी होती है जैसे मानों नई नवेली दुल्हन हो।
PC: wikimedia.org

दंतेश्वरी देवी का मंदिर, दंतेवाड़ा

दंतेश्वरी देवी का मंदिर, दंतेवाड़ा

माता के 51 शक्तिपीठों में से एक यह मंदिर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में स्थित है। पुराणों के अनुसार यहां मां सती के दांत गिरे थे, तभी से यहां मंदिर के रूप में उनके दांतों को पूजा जाता है। यहां दशहरा उत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।PC: wikimedia.org

सिरसंगी काली माता मंदिर,बेलगाम

सिरसंगी काली माता मंदिर,बेलगाम

कर्नाटक के बेलगाम जिले से इस मंदिर की दूरी 20 किलोमीटर है। यहां काली माता को पूजा जाता है ये मुर्ति भक्तों को आकर्षित करने वाली है और यहां नवरात्रों में भक्तों का ताता लग जाता है।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर-कोलकाता

दक्षिणेश्वर काली मंदिर-कोलकाता

दक्षिणेश्वर काली मंदिरः पश्चिम बंगाल में कोलकाता के पास हुगली नदी के किनारे बना दक्षिणेश्वर काली मंदिर देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां नवरात्रि के समय लाखों भक्तों का तांता लगा रहता है। हर सभी की हर मनोकामना पूर्म करती है।PC: wikimedia.org

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