आपने गंगा नदी के बारे में ऐसा जरूर सुना होगा, कि भारत में उसे गंगा तो बांग्लादेश में उसे पद्मा नदी के नाम से जाना जाता है। लेकिन क्या आपने किसी ऐसे जंगल के बारे में सुना है जो दो राज्यों में फैला हुआ है और दोनों राज्यों में उसे अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। जी हां, दो राज्यों के बीच स्थित एक जंगल लेकिन दोनों राज्यों में उसका नाम अलग-अलग।

हम बात कर रहे हैं कर्नाटक और केरल के बॉर्डर पर स्थित मधुमलाई और बांदीपुर नेशनल पार्क की। यह नेशनल पार्क केरल से शुरू होकर कर्नाटक तक फैला हुआ है। दोनों राष्ट्रीय उद्यान ही बाघ अभयारण्य हैं। हाल ही में आयी रिपोर्ट के अनुसार दोनों नेशनल पार्क में 100 से ज्यादा बाघ हैं।
पहले आपको बांदीपुर नेशनल पार्क के बारे में बताते हैं :

- बांदीपुर नेशनल पार्क दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक में स्थित है।
- किसी समय यह मैसुर के राजा का निजी शिकारगाह हुआ करता था। उस समय यहां धड़ल्ले से शेर और चीतों का शिकार किया जाता था, जिससे उनका अस्तित्व ही मुश्किल में पड़ गया था।
- वर्ष 1931 में मैसुर के ही राजा ने इसे वेणुगोपाल वन्यजीव पार्क का नाम देकर अभयारण्य घोषित किया। उस समय यह 90 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ था।
- 1973 में जब इसे प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत शामिल किया गया तो इसका क्षेत्रफल बढ़ाकर 800 वर्ग किमी किया गया और इसे एक नया नाम बांदीपुर नेशनल पार्क भी दिया गया।
- इस नेशनल पार्क में 200 से अधिक प्रकार के पक्षियों की प्रजातियां निवास करती हैं। पशु-पक्षी और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
- यहां हरे कबूतर, हॉर्नबिल, ब्राउन हॉक आउल, नीलगिरी, फ्लाईकैचर, मकड़ी शिकारी, मालाबार ट्रोगन, ग्रे हेडेड फिश ईगल, रेड हेडेड गिद्ध और भी कई प्रकार के पक्षियों का घर है।
- इस अभयारण्य में बाघ, तेंदुआ, हाथी, भालू, ढोल, सांबर, चीतल, हिरण, स्लॉथ, चीतल, जंगली सुअर, अजगर, हाइना, भौंकने वाले हिरन और भी कई प्रकार के पशु मौजूद है।
- हाल ही में आयी रिपोर्ट के अनुसार इस अभयारण्य में 3000 से ज्यादा एशियाई हाथी और 150 रॉयल बंगाल टाइगर बांदीपुर नेशनल पार्क में मौजूद है।
कैसे पहुंचे बांदीपुर नेशनल पार्क और समय :

बांदीपुर नेशनल पार्क मैसूर से 80 किमी, ऊटी से 70 किमी और बैंगलोर से 215 किमी की दूरी पर है। यह राष्ट्रीय उद्यान कर्नाटक के चमारजनगर जिले में मौजूद है। आप ऊटी या मैसुर के अपने ट्रिप में इस नेशनल पार्क की सफारी को आसानी से शामिल कर सकते हैं। मैसुर से ऊटी जाने वाले पर्यटक इस नेशनल पार्क के बीच में से होकर ही गुजरते हैं। हालांकि यहां अक्सर गाड़ियों से टकराकर जानवरों के मरने की कई खबरें आती रहती हैं। इसलिए सुबह के समय और शाम को सुरज ढलने के बाद इस रास्ते पर यातायात को बंद कर दिया जाता है। यह नेशनल पार्क सैलानियों के लिए सुबह 10 बजे से शाम को 6 बजे तक खुला रहता है।
अब इसके दूसरे हिस्से यानी मधुमलाई नेशनल पार्क के बारे में बताते हैं :

- मधुमलाई नेशनल पार्क तमिलनाडू के नीलगिरी जिले में स्थित है, जो केरल और कर्नाटक दोनों राज्यों से अपनी सीमाएं शेयर करता है।
- यह नेशनल पार्क भी बाघ अभयारण्य है जिसकी स्थापना 1940 में की गयी थी।
- मधुमलाई और बांदीपुर नेशनल पार्क के बीच से होकर गुजरने वाली मोयार नदी दोनों राष्ट्रीय उद्यानों को अलग करती है।
- मधुमलाई नेशनल पार्क में पशु की 55 प्रजातियां, पक्षियों की 227 प्रजातियां, मछलियों की 50 प्रजातियां, सरीसृप की 34 प्रजातियां और उभयचर की 21 प्रजातियां पायी जाती हैं।
- भारत में पक्षियों की जितनी प्रजातियां पायी जाती हैं उनमें से 80% प्रजातियां सिर्फ मधुमलाई नेशनल पार्क में ही पायी जाती है।
- इस नेशनल पार्क में मालाबार ट्रॉगन, ग्रे हॉर्नबिल, क्रेस्टिड हॉक ईगल, क्रेस्टिड सरपेंट ईगल जैसी पक्षियों की प्रजातियां नजर आती हैं।
- यहां लंगूर, बाघ, हाथी, उड़ने वाली गिलहरियां, हाथी, सांभर, चीतल, हिरन आदि कुछ आसानी से नजर आने वाले पशु हैं।
- इस नेशनल पार्क में कई वनस्पतियों और जन्तुओं की दुर्लभ प्रजातियां भी मौजूद हैं।
कैसे पहुंचे मधुमलाई नेशनल पार्क

मधुमलाई नेशनल पार्क कोयंबटूर नेशनल पार्क से सिर्फ 128 किमी दूर है। यह नेशनल पार्क उदगमंडलम से 67 किमी की दूरी पर है। चेन्नई व तमिलनाडू के दूसरे शहरों से रेल मार्ग से यह नेशनल पार्क सीधे जुड़ा हुआ है। उदगमंडलम रेलवे स्टेशन से यह नेशनल पार्क सिर्फ 42 किमी की दूरी पर है।



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