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दक्षिण भारत के खास मन्दिरों में भगवान विष्णु के कछुया अवतार की होती है पूजा

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हिंदू पौराणिक कथाएं भगवान की आकर्षक कहानियों और उनके अवतारों से भरी हुई हैं। बचपन से ही हम भगवानों के विचित्र अवतारों के बारे में सुनते आयें हैं, जिसमे उन्होंने मानवों को दानवों से बचाने के लिए भिन्न भिन्न अवतार लेकर उनका विनाश किया है।

यूं तो देवी देवतायों ने कई अवतार लिए है, जिनमे भगवान विष्णु सबसे प्रमुख है, जो अधर्म का नाश करने के लिए कई बार अवतरित हुए, हम उनके अवतारों से रूबरू है, लेकिन शायद ही आप जानते होंगे कि, उन्होंने असुरों का नाश करने के लिए कछुए का भी अवतार लिया था। बताया जाता है कि, कुर्मा अवतार या कछुए का रूप भगवान विष्णु का दूसरा अवतार है।

किंवदंती यह है कि, जब अमृत पाने के देवतायों ओ असुरों के बीच क्षीरसागर के समुद्रमंथन के दौरान मंदार पर्वत अच्छे से घूम नहीं पा रहा था, तब भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार लेकर मंदार पर्वत को अपने कवच पर संभाला था।

भगवान विष्णु का यह कुर्मा अवतार अनोखा है, इतना ही नहीं खास बात यह है कि भगवान के इस खास अवतार की पूजा भारत में की जाती है, जिसके खास मंदिर यहां स्थापित है

श्री कुरमाम मंदिर

श्री कुरमाम मंदिर

श्री कुरमाम मंदिर भारत के मुख्य विष्णु मंदिरों में से एक है जहां भगवान विष्णु की कछुए के रूप में पूजा की जाती है। माना जाता है कि, श्री रामानुजचर्य ने श्रीकाकुलम में इस मंदिर की स्थापना की थी। किंवदंती हमें बताती है कि कृता युग में, भगवान विष्णु श्वेत महाराज की तपस्या से प्रसन्न होकर कुर्मान के रूप में प्रकट हुए थे।

मंदिर के पास स्थित पवित्र तालाब का निर्मण भगवान ब्रह्मा द्वारा बताया जाता है। श्री कुरमाम मंदिर दक्षिण भारत में स्थित विष्णु मंदिरों में से एक है। यहां भगवान विष्णु की मूर्ति एक बड़ा सलीग्राम है और यह इस क्षेत्र में सबसे प्रतिष्ठित देवताओं में से एक है। श्री कुरमम मंदिर आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम के बाहरी इलाकों में स्थित है।Pc:Unknown

गवी रंगपुरा

गवी रंगपुरा

गवी रंगापुर चित्रदुर्ग में होसदुर्गा शहर के पास एक छोटा गांव है। यह गांव गवी रंगनाथ स्वामी के लिए प्रसिद्ध है जहां भगवान विष्णु को कछुए के रूप में पूजा जाता हैं।

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गवी रंगनाथ स्वामी मंदिर एक गुफानुमा मंदिर है, जो समय के साथ पूरे मंदिर परिसर में तब्दील हो गया है, इस मंदिर में भगवान विष्णु की कुर्मवथारा के रूप में पूजा की जाती है। इस मंदिर में मुख्य देवता की मूर्ति एक कछुए की है।

कुर्माई मंदिर

कुर्माई मंदिर

कुरमाई गांव चित्तौड़ में कुरम वाधिरजा स्वामी मंदिर के लिए जाना जाता है। इस स्थान को नाम भगवान विष्णु क कुरमा अवतार से लिया गया है । यह पवित्र स्थान शिव मंदिर के लिए भी प्रसिद्ध है जो कि दक्षिण भारत के सबसे बड़े शिव लिंगों में से एक है। श्री कुरमा वरुद्राजा स्वामी मंदिर प्राचीन मंदिरों में से एक है।

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यह आंध्र प्रदेश में स्थित प्रसिद्ध विष्णु मंदिरों में से एक है। श्रीकाकुलम में श्री कुरमम मंदिर, होसदुर्गा में गवी रंगनाथ स्वामी मंदिर और चित्तौड़ में श्री कुरमा वरुधराजा स्वामी मंदिर तीन प्रमुख मंदिर हैं जहां भगवान विष्णु को कछुए के रूप में पूजा की जाती है।

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