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जन्नत से कम नहीं है कर्नाटक का कुद्रेमुख, ये स्थान हैं सबसे खास

प्रकृति विभिन्न रूपों में अपनी अनमोल खूबसूरती के साथ विद्यमान है। पहाड़, नदी-घाटी, झरने ये सब कुदरत के द्वारा इंसानों को दिए गए बहुमुल्य तोहफे हैं। जिनकी कीमत पैसों से नहीं लगाई ज सकती। प्रकृति के करीब जाकर आप जितना सुकून का अनुभव कर सकते हैं उतना आनंद किसी विलासी वस्तु में कभी नहीं मिलेगा। वैसे जब बात प्राकृतिक खबसूरती की हो तो भारत को भूलाया नहीं जा सकता है। विविधताओं के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध भारत वैश्विक पर्यटन के रूप में उभरा है।

लाखों की तादाद में दुनिया भर के सैलानी हर साल यहां तक का सफर तय करते हैं। भौगोलिक दृष्टि से भारत एक खूबसूरत और काफी महत्वपूर्ण देश है। आइए जानते हैं यहां के अनमोल प्राकृतिक खजाने में से एक बहुमुल्य मोती 'कुद्रेमुख' के बारे में। एक घोड़े के चेहरे की आकृति वाला यह पर्यटन गंतव्य दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य का एक खूबसूरत हिल स्टेशन है।

अपनी पहाड़ी चोटी, ट्रेकिंग एडवेंचर और नैसर्गिक खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध यह स्थल राज्य के चिकमंगलूर जिले का हिस्सा है। कुद्रेमुख हर तरह के सैलानियों का स्वागत करता है। आइए जानते हैं इन गर्मियों आप कुद्रेमुख के कौन-कौन से खास स्थानों का भ्रमण कर सकते हैं। 

कुद्रेमुख पीक ट्रेक

कुद्रेमुख पीक ट्रेक

PC-Ramesh Desai

कुद्रेमुख का सबसे मुख्य आकर्षण यहां की कुद्रेमुख चोटी है, जो दूर-दूराज के ट्रैवलर्स-ट्रेकर्स को आने का आमंत्रण देती है। समुद्र तल से 1894 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कुद्रेमुख पीक साहसिक पहाड़ी रास्तों, वनस्पतियों और अनौपचारिक विविधता के साथ ट्रेकर और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग मानी जाती है। इस चोटी से देखे गए प्राकृतिक दृश्यों का कोई जवाब नहीं।

खासकर इस चोटी से अरब सागर को ढके अनंत आकाश और बादलों को देखना काफी रोमांच भरा है। चोटी तक पहुंचने का ट्रेकिंग रूट भी काफी रोमांचक है, जो ट्रेकर्स को काफी आनंदित करने का काम करता है। यह चोटी कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान में स्थित है।

कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान

कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान

PC- Karunakar Rayker

हरे-भरे पहाड़ों के मध्य स्थित कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान अपने प्राकृतिक खजाने के लिए काफी लोकप्रिय है। 600 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला यह राष्ट्रीय उद्यान राज्य में सबसे अच्छी तरह से संरक्षित राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है, जिसे 1987 में नेशनल पार्क घोषित किया गया था। ट्रेंकिग मार्ग, विभिन्न वनस्पति, जंगली जीव व अन्य कुदरती खजाने से सजा यह उद्यान एक आदर्श वन्य क्षेत्र है।

यह स्थान प्रकृति प्रेमियों से लेकर एडवेंचर के शौकीनों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं। रोमांचक एहसास पाने के लिए दूर-दराज से पर्यटक यहां तक का सफर तय करते हैं। आप वन्य जीवों में बाघों, तेंदुआ और जंगली कुत्तों जैसे स्तनधारियों को देख सकते हैं।

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हनुमान गुंडी फॉल्स

हनुमान गुंडी फॉल्स

PC- Jesjose

पहाड़ियों और उद्यानों से अलग आप कुद्रेमुख में हनुमान गुंडी फॉल्स की सैर का आनंद ले सकते हैं। हनुमान गुंडी फॉल्स को सुथानाबे फॉल्स या सुथानबी फॉल्स भी कहा जाता है, जो कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले के कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान के पहाड़ी परिवेश में स्थित है। यह जलप्रपात राष्ट्रीय उद्यान में करकला और लक्ष्या बांध के बीच मौजूद है। इस फॉल्स की ऊंचाई लगभग 3,268 फीट है। यहां पानी 22 मीटर की ऊंचाई से गिरता है।
मैंगलोर से यहां तक की दूरी मात्र 79 किमी रह जाती है। गर्मी से राहत पाने के लिए यह फॉल्स एक आदर्श गंतव्य है। अगर आप कुद्रेमुख आएं तो यहां का अनुभव जरूर लें।

कलासा

कलासा

PC- Wind4wings

कर्नाटक के चिकममागलुरु जिले में स्थित कलासा एक खास पर्यटन स्थल है जिसे मंदिरों का शहर भी कहा जाता है। यह धार्मिक नगर भद्रा नदी के किनारे स्थित है। इस स्थल की उत्पत्ति के पीछे पौराणिक और व्युत्पत्ति दोनों कारण बताए जाते हैं। वर्षावन से घिरा हुआ यह स्थल प्राकृतिक और आध्यात्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां के स्थानीय लोग ज्यादातक किसान हैं जिनके खेत खलिहान भद्रा नदी पर ही निर्भर है।

यहां की मिट्टी बहुत ही उपजाऊ है जो अच्छी कॉफी और अन्य जड़ी बूटियों के उत्पादन के लिए आदर्श है। इसके अलावा इसके अलावा यह स्थान गुफा में स्थित देवी भगवती के मंदिर और एक वरहा के लिए भी जाना जाता है। इसके अलावा कलासा श्री कालेश्वर मंदिर का घर है जो भगवान शिव को समर्पित है।

होरानाडू

होरानाडू

PC- Kgpramod2

उपरोक्त स्थानों के अलावा आप कर्नाटक के होरानाडू स्थल की सैर का भी आनंद ले सकते हैं। यह एक धार्मिक स्थान है जो आदि-शक्तिमका श्री अन्नपुर्णेश्वरी मंदिर के लिए जाना जाता है। हिन्दू आस्था का केंद्र यह स्थान दूर दराज के तीर्थयात्रियों और भक्तों को आकर्षित करता है।

यह मंदिर श्री अन्नपुर्णेश्वरी को समर्पित है, जिनके स्वरूप को मंदिर के भीतर एक शुद्ध सोने की मूर्ति द्वारा दर्शाया गया है। माना जाता है कि श्री अन्नपुर्णेश्वरी की पूजा करने से भक्तों का भोजन का आशीर्वाद मिलता है।अद्भुत : केरल के कोडुंगल्लूर भागीरथी मंदिर से जुड़ी अजीबोगरीब प्रथाएं




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