» »सबकुछ भूल कर झुमने को तैयार हो जाएँ...जीरो म्यूजिक फेस्टिवल में

सबकुछ भूल कर झुमने को तैयार हो जाएँ...जीरो म्यूजिक फेस्टिवल में

Written By: Goldi

हर साल की तरह इस साल भी वो टाइम आ गया जब पूर्वोत्तर भारत का अरुणाचल प्रदेश फिर से संगीतमय हो जायेगा। हर कोई इस म्यूजिक फेस्टिवल का दीवाना हो चुका है।

मांडवी, वो बंदरगाह जो ट्रैवल के शौक़ीन किसी भी ट्रैवलर के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं

आइये पहले जानते हैं कि आखिर जीरो फेस्टिवल है क्या?
2012 में संगीतकारों बॉबी हनो और अनूप कुट्टी द्वारा शुरू किया गया, ज़ीरो फेस्टिवल वर्तमान में अपने पांचवें संस्करण में एक वार्षिक आउटडोर संगीत कार्यक्रम के रूप में उभर रहा है।

मदर नेचर के बेस्ट रूप को देखना है तो कीजिये अरूणाचल स्थित जाइरो के इन स्थानों का दौरा

यह भारत में अद्भुत स्वतंत्र संगीत दृश्य का एक अलग प्रकार का उत्सव है। शुरूआती क्षेत्रीय संगीतकारों को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में शुरू किया गया था, अब इस फेस्टिवल में विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बैंड भी हिस्सा लेते हैं। यदि आप संगीत में सब कुछ भूलकर झूमना चाहते हैं तो अपना बैग पैक करिये और निकल पड़िए जीरो फेस्टिवल का हिस्सा बनने।

दुनिया से अलग

दुनिया से अलग

अगर आप खुद के साथ कुछ पल शांति के बिताना चाहते हैं, तो जीरो आपके लिए एक बेस्ट जगह है..यह घाटी शहर के कोलाहल से बहुत दूर है, जहां आप खुद के साथ आत्म चिन्तन कर सकते हैं।

pc:Ashwani Kumar

कोई पागल भीड़ नहीं

कोई पागल भीड़ नहीं

म्यूजिक फेस्टिवल यानी लाखो लोगो की भीड़ लेकिन इस फेस्टिवल में आपको लाखो पागल लोगो की भीड़ नहीं मिलेगी। यहां आप सामंजस्यपूर्ण संगीत का आनंद ले सकते हैं।PC:Tauno Tõhk / 陶诺

रोमांचक रोड ट्रिप

रोमांचक रोड ट्रिप

रोड ट्रिप किसे पंसद नहीं होती, और फिर जब रोड ट्रिप बादलों से होते हुए पेड़ों के बीच हो फिर तो कहने ही क्या। पूर्वोत्तर में घुमावदार सड़कों पर गाड़ी चलाने का एक अलग ही अनुभव होता है..यकीन मानिए यहां एन्जॉय की गयी रोड ट्रिप आप कभी नहीं भूलेंगे। PC: Krish9

सिमित बजट

सिमित बजट

अगर आप सोच रहे हैं कि, जीरो की यात्रा करने के लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे तो आप गलत है, क्योंकि आप इस ट्रिप को महज 15 हजार में अच्छे से एन्जॉय कर सकते हैं।

स्थानीय आतिथ्य का आनंद लें

स्थानीय आतिथ्य का आनंद लें

यहां के लोग से लोग बेहद नर्म और सौहार्दपूर्ण होने के लिए जाने जाते हैं, और आप जीरो में इस चीज का अनुभव कर सकते हैं।

नये लोगो से मिले...अपटानी जनजाति

नये लोगो से मिले...अपटानी जनजाति

अगर आपको नये लोगो से मिलना जुलना अच्छा लगता है,तो यहां आप नये लोगो से मिल सकते हैं...जो एकदम अलग दुनिया में हैं..यहां आप अपटानी जनजाति के लोगों से मिल सकते हैं, जो कि उनके अद्वितीय नाक पियर्सिंग और फेशियल टैटू के लिए जाने जाते हैं। यदि आपको भोजन के लिए आमंत्रित किया जाता है, तो प्रस्ताव को अस्वीकार नहीं करें और उनके अतिथि सत्कार का लुत्फ उठायें।PC: Doniv79

पूर्वोत्तर व्यंजनों का स्वाद ले

पूर्वोत्तर व्यंजनों का स्वाद ले

अगर आप पूर्वोतर में हैं और वहां के खाने का स्वाद नहीं चखा तो आपकी यात्रा अधूरी है...यहां आप लजीज व्यंजन खा सकते हैं...जैसे फ्राइड मेढ़क, भुना हुआ चूहा आदि।इसके अलावा आप यहां सूयर का मांस भी चख सकते हैं।PC:Jit.roy.chowdhury

बीयर

बीयर

अभी तक आपने कांच के ग्लासेज में बियर का स्वाद चखा होगा लेकिन जीरो में आप बियर का स्वाद बांस के ग्लासेज में ले सकते हैं..यकीनन यह अनुभव आपके लिए नया होगा।

कब है त्यौहार

कब है त्यौहार

सितंबर 28-अक्टूबर 1, 2017

कैसे पहुंचें

कैसे पहुंचें

तेजपुर निकटतम हवाई अड्डा है, लेकिन गंगटोक जीरो के ज्यादा नजदीक है। आप गुवाहाटी तक ट्रेन से भी जा सकते हैं आपके आगे की यात्रा के लिए निजी बस और टैक्सी उपलब्ध हैं।

ज़ीरो में कहां रहें

ज़ीरो में कहां रहें

त्यौहार स्थल में और आसपास के तम्बू के साथ-साथ कैंपिंग स्थल भी हैं। वैकल्पिक रूप से, आप ज़िरो में कई होटलों और घरों से चुन सकते हैं सीआईआईआरओ रिसॉर्ट 840 रुपये प्रति रात में एक अच्छा विकल्प है।

इनर लाइन परमिट

इनर लाइन परमिट

अरुणाचल प्रदेश की यात्रा के लिए भारतीय पर्यटकों को इनर लाइन परमिट की जरूरत होती है।इनर लाइन परमिट रेसिडेंट टुरिज़्म ऑफ़िस, गुवाहाटी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, गुवाहाटी में असम प्रयातन भवन, दिल्ली में अरुणाचल भवन, कोलकाता में अरुणाचल भवन, या 200 रुपये के शुल्क के लिए नहरलागुन रेलवे स्टेशन से प्राप्त किया जा सकता है। तस्वीरों और पहचान का एक प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय परमिट: अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों को संरक्षित क्षेत्र परमिट की आवश्यकता है। त्योहार के आयोजकों ने आप $ 70 की फीस के लिए ये व्यवस्था करने में मदद की है।

Please Wait while comments are loading...