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कहीं होती होती है दुर्गा पूजा, तो कहीं खेला जाता है गरबा तो कहीं बिना रावण दहन के मनाया जाता है दशहर

Posted By: Namrata Shatsri

शारदीय नवरात्र 2017 शुरू हो चुके हैं..भारत में अन्य त्योहारों की तरह नवरात्र और दशहरा को बड़े ही हर्षौल्लास के साथ मनाया जाता है। ये पर्व मां दुर्गा के नौ स्‍वरूपों जैसे मां लक्ष्‍मी, मां सरस्‍वती और मां स्‍कंदमाता आदि को समर्पित है।
भारत में ना केवल भौगोलिक विविधता देखने को मिलती है बल्कि यहां पर अनेक संस्‍कृति और धर्म के लोग भी रहते हैं जो सालभर में कई तरह के त्‍योहार मनाते हैं लेकिन अलग-अलग तरीके से।

शारदीय नवरात्र 2017: जहां माता की मर्जी के बिना नहीं होते किसी को दर्शन

कुछ त्‍योहार विशेष रूप से किसी एक क्षेत्र में मनाए जाते हैं जबकि नवरात्र और दशहरा ऐसे त्‍योहार हैं जिन्‍हें देशभर में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। तो चलिए जानते हैं कि भारत के विभिन्‍न हिस्‍सों में दशहरे और नवरात्र के त्‍योहार को किस तरह से मनाया जाता है। जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें

हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश में नवरात्र के दसवें दिन त्‍योहार मनाया जाता है। अन्‍य देशों से अलग यहां पर नवरात्र के समापन पर उत्‍सव मनाया जाता है। हिमाचल में नवरात्र को कुल्‍लू दशहरा के नाम से भगवान राम के बुराई पर अच्‍छाई की जीत की खुशी में अयोध्‍या लौटने पर मनाया जाता है। इस त्‍योहार पर सात दिन तक कुल्‍लू की सड़कों पर रघुनाथजी की रथ यात्रा भी निकलती है।PC:Kondephy

कर्नाटक

कर्नाटक

कर्नाटक में नवरात्र को नादाहब्‍बा भी कहा जाता है जिसका मतलब होता है क्षेत्रीय त्‍योहार। इस त्‍योहार को राक्षस महिषासुर का वध करने पर मां दुर्गा के लिए मनाया जाता है। यहां पर दसवें दिन विजयादशमी का त्‍योहार भी मनाया जाता है।

इस त्‍योहार की शुरुआत विजयनगर साम्राज्‍य के शासकों ने की थीं और आज भी इस राज्‍य में उतनी ही धूमधाम से इस त्‍योहार को मनाया जा रहा है। इसके अलावा कर्नाटक के मैसूर का दशहरा काफी लोकप्रिय है..जिसे लोग दूर दूर से देखने पहुंचते हैं।

PC: Navrooz Singh

केरल

केरल

केरल में नवरात्र का आयोजन ज्ञान की देवी सरस्‍वती जी के साथ-साथ मां दुर्गा और देवी लक्ष्‍मी का पूजन किया जाता है। केरल में इन नौ दिनों को कुछ नया सीखने और किसी नए काम की शुरुआत के लिए बेहत शुभ माना जाता है।

नवरात्र के आखिरी तीन दिनों में यहां मां सरस्‍वती का पूजन किया जाता है और उनकी तस्‍वीर के आगे किताबें और ज्ञान से संबंधित अन्‍य वस्‍तुएं अर्पित की जाती हैं। नवज्ञ9 के दसवें दिन और विजयदशमी पर भगवान गणेश को मंत्र लिखकर आमंत्रित किया जाता है।pc:official site

महाराष्‍ट्र

महाराष्‍ट्र

महाराष्‍ट्र राज्‍य में ये पर्व नई शुरुआत की ओर संकेत करता है। यहां पर महिलाएं लकड़ी के पाटे पर तांबे या पीतल के जार में पानी भरकर उसके ऊपर चावलरखकर दीया जलाती हैं जोकि शांति और ज्ञान का प्रतीक है और जार बेहतर खेती का प्रतीक है। अन्‍य राज्‍यों की तरह अयुध पूजन में वाहन, उपकरण और शस्‍त्र आदि को की पूजा की जाती है।

PC: DoshiJi

तेलंगाना

तेलंगाना

नवरात्र के नौ दिनों में तेलंगाना के लोग खासतौर पर महिलाएं बथुकम्‍मा का त्यौहार मनाती हैं। इसमें महिलाएं मां दुर्गा, देवी सरस्‍वती और मां लक्ष्‍मी को फूल अर्पित करती हैं। बाद में इन फूलों को किसी नदी या तालाब में प्रवाहित कर दिया जाता है।PC:Karun138

तमिलनाडु

तमिलनाडु

नवरात्र में तमिलनाडु राज्‍य में एक खास परंपरा के तहत कर्नाटक और आंध्र पद्रेश में इसे गुड़ियों का त्यौहार कहा जाता है। इन जगहों पर ये त्‍योहार बोम्‍माई कोलू के नाम से प्रसिद्ध है। गुड़ियों में देवी-देवता, पशु, पक्षी और किसान की मूर्तिंयों को इकट्ठा किया जाता है। लोग अपने घरों में इनगुड़ियों को अलग थीम के अनुसार सजाते हैं और अपने घरों पर कोलू को देखने के लिए अपने दोस्‍तों और रिश्‍तेदारों को आमंत्रित करते हैं। PC:Bootervijay

पंजाब

पंजाब

पंजाब के अधिकतर हिस्‍सों में हिंदू धर्म के लोग प्रथम नवरात्र से सात दिनों तक उपवास रखते हैं। आठवें दिन यानि अष्‍टमी पर नौ छोटी कन्‍याओं को भोजन कराने के बाद व्रत खोला जाता है। ये नौ कन्‍याएं मां दुर्गा के नौ स्‍वरूप मानी जाती हैं।
PC:Mahbubur Rahman Khoka

गुजरात

गुजरात

गुजरात में नवरात्र प्रमुख त्‍योहारों में से एक है। यहां पर लोग मिट्टी के करवे से गरबा खेलते हैं।

गरबा एक लोक नृत्‍य है जिसका आयोजन नवरात्र के नौ दिनों में किया जाता है। इसमें लोग हाथ में छोटी छड़ी लेकर डांस करते हैं जिसे डांडिया कहा जाता है। इस त्‍योहार में सभी धर्म, जाति और लिंग के लोग हिस्‍सा लेते हैं।PC:anurag agnihotri

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में नवरात्र का पर्व दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है। बंगाली हिंदुओं का यह एक प्रमुख त्‍योहार है। इस त्‍योहार पर राज्‍य में सड़कों, मैदान और मंदिरों में अनेक पंडाल और स्‍टेज सजाए जाते हैं।

दुर्गा पूजा का सबसे महत्‍वूपर्ण दिन छठा और षष्‍ठी होता है जिस पर भक्‍त देवी का स्‍वागत करते हैं और मिट्टी से बनी मूर्ति की आंखे खोलने की विधि पूरी की जाती है। इसे त्‍योहार की शुरुआत भी कहा जाता है। सातवें दिन यानि सप्‍तमी, अष्‍टमी और नवमी को मां दुर्गा के साथ देवी लक्ष्‍मी, सरस्‍वती और गणेश जी और कार्तिकेय जी की भी पूजा की जाती है। इसके बाद दसवें दिन विजयादशमी का भव्‍य आयोजन किया जाता है और इस दिन माता की मूर्ति का विसर्जन भी किया जाता है।

PC: Srijan Kundu

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