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श्रीखंड महादेव: देवलोक तक की सबसे दुर्गम और दिव्य यात्रा!

महादेव को पूरी सृष्टि के रचयिता के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि उन्हीं की शक्ति और इच्छा से इस सृष्टि की रचना हुई है। देवों के भी देव महादेव की कई सारी पौराणिक कथाएँ हिंदू शास्त्रों और ग्रंथों में प्रचलित हैं। उनके दर्शन के लिए अमरनाथ की यात्रा सबसे दुर्गम और कठिन यात्रा मानी जाती है। पर इससे भी एक कठिन यात्रा है महादेव के साक्षात दर्शन करने के लिए, जो है श्रीखंड महादेव की यात्रा।

जी हाँ, हम बात कर रहे हैं हिमालय पर्वत की उँची चोटियों में स्थापित श्रीखंड महादेव की, जहाँ लगभग 18500 फीट उँचाई की यात्रा सबसे कठिन और पवित्र यात्रा है। चलिए, आज इसी कठिन रास्ते को पार कर चलते हैं देवों के देव महादेव के दिव्य दर्शन करने।

Shrikhand

श्रीखंड महादेव

Image Courtesy: Himalayan Panoramic Studio

अमरनाथ की कठिन यात्रा में आपको खच्चर पर बैठ यात्रा की सुविधा उपलब्ध होती है, पर श्रीखंड महादेव यात्रा के रास्ते इतने मुश्किल हैं कि, वहाँ कोई खच्चर या किसी और सवारी की यात्रा कर नहीं पहुँच सकते। 35 किलोमीटर की दूरी ट्रेक द्वारा ही अपने आप श्रद्धालुओं को पूरी करनी होती है। श्रीखंड हिमाचल के हिमालयन नैशनल पार्क से सटा है। यहां तक पहुंचने के लिए सुंदर घाटियों के बीच से एक ट्रैक है। श्रीखंड महादेव की चोटी पर पहुँच कर आपको दुनिया का सबसे विशाल प्राकृतिक शिवलिंग मिलेगा जो लगभग 72 फीट उँचा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार यहाँ शिव जी का अब तक वास है।

श्रीखंड महादेव से जुड़ी कथा

कथानुसार, दानव भस्मासुर ने भगवान शिव जी को अपनी तपस्या से खुश कर वरदान माँगा कि वह जिस किसी के सर पर भी हाथ रख दे वह उसी समय स्वाहा हो जाए मतलब उसकी उसी समय मृत्यु हो जाए। भगवान शिव जी द्वारा उसे यह वरदान प्राप्त हो गया जिसके बाद अपनी दुष्ट राक्षस प्रवृत्ति के अनुसार उसने सबसे पहले भगवान शिव जी पर ही हाथ रख उनको ख़त्म करना चाहा, जिसका भगवान शिव जी को पता चलते ही वे एक गुफा में जा छुपे और भगवान विष्णु जी को कुछ उपाय कर इस राक्षस को ख़त्म करने को कहा। भगवान विष्णु जी ने मोहिनी का रूप धारण कर उस राक्षस को अपने साथ नचाते हुए छल से उसके हाथ को उसके अपने ही सर पर रखने को विवश कर दिया, जिससे उसकी उसी वक़्त मृत्यु हो गयी।

Shrikhand

श्रीखंड महादेव के समीप स्थित नैन सरोवर

Narender Sharma, Blue Particle Solutions

राक्षस की मृत्यु होते ही सारे देवताओं ने भगवान शिव जी को उस गुफा से बाहर आने को कहा पर शिव जी बाहर आने का मार्ग भूल गये। गुफा के अंदर ही अंदर एक गुप्त रास्ते से वे हिमालय की इस चोटी पर शक्ति के रूप में प्रकट हुए और उसके बाद से ही इसे श्रीखंड महादेव जी के रूप में पूजा जाने लगा। इसके साथ ही दो बड़ी चट्टाने हैं जिन्हें मां पार्वती और भगवान गणेश के नाम से पूजा जाता है।

श्रीखंड महादेव पहुँचें कैसे?

यहाँ की यात्रा आरंभ करने से पहले आपको शिमला पहुंचना होगा जहाँ से जाँव गाँव तक का मार्ग कुछ इस प्रकार है:

शिमला से रामपुर - 130 किमी

रामपुर से निरमंड - 17 किलोमीटर

निरमंड से बागीपुल - 17 किलोमीटर

बागीपुल से जाँव - 12 किलोमीटर

शिमला कैसे पहुँचें?

श्रीखंड महादेव की यात्रा के दौरान आपको तीन पड़ावों से गुज़रना होगा।

1. सिंघाड़ से थाचरु: जाँव गाँव से सिंघाड़ की यात्रा पैदल 3 किलोमीटर की होती है जहाँ से आपको थाचरु तक 12 किलो मीटर की यात्रा जंगल के मनोरम दृश्यों के बीच करनी होती है। इन प्राकृतिक दृश्यों के बीच आपकी थकान भी आपको याद नहीं रहती है।

Shrikhand Mahadev

श्रीखंड महादेव चोटी का दूर से सबसे मनोरम दृश्य

Sumita Roy Dutta

2. थाचरु से काली घाटी: थाचरू से तीन किलोमीटर की सीधी चढ़ाई के बाद हम पहुंचते हैं काली घाटी। काली घाटी में काले पहाड़ों पर बिछी बर्फ की सफेद परत अलग ही छटा बिखेरती है।

3. काली घाटी से भीम द्वार: भीम द्वार तक पहुंचने के लिए काली घाटी से सात किलोमीटर की कठिन पहाड़ी चढ़ाई है। रास्ते में हरियाली से भरी सुंदर घाटियां देख आत्मा तृप्त हो जाती है। पार्वती बाग की घटियाँ और उनमें खिलने वाले ब्रह्म कमल के फूलों से भरी घाटी का नज़ारा आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं।

Shrikhand

ब्रह्म कमल

Alosh Bennett

अंत में आप इन तीन पड़ावों को पार कर 6 किलोमीटर की दूरी सीधे और चढ़कर पहुँचते हैं, श्रीखंड महादेव के अद्भुत शिवलिंग के दर्शन करने। जहाँ पहुँच आप का उत्साह पहाड़ की उँचाई की तरह सबसे चरम सीमा पर पहुँच जाता है। पहाड़ और बादलों का एक साथ मिलने का दृश्य आपके लिए सबसे अलग और अद्भुत अनुभव होता है। कहा भी जाता है, यहाँ तक पहुँचने वाले तीसरे पड़ाव वाला स्थान भीम द्वार महाभारत के भीम द्वारा स्वर्ग तक पहुँचने के लिए बनाया गया मार्ग है। जहाँ से आप यहाँ तक का सफ़र तय करते हैं।

पड़ावों में, यहाँ आने वले श्रद्धालुओं के लिए लंगर व रहने के लिए कैंप की भी सुविधा उपलब्ध है।

यहाँ आने का उचित समय:

इस यात्रा को पूरा करने में आपको लगभग 10 दिन का समय लगता है। यहाँ आने का सबसे उचित समय है मई से सितंबर तक के महीने।

अपनी इस यात्रा को पूरा कर अपने स्वर्ग की यात्रा के सपने को इसी जीवन में पूरा करिए, लेकिन सारे दिशा निर्देशों का पालन करते हुए और अपनी दिव्य यात्रा को सबसे यादगार अनुभवों में सम्मिलित करिए।

अपने महत्वपूर्ण सुझाव व अनुभव नीचे व्यक्त करें।

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