27 साल पहले लिया गया संकल्प साकार हुआ और अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों हुआ। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी में हिंदू मंदिर बनाने का संकल्प 1997 में BAPS के तत्कालिन प्रमुख स्वामी महाराज ने लिया था। उनका मानना था कि अबू धाबी में भी एक मंदिर होना चाहिए।
इससे दोनों देश, इनकी संस्कृति, समुदाय और धर्म करीब आ सकें। आखिरकार इतने सालों बाद उनका संकल्प पूरा हो सका है। खास बात है कि अबू धाबी में इस मंदिर का निर्माण पूरी तरह से वहां के क्राउन प्रिंस द्वारा दान में दी गयी जमीन पर किया गया है।

बता दें, स्वामीनायारण संस्था यानी BAPS की दुनियाभर में 1200 से अधिक मंदिरे हैं। दिल्ली और गुजरात में अक्षरधाम मंदिर का निर्माण भी इसी संस्था ने करवाया है। इस मंदिर के जमीन UAE के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने तोहफे में दी थी। कहा जाता है कि जब साल 2015 में अपने UAE सफर के दौरान पीएम मोदी ने मंदिर बनाने का प्रस्ताव रखा तो क्राउन प्रिंस नाहयान ने यहां तक कह दिया था कि जिस जमीन पर लकीर खींची जाएगी, वो मंदिर के लिए दे दूंगा।

अबू धाबी में UAE सरकार ने कुल 27 एकड़ की जमीन मंदिर निर्माण के लिए दी। इसमें से साल 2015 में 13.5 एकड़ जमीन दी थी और साल 2019 में 13.5 एकड़ जमीन तोहफे में दी।

साल 2015 में जब प्रधानमंत्री मोदी UAE के दौरे पर गये और उन्होंने मंदिर बनाने को लेकर चर्चा की तो UAE के क्राउन प्रिंस ने जमीन तोहफे में देने का ऐलान कर दिया।

फरवरी 2018 में BAPS के प्रतिनिधि शेख मोहम्मद और पीएम मोदी से मिले। उन्होंने मंदिर के 2 मॉडल दिखाए। शेख मोहम्मद ने मंदिर के एक मॉडल को चुना। उसी महीने भूमि पूजन भी किया गया।

अप्रैल 2019 में मंदिर का विधिवत शिलान्यास (नींव) रखी गयी। उसी साल दिसंबर से मंदिर का निर्माण शुरू हुआ।

नवंबर 2021 में प्रथम शिला सप्ताह मनाया गया, जब मंदिर के पहले फ्लोर पर पहला नक्काशीदार पत्थर रखा गया।

सितंबर 2022 में मंदिर में संगमरमर का पहला स्तंभ स्थापित किया गया। इस दिन खास अनुष्ठान भी आयोजित किया गया।

नवंबर 2023 में महंत स्वामी महाराज ने अमृत कलश और ध्वजों का वैदिक अनुष्ठान किया। बाद में इन कलशों को मंदिर के 7 शिखरों पर स्थापित किया गया।

14 फरवरी 2024 को पीएम मोदी ने मंदिर का उद्धाटन किया। इस दौरान 42 देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

BAPS की तरफ से बताया गया मंदिर के लीड आर्किटेक्स ईसाई, प्रोजेक्ट मैनेजर सिख, डिजाइनर बौद्ध, कंस्ट्रक्शन कंपनी पारसी की और डायरेक्टर जैन हैं। मंदिर के लिए जमीन एक मुस्लिम देश के मुस्लिम प्रिंस ने तोहफे में दी।

27 एकड़ में इस मंदिर का निर्माण नागर शैली में किया गया है। मंदिर 13.5 एकड़ और 13.5 एकड़ में पार्किंग बनी है। पार्किंग में 14 हजार गाड़ियां और 50 बसें खड़ी हो सकतीं हैं। मंदिर के 7 शिखर और 5 गुंबद हैं. मंदिर की लंबाई 262 फीट, चौड़ाई 180 फीट और ऊंचाई 108 फीट है। मंदिर को बनाने में 700 करोड़ रुपये का खर्च आया है।

मंदिर निर्माण में लोहे या स्टील का इस्तेमाल नहीं हुआ है। इससे ये हजारों सालों तक जस का तस बना रहेगा। केवल चूना पत्थर और संगमरमर का इस्तेमाल हुआ है। मंदिर के प्रवेश द्वार में आठ मूर्तियां हैं जो सनातन धर्म के आठ मूल्यों का प्रतीक हैं। मंदिर का एम्फीथिएटर बनारस घाट के आकार का बना है ताकि वह भारतीयता का अहसास करवाता रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का UAE का यह 7वां दौरा था। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि इस मंदिर में विविधता में विश्वास की झलक दिखेगी। हिंदू धर्म के साथ-साथ कुरान की कहानियां भी यहां उकेरी गयी है।

पीएम मोदी ने कहा कि अब तक UAE को सिर्फ बुर्ज खलीफा और जायद मस्जिद के लिए जाना जाता था, लेकिन अब इसकी पहचान में एक और सांस्कृतिक अध्याय जुड़ गया है।

मंदिर में पत्थर पर खुदाई कर प्रधानमंत्री ने वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश लिखा।

बता दें, UAE के BAPS मंदिर में जिस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आरती कर रहे थे, ठीक उसी समय दुनिया के सभी 1200 से अधिक BAPS मंदिरों में भी आरती हो रही थी। इस तरह से यह एक वैश्विक आरती बन गयी थी।



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