
भारत विविधिताओं का देश है, चाहे बात खान-पान की हो या धर्म-संस्कृति की, यहां की हर बात निराली है। भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जहां सबसे ज्यादा देवी-दवताओं का पूजा की जाती है। आस्था की पकड़ यहां सबसे ज्यादा मजबूत है। भारत पौराणिक संस्कृति का हिस्सा रहा है, इसलिए आज भी यहां पुराने धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है। इस मामले में हिन्दू संप्रदाय सबसे ज्यादा सक्रिय है।
इतिहास से जुड़े साक्ष्य बताते हैं कि भारत में राज करने वाले हिन्दू शासकों ने कई भव्य मंदिरों का निर्माण करवाया था। उत्तर से अलग अगर दक्षिण भारत की बात करें पता चलता है, कि यहां मंदिरों का निर्माण शौर्य और शक्ति का प्रतीक हुआ करता था, इसलिए आपको यहां सबसे विशाल मंदिर देखने को मिलेंगे। दक्षिण भारत में कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं जिनका इतिहास पौराणिक काल से बताया जाता है।
आप यहां कुछ अद्भुत मंदिरों को भी देख सकते हैं, जिनसे कई पौराणिक किवदंतियां जुड़ी हुई हैं। कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जो अपने अद्भुत तथ्यों के लिए आकर्षण का केंद्र बनते हैं। आज इस लेख में हम आपको एक ऐसे ही अद्भुत मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे जुड़ा तथ्य आपको सच में हैरान कर देगा।

आदि विनायक मंदिर
तमिलनाडु स्थित आदि विनायक मंदिर भगवान गणेश को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर है। लेकिन यह मंदिर भारत में मौजूद भगवान गणेश के अन्य सभी मंदिरों से काफी अलग है। वैसे तो सभी गणेश मंदिरों में गजमुख स्वरुप प्रतिमा की पूजा की जाती है। लेकिन यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां गजमुख की नहीं बल्कि भगवान गणेश के इंसान स्वरूप की पूजा की जाती है।
इस मंदिर में मुख्य देवता का चेहरा गज की तरह नहीं बल्की इंसान की तरह है। अपनी इस अद्भुत खूबी के कारण यह मंदिर ज्यादा प्रसिद्ध है। इसके अलावा यह एक मात्र ऐसा गणेश मंदिर हैं जहां श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पूजा करने आते हैं।

एक अद्भत मंदिर
इस मंदिर से एक पौराणिक किवंदती भी जुड़ी है, माना जाता है कि यहां कभी भगवान राम का आगमन हुआ था, और उन्होंने अपने पितरों की शांति के लिए पूजा की थी। भगवान राम के द्वारा शुरू की गई इस परंपरा का आज भी पूरे रीति-रिवाजों के साथ पालन किया जाता है। दक्षिण भारत का यह मंदिर अपनी इन खूबियों के चलते ज्यादा प्रसिद्ध है, हालांकि यह बाकी दक्षिण मंदिरों के तरह उतना विशाल नहीं है।
पितरों की शांति के लिए पूजा अकसर नदी तट पर की जाता है, लेकिन यहां मंदिर के अंदर यह धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है। इसी विशेषता के चलते इस मंदिर को तिलतर्पणपुरी भी कहा जाता है। मंदिर में स्थानीय लोगों के अलावा दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं।

भगवान राम से जुड़ी पौराणिक कथा
PC- Ms Sarah Welch
पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान राम अपने पिता का अंतिम संस्कार कर रहे थे, तो उनके द्वारा रखे गए चार पिंड (चावल के लड्डू) कीड़ों के रूप में तब्दील हो गए थे, ऐसा बार-बार हुआ तो भगवान राम ने भोलेनाथ से प्रार्थना की। भगवान शिव ने उन्हें इस स्थान(आदि विनायक मंदिर) पर आकर पूजा करने के लिए कहा। जिसके बाद भगवान राम का इस मंदिर में आगमन हुआ और उन्होंने अपने पिता की आत्मा की शांति के लिए भोलेनाथ की पूजा की।
माना जाता है कि चावल के वो चार पिंड चार शिवलिंग में बदल गए थे। वर्तमान में ये चार शिवलिंग आदि विनायक मंदिर के पास स्थित मुक्तेश्वर मंदिर में मौजूद हैं।

भगवान शिव का मंदिर
इस मंदिर में भगवान गणेश के नरमुखी रूप से साथ-साथ भगवान शिव की भी पूजा की जाती है। यहां भोलेनाथ को समर्पित एक मंदिर भी स्थित है। जैसा की आपको बताया गया है कि यह मंदिर विशेषकर भगवान गणेश के नरमुखी रूप के लिए ज्यादा प्रसिद्ध है, लेकिन यहां पास मे ही मौजूद सरस्वती मंदिर के दर्शन करना भी भक्त जरूरी समझते हैं। यहां आने वाला हर एक श्रद्धालु आदि विनायक के साथ मां सरस्वति और भगवान शिव के मंदिर पर मत्था जरूर टेकता है।

धार्मिक मान्यता और कैसे करें प्रवेश
इस मंदिर को लेकर लोगों की धार्मिक मान्यता है कि यहां हर साल संकष्टी चतुर्थी के दिन महा गुरु अगस्त्य भगवान आदि विनायक की पूजा करने के लिए आते हैं। इसके अलावा श्रद्धालुओं का मानना है यहां भगवान गणेश की पूजा करने पर घर में सुख शांति का प्रवेश होता है। इसलिए यहां दूर-दूर से श्रद्धालु-भक्त पूजा करने के लिए आते है।
अगर आप भी तमिलनाडु आएं तो इस अद्भुत मंदिर के दर्शन अवश्य करें। यह मंदिर कूथानुर(Koothanur) नगर के पास तमिलनाडु राज्य के तिरुवरूर जिले में स्थित है। जहां आप तीनों मार्गों से आसानी से पहुंच सकते हैं यहां का नजदीकी हवाईअड्डातिरुचिरापल्ली / मदुरई एयरपोर्ट है।
रेल सेवा के लिए आप तिरुवरूर रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं। अगर आप चाहें तो यहां सड़क मार्गों से भी पहुंच सकते हैं। बेहतर सड़क मार्गों से तिरुवरूर राज्य के बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।



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