दिवाली का 5 दिवसीय त्योहार शुरू हो चुका है। आज धनतेरस का त्योहार मनाया जा रहा है। बाजारों में दिवाली की रौनक तो छायी हुई है और लोग त्योहारों पर Last Minute शॉपिंग भी कर रहे हैं। अगर आप भी अहमदाबाद में किसी ऐसे मार्केट की तलाश कर रहे हैं जहां आपको परंपरागत गुजराती सामान बड़ी ही किफायती कीमतों पर मिल जाएगी, तो सीधे पहुंच जाइए लाल दरवाजा मार्केट।
यह अहमदाबाद के सबसे पुराने मार्केट में से एक है, जहां इन दिनों दिवाली की लास्ट मिनट शॉपिंग करने वाले लोगों की बड़ी भीड़ जमा हो रही है।

क्या है लाल दरवाजा?
लाल दरवाजा अहमदाबाद शहर के प्रवेश द्वारों में से एक है। वर्ष 1411 में जब अहमद शाह प्रथम ने गुजरात सल्तनत की स्थापना की थी, तब उन्होंने दो किलों का भी निर्माण करवाया था। इनमें पहला किला था भद्रा किला और दूसरा था किला 1486 में उन्होंने बनवाया था। इन किलों में 12 प्रमुख और कुछ छोटे दरवाजे भी बनवाए गये थे। इस किले के साथ-साथ पूरे अहमदाबाद शहर को घेरने वाली चहारदीवारी का भी निर्माण किया गया था।
बाद में जब अहमदाबाद में रेलवे सेवाओं को शुरू किया गया तो अंग्रेजों ने इस चहारदीवारी को तो गिरा दिया लेकिन दरवाजों को बतौर स्मारक छोड़ दिया गया। कुछ लोगों का मानना है कि अहमदाबाद में 12 तो कुछ इतिहासकार 16 दरवाजों के होने की बात करते हैं। वहीं कुछ अहमदाबाद में 21 दरवाजों के होने का दावा भी करते हैं। इन्हीं में से एक था लाल दरवाजा।

कितनी थी लागत?
जानकारी के अनुसार वर्ष 1860 में अहमदाबाद के लाल दरवाजा को एक गेटवे में बदल दिया गया। 13 फीट चौड़ा और 15 फीट ऊंचा लाल दरवाजा को बनाने में उस समय कुल लागत ₹110 की आयी थी। यह अहमदाबाद के दो प्रमुख दरवाजों में से एक है। इसके अलावा दूसरा मुख्य दरवाजा भद्रा दरवाजा था।
इन दोनों दरवाजों के अलावा अहमदाबाद की चहारदीवारी में जो अन्य दरवाजे बनाए गये थे, उनका नाम गणेश दरवाजा, राम दरवाजा, बरादरी दरवाजा, खानपुर दरवाजा, शाहपुर दरवाजा, दिल्ली गेट, दरियापुर दरवाजा, कालुपुर दरवाजा, सारंगपुर दरवाजा, रायपुर दरवाजा, अस्तोदिया दरवाजा, महुदा दरवाजा, जमालपुर दरवाजा, खान जहां दरवाजा, रायखद दरवाजा, माणेक दरवाजा आदि हैं।

किफायती सामानों का स्वर्ग
अहमदाबाद में लाल दरवाजा को केंद्र में रखते हुए ही इसके चारों तरफ बाजार लगने लगे जो आज भी लाल दरवाजा मार्केट के नाम से मशहूर है। इस मार्केट की सबसे बड़ी खासियत है कि यहां गुजरात में बनने वाली सभी तरह की पारंपरिक वस्तुएं बड़ी ही किफायती कीमतों पर मिलती है।
दिवाली के मौके पर अगर आपको अलग-अलग तरह के सामान जैसे बैग-पर्स या वॉलेट, ज्वेलरी, कपड़े और साज-श्रृंगार के सामान से लेकर घर सजाने का सामान, जूते, चनिया-चोली, रंग-बिरंगे दुपट्टे आदि या फिर किताबें तक खरीदनी हो, तो आप एक बार लाल दरवाजा मार्केट जरूर आएं। यहां सामानों की कीमत महज ₹10-₹15 से शुरू होती है। सामानों के आकार और प्रकार के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता के आधार पर उनके दाम बढ़ते जाते हैं।
शॉपिंग के साथ पेट-पूजा भी
लाल दरवाजा मार्केट में आपको भूखे घूमने की जरूरत नहीं होगी। क्योंकि यहां आपको कई तरह के लजीज मुगलई व्यंजन बेचने वाले दुकान से लेकर स्ट्रीट फूड बेचने वाले ठेले भी मिल जाएंगे। यहां खरीदारी के साथ-साथ इन व्यंजनों का स्वाद चखते हुए कब आपकी दिवाली की लास्ट मिनट शॉपिंग भी पूरी हो जाएगी, आपको खुद पता नहीं चलेगा।
हां, किफायती मार्केट होने की वजह से यहां भीड़ काफी ज्यादा होती है। इसलिए किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचने या फिर चोरी-चकारी या पॉकेटमारी से बचने के लिए सतर्क रहने की बहुत जरूरत होती है। छोटे से छोटे सामान की खरीदारी करते समय हो या महंगा सामान खरीदें, बिल जरूर लें।



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