
गुवाहाटी से लगभग 184 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तेजपुर ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर असम का एक खूबसूरत शहर है। शांत पहाड़ियों, गहरी घाटियों और हरियाली से घिरा यह शहर शानदार अवकाश के लिए एक आदर्श स्थल है। शहर की भागदौड़ से दूर तेजपुर प्रकृति प्रेमियों से लेकर इतिहास में दिलचस्पी रखने वालों और शांत स्थल की खोजियों का पसंदीदा स्थल है। यह राज्य का पांचवा बड़ा शहर है, अपने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण इसे असम का 'कल्चरल कैपिटल' भी कहा जाता है।
इन सब के अलावा तेजपुर पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व भी रखता है। यहां से प्राप्त किए खंडहर चौथी शताब्दी के आसपास के बताए जाते हैं। इस शहर के नाम(तेजपुर) का शाब्दिक अर्थ है 'रक्त का शहर'। इस शहर का नाम इतिहास से जुड़ी किसी घटना पर आधारित है। इस लेख के माध्यम से जानिए पर्यटन के लिहाज से यह शहर आपके लिए कितना खास है, जानिए यहां के शानदार दर्शनीय स्थलों के बारे में।

नामेरी राष्ट्रीय उद्यान
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तेजपुर भ्रमण की शुरुआत आप यहां के खूबसूरत पर्यटन स्थल नामेरी राष्ट्रीय उद्यान से कर सकते हैं। हिमालय की तलहटी में बसा यह अभयारण्य लगभग 200 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला है। अपनी खास भौगोलिक स्थित के कारण यह पूर्वोत्तर के चुनिंदा प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्यों में गिना जाता है। जैव विविधता के मामले में यह एक समृद्ध स्थल है। आप यहां असंख्य वनस्पति भंडार के साथ असंख्य जीव-जन्तुओं को देख सकते हैं।
नामेरी उद्यान मुख्य शहर तेजपुर से 35 कि.मी की दूरी पर स्थित है। जंगली जीवों में आप यहां बाघ, सांभर, चेदुंआ, लोमड़ी, हिरण, जंगली बिल्ली आदी को देख सकते हैं। इसके अलावा आप यहां पक्षी विहार का भी आनंद ले सकते हैं।

अग्निगढ़
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प्राकृतिक स्थलों के साथ-साथ आप यहां के ऐतिहासिक स्थलों को भी देख सकते हैं।अग्निगढ़ किला यहां के सबसे प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों में गिना जाता है, जहां पर्यटक जाना पसंद करते हैं। अपने खास नाम के साथ यह किला एक महत्वपूर्ण पौराणिक घटना के लिए भी जाना जाता है। इस किले के नाम का शाब्दिक अर्थ है, आग से घिरा किला।
यह पहाड़ी पर बना एक अद्भुत किला है। यह किला बाणासुर की बेटी और कृष्ण के पोते अनिरुद्ध के मध्य प्रेम संबंध को दर्शाता है। चूंकि यह किला पहाड़ी पर स्थित है इसलिए पर्यटकों को ऊपर घुमावदार रास्तों का सहारा लेकर किले तक पहुंचना पड़ता है। यहां से आप शहर के खूबसूरत नजारों को देख सकते हैं।

चित्रलेखा उद्यान
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चित्रलेखा उद्यान की गिनती तेजपुर के सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में होती है। यह शहर का एक खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट है, जो 1906 में बनाया और 1996 में पुनर्निर्मित किया गया था। अपनी खास भौगोलिक स्थिति के साथ यह उद्यान शहर को खास बनाने का काम करता है। आप यहां पहाड़ी नजारों और झीलों की खूबसूरती का आनंद ले सकते हैं।
चारों तरफ हरियाली से भरा यह उद्यान सैलानियों को काफी ज्यादा आकर्षित करता है। यहां की झीलों में आप कई वाटर एक्टिविटी का रोमांचक आनंद भी ले सकते हैं। एक आरामदायक अनुभव के लिए आप यहां आ सकते हैं।

पदुम पोखरी झील
इन स्थानों के अलावा आप यहां की पदुम पोखरी झील की सैर का आनंद ले सकते हैं। यह एक खूबसूरत झील है जिस पर एक छोटा द्वीप भी बना है। एक छोटा द्वीप पर्यटकों के लिए एक पार्क का काम करता है। इस झील को 'कमल तालाब' के नाम से भी जाना जाता है, पदुम का अर्थ कमल और पोखरी का मतलब तालाब।
इस जलाशय के अलावा यहां एक 'बोर पोखरी' नान का दूसरा तालाब भी है। स्थानीय लोगों के अनुसार दो दोनों तालाब बाण राजा और उनकी बेटी उषा के स्मृति-चिह्न हैं। झील स्थल पर आप म्यूजिकल फाउंटेन, टॉय ट्रेन और प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद भी ले सकते हैं।

कोलिया भोमोरा सेतु
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उपरोक्त स्थलों के अलावा आप यहां के सबसे खूबसूरत कोलिया भोमोरा सेतु की की सैर का भी प्लान बना सकते हैं। यह ब्रह्मपुत्र नदी पर बना कंक्रीट का ब्रिज है जो सोनितपुर और नागांव जिले को जोड़ने का काम करता है। जानकारी के अनुसार यह 3015 मीटर लंबा पुल है जिसे बनाने में 6 वर्ष का समय लगा था।
पुल बनाने का काम 1981 में शुरु हुआ था और इसे 1937 में बनाकर तैयार कर दिया गया था। देखने के लिहाज से यह काफी शानदार है, खासकर रात के दौरान यह काफी खूबसूरत नजर आता है।



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