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इस बार अमृतसर जायें तो स्वर्ण मंदिर ही नहीं ये खास चीजें भी जरुर घूमे

Written By: Goldi

अम्बरसर जिसे हम सभी अमृतसर के नाम से जानते हैं। अमृतसर की खोज 1577 में सिखों के चौथे गुरु श्री राम दास जी ने की थी..अमृतसर शहर का नाम स्वर्ण मंदिर में बने अमृत सरोवर के नाम पर रखा गया है।

अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से जुड़ी दिलचस्प बातें!

यह एक बेहद ही खूबसूरत शहर है,इस शहर में कदम रखते ही आप अपने अंदर एक देशभक्ति का जज्बा महसूस कर सकते हैं। हर शाम वाघा बॉर्डर पर इंडो-पाक के बीच रिट्रीट सेरेमनी आयोजित की जाती है, जिसे देखने दोनों ही देशों से हजारो की तादाद में पर्यटक पहुंचते हैं। इसके अलावा जलियांवाला बाग आपको स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में ले जाता हुआ सा प्रतीत होता है। इस सबके अलावा अमृतसर में और भी काफी कुछ है, जिनसे शायद पर्यटक रूबरू नहीं है..इसलिए आज हम आपको अपने इस लेख से रूबरू कराने जा रहे हैं, अमृतसर के कुछ अनसुने पर्यटक स्थलों के बारे में

गोबिंगढ़ किला

गोबिंगढ़ किला

गोबिंगढ़ किला अमृतसर का सबसे पुराना किला है, जो अमृतसर के इतिहास को भी दर्शाता है। पहले यह किला गुजर सिंह किले के नाम से जाना जाता था, लेकिन 19वीं शताब्दी में सिख साम्राज्य के संस्थापक महाराजा रंरंजीत सिंह ने इस पर कब्जा कर लिया, ताकि वह अपने खजाने को इस किले में सुरक्षित रख सकें। हालांकि बाद में बिर्टिश समुदाय ने इस किले पर हमला बोल दिया, जिसके बाद से यह किला अपनी पहचान खोता चला गया। हाल ही में यह किला पर्यटकों के लिए खोला गया है।PC:Gobindgarh Fort

रामतीर्थ

रामतीर्थ

रामतीर्थ हिंदुयों का एक पवित्र धार्मिक स्थल है, बताया जाता है कि, इसी जगह वाल्मीकि ने बैठकर रामायण लिखी थी। हालांकि इस बात कि अब तक कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थनीय लोगो का मानना है कि, रामतीर्थ वही जगह है, जहां सीता अयोध्या छोड़ने के बाद आयीं थी, और यहीं उन्होंने अपने दोनों बेटों लव-कुश को जन्म भी दिया था।राम तीर्थ अमृतसर से 11 किमी दूर चोग्वान रोड पर स्थित है।

दुर्गियाना मंदिर

दुर्गियाना मंदिर

दुर्गियाना मंदिर मां दुर्गा का मंदिर है, जोकि एकदम स्वर्ण मंदिर की स्टाइल में बना हुआ है। मंदिर सरोवर के किनारे बना है,मंदिर किआ गुम्बद सोने से मढ़ा हुआ है और बाकी का मंदिर पूरी तरह मार्बल से निर्मित है। इसे सिल्वर मंदिर भी कहा जाता है क्यों कि इसके दरवाजे सिल्वर के हैं, जो इसकी खूबसूरती को ओर भी बढ़ाते हैं। यह मंदिर लोहगढ़ गेट के पास स्थित है,जिसक निर्माण मदन मोहन मालवीय ने कराया था।PC:Diego Delso

महाराजा रंजीत सिंह म्यूजियम

महाराजा रंजीत सिंह म्यूजियम

यह संग्रहालय लाहौर के शालीमार गार्डन के नजदीक स्थित है और अमृतसर में अपने प्राकृतिक प्राकृतिक दृश्य के कारण एक लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण है। इसे पहले कंपनी गार्डन के रूप में नामित किया गया था, लेकिन बाद में इसे गुरु राम दास के प्रति समर्पण के लिए महाराजा रणजीत सिंह में बदल दिया गया।

यह महाराजा का ग्रीष्म स्थान हुआ करता था, जसी वर्ष 1977 में संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया गया,इस म्यूजियम में प्राचीन वस्तुएं देखी जा सकती हैं। यहां पर कोहिनूर हीरे की प्रतिकृति यहां भी रखी गई है..घोड़े पर बैठे महाराजा की जीवंत प्रतिमा यहां एक और मुख्य आकर्षण है, जो उस समय के दौरान कारीगरों के विश्वसनीय काम का प्रदर्शन करती है।PC:Juju24kushagra

सराय अमानत खान

सराय अमानत खान

सराय फ़ारसी कॉलग्राफर अमानत खान के निवासी थे, जिन्होंने ताजमहल पर कुरान से छंदियां लिखी हैं। सराय अमानत खान एक अच्छी तरह से डिज़ाइन कारवां सरलाई है, जो मुगल काल की झलक दिखाती है, इसकी चमकता हुआ टाइल सजावट के लिए प्रसिद्ध, अरबी अभिलेखों और सजावटी मुगल गेटवे के साथ उत्कीर्ण मस्जिद। यह अमृतसर से करीब 40 किमी दूर है।

पुल कंजरी

पुल कंजरी

पुल कंजरी एक छोटी नहर पर एक पुल है जो मोरन के बाद महाराजा रणजीत सिंह के आदेश पर बनाया गया था। इसी नहर में रॉयल कोर्ट में नाचने वाली एक नर्तकी ने अपनी पसंदीदा चांदी की सैंडल की जोड़ी खो दी थी।

इस पुल को 1 965 और 1 971 की भारत-पाकिस्तान युद्धों के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों ने अपनी निकटता के कारण इसका इस्तेमाल लिया था। हालांकि, भारतीय सेना ने इसे बाद में ले लिया और शहीद जवानों की याद में यहां एक स्मारक भी बनाया गया है। यह वाघा सीमा से 5 किलोमीटर दूर धोनई कलान नामक गांव में स्थित है।

PC:Vikasjariyal

गुरुद्वारा गोइंदवाल साहिब

गुरुद्वारा गोइंदवाल साहिब

यह तीर्थस्थल की साइट सिख समुदाय के लिए बहुत महत्व रखती है क्योंकि यहां सिखों के तीसरे गुरु, गुरु अमरदास यहां रहते थे और 33 साल तक प्रचार किया था। यहां पर लंगर भी चखा जा सकता है।PC:Jasleen Kaur

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