किसी मंदिर के एक गर्भगृह में अगल-बगल में भगवान शिव के दो लिंगस्वरूपों के स्थापित होने की बात तो आपने जरूर सुनी होगी। लेकिन क्या आपको पता है, भारत में एक मंदिर ऐसा भी है जहां महादेव के दो शिवलिंग स्थापित हैं जिनके बीच की दूरी समय-समय पर घटती-बढ़ती रहती है।

शिवलिंगों के ऐसे चमत्कार को देखकर सिकंदर भी हैरान हो गया था। इसके बाद उसने ऐसा कदम उठाया कि आज तक लोग जब भी हिमाचल प्रदेश के इस मंदिर में आते हैं, उसका नाम जरूर लेते हैं। जानिए सिकंदर ने इस शिवलिंग के साथ ऐसा क्या किया था कि इस मंदिर में आने वाले लोग उसका नाम नहीं भूल पाते हैं।
कहां है यह अनोखा शिवलिंग
भगवान शिव ऐसा अनोखा शिवलिंग जिसे देखकर सिकंदर भी हैरान हो गया था, हिमाचल प्रदेश में स्थित है। यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के काठगढ़ में स्थित है। इस मंदिर में भगवान शिव के दो शिवलिंग स्थापित जो एक-दूसरे के बिल्कुल पास-पास ही होते हैं।

लेकिन निर्धारित समय पर इन दोनों शिवलिंगों के बीच की दूरी घटती-बढ़ती रहती है। मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान शिव अर्धनारीश्वर स्वरूप में विराज करते हैं। इसलिए इस मंदिर को अर्धनारीश्वर महादेव का मंदिर कहा जाता है। शिवरात्री और सावन में इस मंदिर में बड़े धूम-धाम से भगवान शिव व पार्वती की पूजा आयोजित की जाती है।
सिकंदर ने किया ऐसा काम कि देखते रह गये लोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सिकंदर अपने साम्राज्य का विस्तार कर रहा था, उस समय वह हिमाचल प्रदेश के अर्धनारीश्वर महादेव के मंदिर के पास पहुंचा। तब उसने इस शिवलिंग की पूजा करते हुए एक फकीर को पूजा करते हुए देखा। भगवान शिव के दो लिंग स्वरूपों के बीच घटती-बढ़ती दूरी को देखकर वह हैरान सा रह गया।

इस शिवलिंग से सिकंदर इतना प्रभावित हुआ कि उसने इस जगह मंदिर निर्माण करवाने का निर्णय लिया। बताया जाता है कि तब सिकंदर ने उस टीले को पहले समतल करवाया जिसपर यह शिवलिंग स्थापित था। इसके बाद उसने यहां एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया।
क्या है इस शिवलिंग की खासियत
काठगढ़ में स्थापित भगवान शिव के इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है कि यहां भोलेनाथ अर्धनारीश्वर स्वरूप में यानी मां पार्वती के साथ विराजमान हैं। मंदिर में स्थापित शिवलिंग दो भागों में बंटा हुआ है। खास बात यह है कि निर्धारित समय पर दोनों शिवलिंगों के बीच की दूरी घटती-बढ़ती रहती है। जानकारों का मानना है कि ऐसा ग्रह नक्षत्रों की वजह से होता है।

गर्मी के मौसम में दोनों शिवलिंग एक-दूसरे से काफी दूर हो जाते हैं, जबकि सर्दी के मौसम में दोनों शिवलिंग आपस में जुड़कर एक हो जाते हैं। शिवलिंग के दोनों भागों में शिवरूपी आराध्य की ऊंचाई 7 से 8 फीट और माता पार्वती स्वरूप आराध्य की ऊंचाई 5 से 6 फीट है। यह शिवलिंग अष्टकोण और काले-भूरे रंग का है।
इस साल सावन में भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप की पूजा करने हिमाचल प्रदेश के काठगढ़ में जरूर जाएं। हमें पूरा विश्वास है कि आप जब भी इस मंदिर में जाएंगे हमारा यह आर्टिकल जरूर याद करेंगे। भगवान शिव और देश के कोने-कोने में फैले अन्य ऐसे ही आश्चर्यजनक मंदिरों व दर्शनीय स्थलों की जानकारी के लिए विभिन्न सोशल मीडिया साइट्स पर हमें जरूर फॉलो करें। Facebook, Twitter और Intagram के बाद अब NativePlanet सोशल मीडिया साइट Threads पर भी उपलब्ध है।



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